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8 महिला खिलाड़ियों ने हरियाणा सरकार पर लगाया भेदभाव का आरोप, खेलनीति पर उठाए सवाल

Tue, 01 Jan 2019 09:21 AM IST
खुशबू गोयल अंकित चौहान, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा)
अंकित चौहान, अमर उजाला, सोनीपत (हरियाणा) Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 01 Jan 2019 09:21 AM IST
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8 hockey players of Haryana accused discrimination on government
हरियाणा सरकार

सरकार और खिलाड़ियों के बीच नए साल में नया विवाद खड़ा हो गया है। इस बार विवाद भी किसी एक से नहीं, बल्कि भारतीय हॉकी टीम की जान कही जाने वाली सभी 8 महिला खिलाड़ियों से हुआ है। इन सभी आठ खिलाड़ियों ने एशियन गेम्स के सिल्वर मेडल के आधार पर प्रदेश में ए ग्रेड की नौकरी मांगी है, जिस पर सरकार ने केवल बी ग्रेड की नौकरी देने की बात कही है तो इनका इनाम भी 1.5 करोड़ की जगह 75 लाख देने के लिए कहा गया है।

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 इस पर ही यह सभी खिलाड़ी भड़क गई हैं और केंद्र की नौकरी छोड़कर प्रदेश में आने से साफ इंकार कर दिया है। इन खिलाड़ियों ने खेल मंत्री से लेकर सीएम तक मिलकर इस तरह चल रहे भेदभाव को खत्म करने की मांग भी रखी है। एशियन गेम्स 2018 में सिल्वर मेडल जीतने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम में हरियाणा से आठ खिलाड़ी खेली थीं और इन सभी के सहारे ही भारत को सिल्वर मेडल मिला था।
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जिनमें कुरुक्षेत्र से कप्तान रानी रामपाल के अलावा नवनीत कौर व नवजोत कौर, सोनीपत से मोनिका मलिक व नेहा गोयल, यमुनानगर से उप कप्तान दीपिका ठाकुर, हिसार से गोलकीपर सविता पूनिया, हिसार से उदिता हैं। 
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एशियाड में सिल्वर जीतने के बाद इन सभी ने प्रदेश में ए ग्रेड की नौकरी के लिए आवेदन किया, लेकिन खेल विभाग के अधिकारियों ने इनको बी ग्रेड की नौकरी ही दिए जाने की बात कही। इसके साथ ही इनाम की राशि भी डेढ़ करोड़ से 75 लाख देने के लिए कहा गया। इसका कारण बताया गया कि टीम इवेंट में खेलने वालों के लिए पॉलिसी में बी ग्रेड की नौकरी व 75 लाख रुपये देने का प्रावधान है। जबकि इस नई पॉलिसी की अधिसूचना 5 सितंबर को जारी की गई है और एशियाड में सिल्वर मेडल पुरानी पॉलिसी के दौरान जीता गया है। 

8 hockey players of Haryana accused discrimination on government
हरियाणा सरकार

इस कारण ही भारतीय महिला हॉकी टीम की सभी आठ खिलाड़ी सरकार से नाराज हो गई हैं। अपनी नाराजगी जताने के लिए सभी खिलाड़ी खेलमंत्री अनिल विज से लेकर सीएम मनोहर लाल तक से मिलीं और उनको बताया गया कि जब मेडल नई खेल नीति से पहले जीता गया है तो उनको नई नीति के आधार पर नौकरी व इनाम क्यों दिया जाएगा। जिस पर सीएम व खेलमंत्री दोनों ने मामले को सुलझाने का केवल आश्वासन दिया है।

केंद्र में पहले ही बी ग्रेड से बेहतर नौकरी पर सात खिलाड़ी
इनमें से सात खिलाड़ी पहले ही केंद्र में नौकरी कर रही हैं जो प्रदेश की बी ग्रेड की नौकरी से बेहतर है। रानी रामपाल व सविता पूनिया साई में कोच है तो नवनीत कौर, नवजौत कौर, दीपिका, मोनिका, नेहा गोयल रेलवे में कार्यरत हैं। इस समय उदिता के पास नौकरी नहीं है। पहले ही केंद्र में बी ग्रेड से बेहतर नौकरी होने के कारण खिलाड़ियों ने प्रदेश में बी ग्रेड पर आने से साफ इंकार कर दिया है। 

मैं इस समय रेलवे में नौकरी कर रही हूं, जहां 4600 ग्रेड पे है और अब वहां जल्द ही प्रमोशन मिलने वाला है। ऐसे में उससे नीचे बी ग्रेड की नौकरी पर प्रदेश में नहीं आउंगी और यह खेलमंत्री को भी बोल दिया है। इस तरह भेदभाव किया जा रहा है कि जब मेडल पुरानी खेल नीति के समय जीता है तो नौकरी भी उसके आधार पर मिलनी चाहिए। मोनिका मलिक, हॉकी खिलाड़ी

इस समय रेलवे में नौकरी कर रही हूं और प्रदेश की बी ग्रेड की नौकरी से वह अच्छी है। ऐसे में प्रदेश में बी ग्रेड की नौकरी लेने का कोई मतलब ही नहीं बनता है। सरकार ए ग्रेड की नौकरी देती है तो यहां आ सकते हैं। सरकार गलत कर रही है, क्योंकि पुरानी खेल नीति के आधार पर नौकरी मिलनी चाहिए। नेहा गोयल, हॉकी खिलाड़ी

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