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..और जब शाहिद ने तोड़ी पाकिस्तानी खिलाड़ी मंजूर की टांग

Thu, 21 Jul 2016 05:14 AM IST
हेमंत रस्तोगी/अमर उजाला, नई दिल्ली
हेमंत रस्तोगी/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 21 Jul 2016 05:14 AM IST
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tribute to former indian Hockey player Mohammad Shahid

मैदान पर दुश्मनी रही हो तो क्या हुआ पर पाकिस्तानी हॉकी दिग्गजों हसन सरदार और अख्तर रसूल ने जैसे ही यह सुना कि मुहम्मद शाहिद नहीं रहे तो उनके लिए यह किसी निजी क्षति जैसी खबर थी। फिर क्या था तबियत ठीक नहीं होने के बावजूद अपनी स्टिक से दुनिया को छकाने वाले हसन सरदार उनकी यादों में खो गए।

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अपने जमाने के नामी-गिरामी सेंटर हॉफ अख्तर रसूल को तुरंत शाहिद का 1978 में पहला पाकिस्तानी दौरा याद आया। रसूल ने खुलासा किया कि बांए छोर से उनका क्रास इतना झन्नाटेदार होता था कि उनकी रक्षा पंक्ति को इसे रोकना आसान नहीं होता था।
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लाहौर के पहले टेस्ट मैच में शाहिद ने ऐसा ही एक क्रास बांए छोर से फेंका नामी फॉरवर्ड मंजूर जूनियर ने इसे रोकने की कोशिश की, लेकिन वह इसे नहीं रोक पाए और गेंद उनकी टांग पर लगी। मंजूर को मैदान से बाहर ले जाना पड़ा। बाद में पता लगा कि उनकी टांग टूट गई है। वह कई महीनों तक हॉकी के मैदान से बाहर रहे।

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शाहिद का जाना पाकिस्तानी हॉकी प्रेमियों को झटका

tribute to former indian Hockey player Mohammad Shahid

ठीक इसी तरह हसन सरदार याद करते हैं कि उन्होंने 78 के दौरे में पहली बार शाहिद को देखा था। उसके बाद 1984 तक उनके खिलाफ खेलते रहे। फॉरवर्ड लाइन में उन्हें भी माहिर माना जाता था तो शाहिद की ड्रिब्लिंग उनकी टीम के लिए परेशानी का सबब थी। उन्हें रोकने के लिए मैच से पहले विशेष रणनीति बनाई जाती थी, लेकिन वह फिर गेंद को निकाल ले जाते थे।

सरदार को याद है कि भारत की टीम जब पाकिस्तान आती थी तो आवाम की निगाहें शाहिद पर होती थीं। पूरे मैच में उन्हें समर्थन मिलता था लेकिन जब भी शाहिद गेंद लेकर आगे बढ़ते थे उनकी आवाम भी वाह-वाह कर उठती थी।

सरदार को याद है कि उनकी मैदान पर शाहिद के साथ जैसे भी रिश्ते रहे हों, लेकिन मैदान के बाहर वह दोनों अच्छे दोस्त थे। शाहिद को नहारी बेहद पसंद थी और मैच के बाद वह लाहौर की गलियों में उन्हें नहारी जरूर खिलाने ले जाया करते थे।

रसूल को याद है कि उनकी जफर इकबाल के साथ जोड़ी बेहद कमाल की थी। 78 के दौरे में तो उन्होंने उनके बारे में ज्यादा मालूमात नहीं की, लेकिन 1979 के क्वालालंपुर में हुए चार देशीय टूर्नामेंट में उनकी टीम को शाहिद ने अपने डॉज से खूब छकाया।

तब उन्होंने कप्तान भास्करन से पूछा था ये लड़का कहां से लाए हो। ये तो कमाल का है। रसूल भी यही कहते हैं कि शाहिद की पाकिस्तान में काफी लोकप्रियता थी। उनका जाना पाकिस्तानी हॉकी प्रेमियों के लिए भी झटका है।

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