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तेंदुलकर नहीं ध्यानचंद को कॉमिक्स में पढ़िए

Fri, 30 Aug 2013 03:27 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Fri, 30 Aug 2013 03:27 PM IST
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now Dhyan Chand in comic book series

'हॉकी के जादूगर' ध्यानचंद के चाहने वालों के लिए एक और बड़ी खबर है। उनके प्रशंसक अब उन्हें कॉमिक बुक सीरीज के जरिए पढ़ भी सकेंगे।

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'अमर चित्रकथा' पौराणिक महानायकों, देश के बहादुरों और आदर्श व्यक्तियों पर चित्रकथा के जरिए किताब लाते रहे थे लेकिन पहली बार किसी एक खिलाड़ी पर चित्रकथा के जरिए किताब पेश की है।
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मेजर ध्यानचंद की महागाथा का अमर चित्रकथा में अवतार हुआ है। उनके 108वें जन्मदिन के अवसर पर मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में गुरुवार को खेल दिवस पर मानव संसाधन राज्य मंत्री शशि थरूर और भारतीय खेल प्राधिकरण के महानिदेशक जीजी थामसन ने ‘ध्यानचंद द विजार्ड ऑफ हॉकी’ का अनावरण किया।
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एक अनूठे प्रयास में कॉमिक बुक प्रकाशक 'अमर चित्रकथा' ने भारत के एक ऐसे सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी पर 64 पेज की चित्रकथा के जरिए किताब पेश की है जिन्होंने अपनी हॉकी की जादूगरी से पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध किया था।

यह बड़ी बात इसलिए भी है कि कपिल देव और सचिन तेंदुलकर जैसे लोकप्रिय क्रिकेटरों के होते हुए 'अमर चित्रकथा' ने ध्यानचंद पर कॉमिक बुक सीरीज शुरू की है।

शशि थरूर ने इस मौके पर कहा, "ध्यानचंद ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने 22 साल के अपने करियर में एक हजार से ज्यादा गोल किए थे। वर्ष 1935 में एडिलेड में क्रिकेट की रन मशीन डॉन ब्रेडमैन ने हॉकी की गोल मशीन ध्यानचंद से मुलाकात की थी।"

थरूर ने कहा, "बीबीसी ने एक समय ध्यानचंद को हॉकी का पेले कहा था। 1936 के बर्लिन ओलंपिक में ध्यानचंद ने हिटलर की पेशकश ठुकराई थी। इससे भी ज्यादा बड़ी बात यह थी कि अपने रिटायरमेंट के बाद ध्यानचंद को तीन देशों से कोचिंग का प्रस्ताव मिला था और उन्होंने सच्चे देशभक्त होने के नाते इन प्रस्तावों को ठुकरा दिया था।"


कार्यक्रम में मौजूद पूर्व हॉकी ओलंपियन हरविंदर ने दद्दा को याद करते हुए कहा, "इस किताब को जब बच्चे पढ़ेंगे तो वे ध्यानचंद के बारे में कुछ सीखेंगे। जिस तरह ‘भाग मिल्खा भाग’ को देखकर युवा पीढ़ी ने मिल्खा सिंह के बारे में कुछ जाना है उसी तरह यह किताब भी नई पीढ़ी को प्रेरित करेगी।"

उन्होंने कहा, "दद्दा को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न मिलना चाहिए। एकमात्र वही ऐसे खिलाड़ी हैं जो इसके सबसे बडे़ हकदार हैं।"

इससे पहले ध्यानचंद के जन्म दिन से एक दिन पूर्व ऐसी खबर आई कि 1936 में बर्लिन ओलंपिक में उनकी टीम के ऐतिहासिक फाइनल मुकाबले के वीडियो होने की जानकारी मिली है।

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