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मैं फास्ट तो कभी था ही नहीं, सधे खेल में रहा हमेशा यकीन : सरदार सिंह

Fri, 16 Feb 2018 10:42 AM IST
सत्येन्द्र पाल सिंह, अमर उजाला, नई दल्ली
सत्येन्द्र पाल सिंह, अमर उजाला, नई दल्ली Updated Fri, 16 Feb 2018 10:42 AM IST
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Sardar Singh believes in his return to World Cup and asian games 2018
Sardar Singh

सबसे अनुभवी मिडफील्डर सरदार सिंह को एशिया कप के बाद से नए डच हॉकी उस्ताद सोएर्ड मराइन की खिलाड़ियों को बारी-बारी से आजमाने की नीति के चलते भारत की सीनियर हॉकी टीम से बाहर रखने पर उनके भविष्य को लेकर जितने मुंह उतनी बातें। सरदार मैदान पर अपनी ‘सरदारी’ दिखाकर हमेशा इसका जवाब देते हैं। सरदार की ताकत मैदान पर अपने अनुभव का धैर्य से इस्तेमाल करते हैं। उनके कुछ आलोचक यह कह रहे हैं कि वह अब धीमे पड़ गए हैं।

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सरदार से यहां बुधवार को ‘अमर उजाला’ ने इस बाबत जानना चाहा तो  वह बड़ी साफगोई से बोले, ‘मैं कभी फास्ट था ही नहीं, मेरा यकीन मैदान पर हमेशा मेरे सधे खेल में रहा है। मुझे 2018 में होने वाले एशियाई खेलों और विश्व कप जैसे सभी बड़े टूर्नामेंट में देश के लिए खेलने का पूरा भरोसा है।
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खासतौर पर एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर हम सीधे टोक्यो में 2020 के ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई कर लेंगे तो फिर इसकी तैयारी के लिए पर्याप्त मौका मिल जाएगा। तब भी इसमें खेलने के लिए खुद को तैयार कर सकूंगा क्योंकि मेरा मानना है कि मुझमें अभी काफी हॉकी बाकी है। 2019 में ज्यादा टूर्नामेंट नहीं हैं। ऐसे में सीधे ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई करने पर हमारी टीम टोक्यो ओलंपिक के लिए सही रणनीति तैयार कर सकेगी।’

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Sardar Singh believes in his return to World Cup and asian games 2018
Sardar Singh

वह कहते हैं, ‘हॉकी ने मुझे बहुत कुछ दिया है और मेरे पास इतना है कि मैं तीन वक्त की रोटी आराम से बैठ कर खा सकता हूं। 2011 और 2012 में तत्कालीन ट्रेनर और अब  हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर डेविड जॉन की सलाह पर मुझे फ्री मैन के रूप में सबसे पहले आजमाया गया था। तब भी मैं इस रोल में सफल रहा और अब भी सफल हूं। मैं अब अजलान शाह कप और राष्ट्रमंडल खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन करने पर पूरा ध्यान लगा रहा हूं। जहां तक मेरे फॉरवर्ड के रूप में खेलने की बात तो मैं इसमें खुद को सहज नहीं महसूस नहीं करता क्योंकि रियो ओलंपिक के बाद मैं इस पोजिशन पर नहीं खेला।

मैं खुद को मिडफील्डर और फ्रीमैन यानी जरूरत के मुताबिक हमले पर जाने के साथ पीछे आकर किले की चौकसी के रोल में ज्यादा सहज महसूस करता हूं। मैंने भी यह सुना है कि  कुछ लोग यह कह रहे हैं कि मैं धीमा पड़ गया हूं। लोग मेरे बारे में क्या कह रहे हैं या अखबार में क्या छप रहा है इस बाबत मैं बहुत नहीं सोचता क्योंकि मैं अखबार पढ़ता ही नहीं। मैं एशिया कप में फ्रीमैन के रूप में खेला और हमारी टीम जीती। हर किसी ने मेरे रोल की तारीफ की। मुझे अगले दो टूर्नामेंट के लिए टीम से बाहर रखा गया तो इस बाबत मेरी चीफ कोच और भारतीय टीम प्रबंधन से भी बात हुई तो उन्होंने कहा कि वे इन टूर्नामेंट में नए खिलाड़ियों को आजमान चाहते हैं।

पिछले साल तो हमारे 34-36 के कोर ग्रुप में से केवल 18-20 खिलाड़ियों को देश की नुमाइंदगी करने का मौका मिला। ऐसे में हॉकी वर्ल्ड लीग फाइनल में भुवनेश्वर में और न्यूजीलैंड दौरे पर नए खिलाड़ियों को हमारे हॉकी उस्ताद ने परखा। मुझे खिलाड़ियों के रोटेशन के आधार पर आजमाने से कोई ऐतराज नहीं है। मैं अपनी फिटनेस पर काफी मेहनत कर रहा हूं कि क्योंकि मैं चाहता हूं कि मैं चोट से दूर रहूं। बाकी 15 मिनट प्रैक्टिस करते हैं तो मैं अपनी फिटनेस के लिए 20 से 25 मिनट तक प्रैक्टिस करता हूं।

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