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भारत के सामने ग्लास्गो में दिल्ली का इतिहास दोहराने की चुनौती
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 23 Jul 2014 08:32 AM IST
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भारत ने चार साल पहले अपनी मेजबानी में दिल्ली में 19वें राष्ट्रमंडल खेलों में 101 पदक जीतकर इतिहास रचा था।
अब उसके सामने ग्लास्गो में 23 जुलाई से शुरू हो रहे 20वें राष्ट्रमंडल खेलों में इस इतिहास को दोहराने की चुनौती रहेगी।
भारत ने 2010 में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 38 स्वर्ण, 27 रजत और 36 कांस्य सहित कुल 101 पदक जीतकर पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया (कुल 177 पदक) के बाद दूसरा स्थान हासिल किया था। भारत का राष्ट्रमंडल खेलों में यह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था।
भारत ने दिल्ली राष्ट्रमंडल के एक महीने बाद चीन में गुआंगझू में हुए एशियाई खेलों में अपना दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और उसके 2 साल बाद 2012 के लंदन ओलंपिक में कुल 6 पदक जीतकर अपना बेस्ट दिया था।
इस समय भारतीय संभावनाओं पर हालांकि कई सवाल उठाए जा रहे हैं क्योंकि भारतीय खिलाड़ियों की तैयारियों के बारे में भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए), भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और संबंधित खेलों में महासंघों की तरफ से कोई बहुत विशेष जानकारी नहीं दी गई है।
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भारत इन खेलों में 224 सदस्यीय दल उतार रहा है। ग्लास्गो में 17 खेलों का आयोजन हो रहा है जिनमें भारत 14 खेलों में हिस्सा लेगा। यही कारण है कि भारत के पदक घटने की तमाम संभावनाएं व्यक्त की जा रही है।
विजय होंगे ध्वजवाहक
आखिरकार लंबे विचार-विमर्श के बाद राष्ट्रमंडल खेलों गेम्स के उद्घाटन समारोह में भारतीय दल के ध्वजवाहक पर फैसला हो गया।
लंदन ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाले शूटर विजय कुमार ग्लास्गो में भारतीय दल के ध्वजवाहक होंगे। हालांकि इस गौरव के लिए इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन की पहली पसंद बीजिंग ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अभिनव बिंद्रा थे।
आईओए ने सोमवार की सुबह उन्हीं के नाम पर अपनी अंतिम मुहर भी लगाई लेकिन बिंद्रा ने अपने मेडल के लिए यह सम्मान उठाने में लाचारी जता दी। बिंद्रा ने तर्क दिया कि एक तो उनकी तबीयत भी ठीक नहीं है और दूसरा उद्घाटन समारोह के बाद अगले दिन से उनका इवेंट शुरू होने जा रहा है।
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अब उसके सामने ग्लास्गो में 23 जुलाई से शुरू हो रहे 20वें राष्ट्रमंडल खेलों में इस इतिहास को दोहराने की चुनौती रहेगी।
भारत ने 2010 में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 38 स्वर्ण, 27 रजत और 36 कांस्य सहित कुल 101 पदक जीतकर पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया (कुल 177 पदक) के बाद दूसरा स्थान हासिल किया था। भारत का राष्ट्रमंडल खेलों में यह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था।
भारत ने दिल्ली राष्ट्रमंडल के एक महीने बाद चीन में गुआंगझू में हुए एशियाई खेलों में अपना दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और उसके 2 साल बाद 2012 के लंदन ओलंपिक में कुल 6 पदक जीतकर अपना बेस्ट दिया था।
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इस समय भारतीय संभावनाओं पर हालांकि कई सवाल उठाए जा रहे हैं क्योंकि भारतीय खिलाड़ियों की तैयारियों के बारे में भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए), भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) और संबंधित खेलों में महासंघों की तरफ से कोई बहुत विशेष जानकारी नहीं दी गई है।
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भारत इन खेलों में 224 सदस्यीय दल उतार रहा है। ग्लास्गो में 17 खेलों का आयोजन हो रहा है जिनमें भारत 14 खेलों में हिस्सा लेगा। यही कारण है कि भारत के पदक घटने की तमाम संभावनाएं व्यक्त की जा रही है।
विजय होंगे ध्वजवाहक
आखिरकार लंबे विचार-विमर्श के बाद राष्ट्रमंडल खेलों गेम्स के उद्घाटन समारोह में भारतीय दल के ध्वजवाहक पर फैसला हो गया।
लंदन ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाले शूटर विजय कुमार ग्लास्गो में भारतीय दल के ध्वजवाहक होंगे। हालांकि इस गौरव के लिए इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन की पहली पसंद बीजिंग ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अभिनव बिंद्रा थे।
आईओए ने सोमवार की सुबह उन्हीं के नाम पर अपनी अंतिम मुहर भी लगाई लेकिन बिंद्रा ने अपने मेडल के लिए यह सम्मान उठाने में लाचारी जता दी। बिंद्रा ने तर्क दिया कि एक तो उनकी तबीयत भी ठीक नहीं है और दूसरा उद्घाटन समारोह के बाद अगले दिन से उनका इवेंट शुरू होने जा रहा है।