लय में भारतीय हॉकी टीम, एशियाई खेलों में स्वर्ण बरकरार रखने का पूरा भरोसा: आकाशदीप
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आकाशदीप सिंह मात्र 24 बरस की उम्र में भारतीय हॉकी टीम की अग्रिम पंक्ति के सबसे भरोसेमंद स्ट्राइकर में से एक हैं। राष्ट्रमंडल खेलों में हल्की चोट के बाद उससे उबरने के बाद भी चैंपियंस ट्रॉफी जैसे दुनिया के शीर्ष हॉकी टूर्नामेंट के लिए आराम दिया गया था। आकाशदीप की उम्मीदों के अनुरुप ही एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम में वापसी हुई। वह अपने शांत मिजाज के कारण सेंटर हाफ सरदार सिंह के साथ तुरुप के इक्के साबित होने वाले हैं। एशियाई खेलों से पहले आकाशदीप सिंह ने बांग्लादेश और दक्षिण कोरिया के खिलाफ दोस्ताना और न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में उसका पूरा सफाया करने में अपनी हॉकी की कलाकारी दिखाकर साबित किया वह पूरी तरह फिट हैं।
आकाशदीप सिंह ने 'अमर उजाला' से कहा, ' मुझे ब्रेडा में चैंपियंस ट्रॉफी में न खेल पाने का मलाल जरूर है लेकिन इस बात की बेहद खुशी है कि हमारी टीम ने वहां शानदार प्रदर्शन कर रजत पदक पर कब्जा बरकरार रखा। हमारी टीम जिस तरह लय में है उससे मुझे पूरा भरोसा है कि हमारी टीम एशियाई खेलों में अपना स्वर्ण पदक बरकरार रख कर सीधे टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई कर लेगी। हमारी टीम एकदम संतुलित है। हमें एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के लिए गोल करने के हर मौके को भुनाने के साथ गलत पास देने से परहेज करना होगा। हम सभी 'स्ट्रक्चर' पर काबिज रह उसे मैदान पर अमली जामा पहनाने को बेताब हैं।
भारतीय टीम अब दुनिया की ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, जर्मनी, नीदरलैंड या बेल्जियम सरीखी शीर्ष टीमों के खिलाफ अब दबाव में नहीं आती हैं उसे बराबरी की टक्कर देने का दम रखती है। अगस्त में एशियाई खेलों में हम स्वर्ण पदक बरकरार रखेंगे तो ओडिशा में होने वाले विश्व कप में दुनिया की श्रेष्ठ टीमों के खिलाफ बढिय़ा खेलने का विश्वास मिलेगा। हर कोई गोल करने के मौके बनाने और भुनाने को बेताब है। अब पाकिस्तान हमारी भारतीय टीम के लिए कोई हौवा नहीं है। राष्ट्रमंडल खेलों में उसके खिलाफ ड्रॉ रहे मैच को छोड़ दें हमारी भारतीय टीम ने पिछले आठ-नौ मैचों में उसे लगातार हरा कर दर्शाया है कि हम पाकिस्तान के खिलाफ हावी हैं। एशियाई खेलों के लिए हमारी टीम की तैयारी बहुत बढिय़ा है।'
वह कहते हैं, ' हमारी टीम की ताकत हमारे जवाबी हमले, मध्यपंक्ति में सेंटर हाफ सरदार सिंह और गोलरक्षक कप्तान पीआर श्रीजेश जैसे सदाबहार अनुभव खिलाड़ी है। यंग मिडफील्डर विवेक सागर प्रसाद और स्ट्राइकर दिलप्रीत सिंह पिछले दो तीन टूर्नामेंट से टीम के अनुभवी खिलाडिय़ों के साथ खेल रहे हैं और इससे उनका हौसला और बढ़ा है। हमारी अग्रिम पंक्ति खासी चुस्त है लेकिन हमें अपने डिफेंस को कुछ और कसने की जरूरत है। हमें मैन टू मैन मार्किंग और ज्यादा से ज्यादा पेनल्टी कॉर्नर बनाने की जरूरत है। हमारे पास रूपिंदर , हरमनप्रीत , वरुण और अमित रोहिदास के रूप में चार बेहतरीन ड्रैग फ्लिकर हैं। इन चारों के कौशल का बेहतर उपयोग करने के लिए हमें इसी लिए ज्यादा पेनल्टी कॉर्नर बनाने की जरूरत है।
आकाशदीप बताते हैं, 'चाहे कोच देशी हो या विदेशी हर किसी की अपना एक अलग नई सोच होती है। अब कोच के सिस्टम को समझने में वक्त लगता है। अच्छी बात यह है कि हर नए कोच से कुछ सीखने को मिलता है। जहां तक हरेन्द्र सर के चीफ कोच का पद संभालने की बात है तो वह खासे सख्त हैं। हमारे लिए अच्छी बात यह है कि हरेन्द्र सर टीम के यंग हरमनप्रीत सिंह जैसे डिफेंडर और ड्रैग फ्लिकर से लेकर सरदार और श्रीजेश से जैस अनुभवी खिलाड़ी तक को किसी न किसी मोड़ पर ट्रेनिंग दे चुके हैं। इससे टीम का हर खिलाड़ी हरेन्द्र सर से वह टीम के हर खिलाड़ी से पूरी तरह वाकिफ हैं। एशियाई खेलों के लिए चीफ कोच हरेन्द्र सिंह सहित पूरा कोचिंग स्टाफ कहीं भी जरा सी भी कमी नहीं छोडना चाहता है। हरेन्द्र सर के मार्गदर्शन में टीम का हर खिलाड़ी चाहे वह विडियो सेशन हो या फिर मनोविज्ञान की क्लास उसका पूरा लुत्फ उठाकर अपना कौशल मांझने में जुटा है।'