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World Championship: जैस्मिन, नूपुर ने फाइनल में पहुंचकर जगाई स्वर्ण की उम्मीद; खाली हाथ लौटे पुरुष मुक्केबाज
Sat, 13 Sep 2025 08:37 AM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लिवरपूल
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लिवरपूल
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Sat, 13 Sep 2025 08:37 AM IST
सार
जैस्मिन ने सेमीफाइनल में वेनेजुएला की कैरोलिना अल्काला को 5-0 से परास्त किया। दिग्गज हवा सिंह की पोती नूपुर ने तुर्किये की सेयमा को 5-0 से हराया।
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जैस्मिन और नूपुर
- फोटो : BFI Media
विस्तार
बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों की पदक विजेता जैस्मिन लंबोरिया (57 किग्रा भारवर्ग) और नूपुर (80+किग्रा भारवर्ग) ने विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप के फाइनल में प्रवेश किया। जैस्मिन ने सेमीफाइनल में वेनेजुएला की कैरोलिना अल्काला को 5-0 से परास्त किया। वह फाइनल में पोलैंड की जूलिया से भिड़ेंगी। दिग्गज हवा सिंह की पोती नूपुर ने तुर्किये की सेयमा को 5-0 से हराया। इससे पहले मीनाक्षी हुड्डा ने भारत का चौथा पदक पक्का किया। वह महिलाओं के 48 भारवर्ग के सेमीफाइनल में पहुंच गई हैं। मीनाक्षी ने अंडर-19 वर्ग की विश्व चैंपियन इंग्लैंड की एलाइस पंपेरी को क्वार्टर फाइनल में हराया।
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कड़े संघर्ष से गुजरा है मीनाक्षी का सफर
हरियाणा में रोहतक जिले के रुरकी गांव की 24 साल की मीनाक्षी चार भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनके पिता ऑटो रिक्शा चलाते हैं और मां गृहिणी हैं। उन्हें गुजारा करने के लिए संघर्ष करना पड़ता था। निजी कोच विजय हुड्डा ने शुरुआत में खुराक, किट और यात्रा खर्च में मदद की। वह अपनी अकादमी में निशुल्क ट्रेनिंग देते हैं। 2022 में एशियाई चैंपियनशिप में रजत जीतने वाली मीनाक्षी की यह पहली विश्व चैंपियनशिप है।
हरियाणा में रोहतक जिले के रुरकी गांव की 24 साल की मीनाक्षी चार भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनके पिता ऑटो रिक्शा चलाते हैं और मां गृहिणी हैं। उन्हें गुजारा करने के लिए संघर्ष करना पड़ता था। निजी कोच विजय हुड्डा ने शुरुआत में खुराक, किट और यात्रा खर्च में मदद की। वह अपनी अकादमी में निशुल्क ट्रेनिंग देते हैं। 2022 में एशियाई चैंपियनशिप में रजत जीतने वाली मीनाक्षी की यह पहली विश्व चैंपियनशिप है।
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12 साल में पहली बार पुरुष वर्ग में झोली खाली
पुरुष वर्ग में 12 वर्ष में पहली बार ऐसा हुआ जब भारतीय मुक्केबाजों को खाली हाथ लौटना होगा। जदुमणि सिंह के सामने गत विश्व चैंपियन कजाखस्तान के सांजेर ताशकेनबे थे जिनके खिलाफ उन्हें 0-4 से हार मिली। जदुमणि की हार के साथ यह तय हो गया कि भारत के 10 सदस्यीय पुरुष दल का इस बार कोई पदक नहीं मिलेगा। ऐसा 2013 के बाद पहली बार होगा। ताशकंद में 2023 में भारत ने तीन कांस्य जीते थे।
पुरुष वर्ग में 12 वर्ष में पहली बार ऐसा हुआ जब भारतीय मुक्केबाजों को खाली हाथ लौटना होगा। जदुमणि सिंह के सामने गत विश्व चैंपियन कजाखस्तान के सांजेर ताशकेनबे थे जिनके खिलाफ उन्हें 0-4 से हार मिली। जदुमणि की हार के साथ यह तय हो गया कि भारत के 10 सदस्यीय पुरुष दल का इस बार कोई पदक नहीं मिलेगा। ऐसा 2013 के बाद पहली बार होगा। ताशकंद में 2023 में भारत ने तीन कांस्य जीते थे।