हॉकी विश्व कप 2018: भारत का मिशन सेमीफाइनल, आज नीदरलैंड से होगी जोरदार भिड़ंत
विश्व कप में 43 साल का सूखा खत्म करने का सपना लिए मनप्रीत सिंह की अगुआई वाली भारतीय हॉकी टीम बृहस्पतिवार को जब क्वार्टर फाइनल में नीदरलैंड के खिलाफ मैदान में उतरेगी तो उसका लक्ष्य अपना अजेय अभियान जारी रखते हुए सेमीफाइनल का टिकट कटाने का होगा।
1975 में कुआलालंपुर में विश्व विजेता बनने के बाद से भारतीय टीम कभी अंतिम चार में नहीं पहुंचीं। अब हरेन्द्र की टीम के पास घर में नई इबारत लिखने का सुनहरी मौका है। हालांकि भारतीय टीम के लिए नीदरलैंड की चुनौती से पार पाना इतना आसान नहीं होगा।
तीन बार के चैंपियन नीदरलैंड ने पिछले दो मैचों में दस गोल दागकर अपने आक्रामक तेवर जाहिर कर दिए हैं। कलिंगा स्टेडियम में दर्शकों को भारत के युवा तुर्कों के जोश और गत उपविजेता नीदरलैंड के अनुभव के बीच रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा। भारतीय टीम स्ट्रक्चर के साथ बेखौफ आक्रामक हॉकी खेल रही है। यही भारत की ताकत है।
भारतीय कोच हरेन्द्र सिंह और नीदरलैंड के कोच मैक्स कालडाज की रणनीति की बिसात भी कसौटी पर होगी। दुनिया की पांचवें नंबर की टीम भारत और चौथे नंबर की नीदरलैंड के बीच दिन विशेष, जो टीम मौकों को ज्यादा भुनाएगी जीत उसी को मिलेगी। हरेन्द्र का मंत्र है गोल करो, मौके बनाओ और पेनाल्टी कॉर्नर के मौके बनाओ।
भारत अब तक विश्व कप में नीदरलैंड के खिलाफ हुए छह मुकाबलों में से एक भी नहीं जीत पाया है। युवा भारतीय टीम के पास इस मिथक को तोड़कर जीत के साथ नई इबारत लिखने का मौका है। दोनों के बीच हुए पिछले पांच मैचों में से दोनों ने दो-दो जीते हैं। ब्रेडा में अंतिम बार चैंपियंस ट्रॉफी में दोनों आखिरी बार आमने-सामने हुए थे और मुकाबला बराबरी पर छूटा था।
सिमरन और ललित पर दारोमदार
भारतीय अग्रिम पंक्ति ने अब तक टूर्नामेंट शानदार प्रदर्शन किया है। खासकर सिमरनजीत सिंह और ललित उपाध्याय ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई है। इन दोनों ने अभी तक तीन-तीन गोल किए हैं। इस अहम मैच में भी टीम का दारोमदार इन दोनों के कंधों पर ही होगा। इनके अलावा लिंकमैन आकाशदीप सिंह इन दोनों के लिए बराबर मौके बनाकर इनका साथ दे रहे हैं।
मनदीप सिंह और दिलप्रीत भले ही अब तक बहुत गोल नहीं कर पाए लेकिन जिस तरह से ये दोनों स्ट्राइकर अपनी फिनिशिंग बेहतर करने पर जोर दे रहे हैं उससे ये कोच हरेन्द्र के तुरप के इक्के साबित हो सकते हैं। भारत को अगर जीत दर्ज करनी है तो ललित, मनदीप और सिमरनजीत को मिले मौके को गोल में तब्दील करना होगा।
श्रीजेश के पास खुद को साबित करने का आखिरी मौका
अब तक टूर्नामेंट में लचर प्रदर्शन करने वाले अनुभवी गोलकीपर श्रीजेश के पास भी टीम के भरोसे पर खरा उतरकर आलोचकों को जवाब देने का यह सबसे बढ़िया मौका है। भारत ने जब चार बरस पहले इसी मैदान पर नीदरलैंड को चैंपियंस ट्रॉफी में हराया था तो तब भी श्रीजेश जीत के नायक रहे थे।
श्रीजेश के साथ रक्षापंक्ति में फुलबैक सुरेन्दर कुमार, वरुण कुमार, हरमनप्रीत सिंह, बीरेन्द्र लाकड़ा और कोथाजीत ओवरलैप कर आगे खेलकर अचानक जवाबी हमले बोलने से नीदरलैंड को रोक सकते हैं। भारत की मध्यपंक्ति और रक्षापंक्ति को पूरी तरह चौकस रहकर नीदरलैंड को पेनाल्टी करने से रोकना होगा।
नंबर गेम
- 06 बार दोनों विश्व कप में आमने-सामने हुए हैं और हर बार नीदरलैंड की टीम भारत पर भारी पड़ी है
- 1973 के विश्व कप फाइनल में नीदरलैंड की टीम भारत को टाईब्रेकर में 4-2 से हराकर चैंपियन बनी थी। निर्धारित समय तक स्कोर दो-दो से बराबर था
- 105 कुल मैच दोनों टीमों ने अब तक खेले हैं। इनमें से भारत ने 33, नीदरलैंड ने 48 जीते हैं, 24 ड्रॉ रहे हैं
- 0-5 पिछले मुकाबलों में भारत ने दो और नीदरलैंड ने भी दो जीते हैं, जबकि एक मुकाबला ड्रॉ रहा है
- 18 सर्वाधिक गोल टूर्नामेंट में नीदरलैंड की टीम ने अब तक किए हैं।
‘हमें भरे हुए मैदानों में खेलने की आदत है। हम भारत को पहले भी हरा चुके हैं लिहाजा दर्शकों का मेजबान टीम को समर्थन हमारे लिए कोई मसला नहीं है। हम अपने खेल पर फोकस करेंगे और जीतेंगे।’ -
मैक्स कालडाज, कोच नीदरलैंड