{"_id":"67c705a59f3fcdd6d10e25e4","slug":"indian-olympic-association-chief-p-t-usha-defended-her-decision-to-appoint-an-ad-hoc-committee-for-boxing-2025-03-04","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"IOA: पीटी उषा ने तदर्थ समिति नियुक्त करने का बचाव किया, बोलीं- बीएफआई जिम्मेदारी पूरी करने में विफल रहा","category":{"title":"Sports","title_hn":"खेल","slug":"sports"}}
IOA: पीटी उषा ने तदर्थ समिति नियुक्त करने का बचाव किया, बोलीं- बीएफआई जिम्मेदारी पूरी करने में विफल रहा
Tue, 04 Mar 2025 07:23 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Tue, 04 Mar 2025 07:23 PM IST
सार
उषा का यह बयान आईओए के उपाध्यक्ष गगन नारंग के 28 फरवरी के पत्र के जवाब में आया है। पूर्व ओलंपिक कांस्य विजेता निशानेबाज ने उन पर मनमाने आदेश जारी करने और खिलाड़ियों के कल्याण को कम करने का आरोप लगाया था।
विज्ञापन
पीटी उषा
- फोटो : ANI
विस्तार
भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की प्रमुख पीटी उषा ने मुक्केबाजी के लिए तदर्थ समिति नियुक्त करने के फैसला का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) पिछले एक साल में अपनी मौलिक जिम्मेदारियों को पूरा करने में विफल रहा है और व्यवस्था को बहाल करने तथा उचित प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए उनका यह कदम जरूरी था।
विज्ञापन
गगन नारंग ने उषा पर मनमाने आदेश जारी करने के लगाए थे आरोप
उषा का यह बयान आईओए के उपाध्यक्ष गगन नारंग के 28 फरवरी के पत्र के जवाब में आया है। पूर्व ओलंपिक कांस्य विजेता निशानेबाज ने उन पर मनमाने आदेश जारी करने और खिलाड़ियों के कल्याण को कम करने का आरोप लगाया था। नारंग आईओए कार्यकारी परिषद के सदस्य भी हैं। आईओए के आदेश पर दिल्ली उच्च न्यायालय के स्थगन के बावजूद उषा अपनी रुख पर का दृढ़ता से कायम है। बीएफआई द्वारा दायर याचिका पर अदालत ने आईओए से जवाब मांगते हुए नोटिस जारी किया है।
उषा का यह बयान आईओए के उपाध्यक्ष गगन नारंग के 28 फरवरी के पत्र के जवाब में आया है। पूर्व ओलंपिक कांस्य विजेता निशानेबाज ने उन पर मनमाने आदेश जारी करने और खिलाड़ियों के कल्याण को कम करने का आरोप लगाया था। नारंग आईओए कार्यकारी परिषद के सदस्य भी हैं। आईओए के आदेश पर दिल्ली उच्च न्यायालय के स्थगन के बावजूद उषा अपनी रुख पर का दृढ़ता से कायम है। बीएफआई द्वारा दायर याचिका पर अदालत ने आईओए से जवाब मांगते हुए नोटिस जारी किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
उषा ने नारंग को भेजा जवाब
उषा ने नारंग को भेजे जवाब में कहा, नारंग आपके इस दावे में कोई सच्चाई नहीं है कि इस निर्णय या मेरी ओर से किसी कथित मनमानी कार्रवाई के कारण खिलाड़ियों को नुकसान हो रहा है। तदर्थ समिति नियुक्त करने का निर्णय मनमाना नहीं था, बल्कि व्यवस्था बहाल करने, उचित प्रशासन सुनिश्चित करने और खिलाड़ियों के विकास को प्राथमिकता देने के लिए एक आवश्यक कदम था। दुर्भाग्यपूर्ण वास्तविकता यह है कि बीएफआई पिछले वर्ष राष्ट्रीय चैंपियनशिप आयोजित करने सहित अपनी मूलभूत जिम्मेदारियों को पूरा करने में विफल रहा है।
उषा ने नारंग को भेजे जवाब में कहा, नारंग आपके इस दावे में कोई सच्चाई नहीं है कि इस निर्णय या मेरी ओर से किसी कथित मनमानी कार्रवाई के कारण खिलाड़ियों को नुकसान हो रहा है। तदर्थ समिति नियुक्त करने का निर्णय मनमाना नहीं था, बल्कि व्यवस्था बहाल करने, उचित प्रशासन सुनिश्चित करने और खिलाड़ियों के विकास को प्राथमिकता देने के लिए एक आवश्यक कदम था। दुर्भाग्यपूर्ण वास्तविकता यह है कि बीएफआई पिछले वर्ष राष्ट्रीय चैंपियनशिप आयोजित करने सहित अपनी मूलभूत जिम्मेदारियों को पूरा करने में विफल रहा है।
उन्होंने कहा, एशियाई खेल (2026) नजदीक आ रहे हैं, ऐसे में नई प्रतिभाओं की पहचान करने, होनहार मुक्केबाजों का चयन करने और भारत की पदक संभावनाओं को बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण या अभ्यास कार्यक्रमों को लागू करने के लिए बहुत कम या कोई प्रयास नहीं किया गया है।
पांच सदस्यीय तदर्थ समिति का गठन किया था
आईओए ने 24 फरवरी को देश में मुक्केबाजी के मामलों की देखरेख के लिए पांच सदस्यीय तदर्थ समिति का गठन किया था। आईओ एक का आरोप है कि बीएफआई समय पर राष्ट्रीय महासंघ का चुनाव कराने में विफल रहा। बीएफआई ने आईओए के फैसले को अवैध करार दिया और आदेश को रद्द करने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। नारंग ने यह भी दावा किया कि बीएफआई के संचालन के लिए तदर्थ समिति बनाने का उषा का फैसला आईओए की कार्यकारी समिति के परामर्श या अनुमोदन के बिना किया गया था। उन्होंने उषा से आदेश वापस लेने और विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए कार्यकारी समिति की आपातकालीन बैठक बुलाने का आग्रह किया था।
आईओए ने 24 फरवरी को देश में मुक्केबाजी के मामलों की देखरेख के लिए पांच सदस्यीय तदर्थ समिति का गठन किया था। आईओ एक का आरोप है कि बीएफआई समय पर राष्ट्रीय महासंघ का चुनाव कराने में विफल रहा। बीएफआई ने आईओए के फैसले को अवैध करार दिया और आदेश को रद्द करने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। नारंग ने यह भी दावा किया कि बीएफआई के संचालन के लिए तदर्थ समिति बनाने का उषा का फैसला आईओए की कार्यकारी समिति के परामर्श या अनुमोदन के बिना किया गया था। उन्होंने उषा से आदेश वापस लेने और विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए कार्यकारी समिति की आपातकालीन बैठक बुलाने का आग्रह किया था।