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अर्जुन अवॉर्ड मिलने की बेहद खुशी, पर सरकार से नौकरी का आज भी इंतजार: सविता पूनिया

Wed, 26 Sep 2018 11:14 PM IST
सत्येन्द्र पाल सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली
सत्येन्द्र पाल सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 26 Sep 2018 11:14 PM IST
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savita punia happy to honoured with arjuna award but she is waiting for job from haryana gov
सविता पूनिया - फोटो : file photo

भारत की 28 बरस की बेहतरीन और मुस्तैद ओलंपिक हॉकी गोलरक्षक सविता पूनिया कहती हैं वह खुशकिस्मत हैं कि उन्होंने पहले ही बार अर्जुन अवॉर्ड के लिए आवेदन किया और यह अवॉर्ड मिल गया।

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हरियाणा में सिरसा जिले के जोड़कां गांव की भारतीय हॉकी टीम की उपकप्तान सविता पूनिया ने अर्जुन अवॉर्ड के लिए नवाजे पर कहा, 'मुझे अर्जुन अवॉर्ड अपनी पूरी भारतीय टीम की 18 लड़कियों, पूरे स्पोर्ट स्टाफ और परिवार से मिले सहयोग के कारण ही मिल पाया है। हॉकी दरअसल टीम गेम है। हॉकी में बिना पूरी टीम के सहयोग से किसी भी टीम की कामयाबी और जीत मुमकिन नहीं है। मैंने हॉकी में आज अर्जुन अवॉर्ड सहित जो कुछ भी पाया पूरी टीम के सहयोग के कारण ही पाया। मेरी हॉकी में कामयाबी में परिवार के समर्थन का बेहद अहम योगदान है। हरियाणा सरकार से मैं पिछले नौ बरस से नौकरी की गुहार कर रही हूं लेकिन मुझे केवल आश्वासन मिला लेकिन नौकरी नहीं।'
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सविता ने आगे कहती है, 'हरियाणा सरकार की ओर से बार-बार यही कहा गया कि पॉलिसी बन रही है। मुझे अर्जुन अवॉर्ड मिलने की बेहद खुशी है लेकिन हरियाणा सरकार से आज भी  नौकरी का  इंतजार है।  मुझे नहीं मालूम कब हरियाणा सरकार की पॉलिसी बनेगी और कब मुझे नौकरी मिलेगी। मुझे हॉकी में मैंने भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) में हॉकी कोच के लिए आवेदन किया है। खेल मंत्री राज्यवद्र्धन सिंह राठौड़ ने जल्द से जल्द नौकरी देने का भरोसा दिलाया है।'

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उन्होंने कहा, 'मां बीमार हो अमूमन लड़कियों को घर का काम संभालने की नसीहत दी जाती है। मैंने जब खेलना शुरू किया तो मेरी मां को लीलावती देवी को गठिया हो गया था। घर में  दिक्कत थी कि काम कौन करे?  मैं हॉकी खेलती थी और मेरी मां कतई नहीं चाहती घर के काम में उलझ कर रह जाउं। उन्होंने मुझे हॉकी खेलने के लिए बाहर भेज दिया। मेरे पिता महेन्द्र सिंह फॉर्मेसिस्ट हैं और उन्होंने मेरी मां का साथ दिया। यदि कोई मुझसे पूछे की मैं हॉकी मैं इस मुकाम तक कैसे तो मैं अपने दादा स्वर्गीय रणजीत सिंह के कारण ही यहां तक पहुंची। दादा रणजीत सिंह ही चाहते थे कि मैं हॉकी खेलूं और मैंने हॉकी खेल कर उनका ही सपना पूरा किया। मुझे आज जब अर्जुन अवॉर्ड दिया गया तो मुझे सबसे ज्यादा कमी अपने दादा रणजीत सिंह की अखर रही है। मैंने भारत के लिए 2009 में खेलना शुरू कर दिया था और तब मेरे दादा जिंदा थे। मेरे दादा का 2013 में निधन हो गया लेकिन मैं हर कामयाबी में उन्हें याद रखती हूं।'
 

सविता कहती हैं, 'मेरे लिए मेरे अतर्राष्ट्रीय करियर में भारत को 2017 में जापान में महिला एशिया कप के फाइनल में चीन के खिलाफ शूटआउट में शानदार बचाव कर खिताब जिताना हमेशा याद रहेगा। साथ ही भारत को 2016 के रियो ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई कराने में योगदान करना भी याद रहेगा। हम भले ही जापान से जकार्ता में एशियाई खेलों के फाइनल में महज एक गोल से हार कर स्वर्ण पदक जीतने से चूक गए लेकिन हमारी टीम ने पिछले करीब एक डेढ़ बरस से लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया। भारत की महिला हॉकी खिलाडिय़ों की कोर ग्रुप की खिलाडियों का ओलंपिक क्वॉलिफाइंग के लिए शिविर एक अक्टूबर से शुरू हो रहा है। हमारी महिला हॉकी टीम जितनी बढिय़ा है उससे मुझे उसके टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई करने का पूरा भरोसा है।'

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