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ध्यानचंद की हरेक वो रोचक बात, जो फैन्स हैं जानने को बेताब

Wed, 11 Oct 2017 03:17 PM IST
amarujala.com-presented by: मुकेश झा
amarujala.com-presented by: मुकेश झा Updated Wed, 11 Oct 2017 03:17 PM IST
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Major dhyanchand most important facts to know
ध्यानचंद - फोटो : The indian express

हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद ने तीन ओलिम्पिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और तीनों बार देश को गोल्ड मेडल दिलाया। भारत ने 1932 (लॉस एंजिल्स) ओलंपिक के 37 मैच में 338 गोल किए, जिसमें 133 गोल ध्यानचंद ने किए थे। दूसरे विश्व युद्ध से पहले ध्यानचंद ने 1928 (एम्सटर्डम), 1932 (लॉस एंजिल्स) और 1936 (बर्लिन) में लगातार तीन ओलिंपिक में भारत को हॉकी में गोल्ड मेडल दिलाए।

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आइये जानते हैं ध्यानचंद के बारे में कुछ रोचक बातेंः-

- ध्यानचंद ने 16 साल की उम्र में भारतीय सेना में भर्ती हुए। भर्ती होने के बाद उन्होंने हॉकी खेलना शुरू किया। ध्यानचंद काफी प्रैक्टिस किया करते थे। रात को उनके प्रैक्टिस सेशन को चांद निकलने से जोड़कर देखा जाता। इसलिए उनके साथी खिलाड़ियों ने उनके नाम के आगे 'चंद' लगा दिया। असल में ध्यानचंद का असली नाम ध्यान सिंह था।
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-1928 में एम्सटर्डम में हुए ओलिंपिक खेलों में वह भारत की ओर से सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बने। उस टूर्नामेंट में ध्यानचंद ने 14 गोल किए। उस समय एक स्थानीय समाचार पत्र में लिखा था, 'यह हॉकी नहीं बल्कि जादू था। और ध्यान चंद हॉकी के जादूगर हैं।'  

- हालांकि ध्यानचंद ने कई यादगार मैच खेले, लेकिन एक मैच था जो उन्हें सबसे ज्यादा पसंद था। ध्यान चंद ने बताया कि 1933 में कलकत्ता कस्टम्स और झांसी हीरोज के बीच खेला गया बिगटन क्लब फाइनल उनका सबसे ज्यादा पसंदीदा मुकाबला था।

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-ध्यानचंद हॉकी के इस कदर दीवाने थे कि वह पेड़ से हॉकी के आकार की लकड़ी काटकर उससे खेलना शुरू कर देते थे। रात भर वह हॉकी खेलते रहते थे। उनको हॉकी के आगे कुछ याद नहीं रहता था। हॉकी के सामने वह पढ़ाई को भी भूल जाते थे। 

हिटलर की पेशकश को भी ठुकराया

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ध्यानचंद

- 1932 के ओलिंपिक फाइनल में भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका को 24-1 से हराया था। उस मैच में ध्यानचंद ने 8 गोल किए थे। उनके भाई रूप सिंह ने 10 गोल किए थे। उस टूर्नामेंट में भारत की ओर से किए गए 35 गोलों में से 25 ध्यानचंद और उनके भाई ने किए थे।

- मेजर ध्यानचंद जब खेला करते थे तो लोगों के जेहन में दूसरे किस्म का कश्मकश चल रहा था। अक्सर लोग उनके हॉकी स्टीक के बारे में सोचते थे कि उनके स्टीक में कहीं चुम्बक तो नहीं लगा है, जो इतने रफ्तार में और दनादन गोल कर देते हैं।

- हिटलर ने खुद ध्यानचंद को जर्मन सेना में शामिल कर एक बड़ा पद देने की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने भारत में ही रहना पसंद किया।

- अपनी आत्मकथा 'गोल' में उन्होंने लिखा था, आपको मालूम होना चाहिए कि मैं बहुत साधारण आदमी हूं।

- एक मुकाबले में ध्यानचंद गोल नहीं कर पा रहे थे तो उन्होंने मैच रेफरी से गोल पोस्ट के आकार के बारे में शिकायत की। हैरानी की बात है कि पोस्ट की चौड़ाई अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के अनुपात में कम थी।

ध्यानचंद को भारत रत्न दिलाने के लिए हस्ताक्षर करें यहां- goo.gl/hYuwMF

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