फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Sports ›   Hockey ›   Hat-trick for India under Dhyan Chand in 1936 Olympics

...और इस तरह ध्यानचंद ने 1936 ओलंपिक में पूरी की गोल्ड मेडल की हैट्रिक

Tue, 26 Sep 2017 01:11 PM IST
amarujala.com- Presented by: मुकेश झा
amarujala.com- Presented by: मुकेश झा Updated Tue, 26 Sep 2017 01:11 PM IST
विज्ञापन
Hat-trick for India under Dhyan Chand in 1936 Olympics
ओलंपिक विजेता भारतीय टीम - फोटो : The hindu

1936 का बर्लिन ओलंपिक 31 वर्षीय हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का तीसरा और आखिरी ओलंपिक था। क्योंकि उन्होंने उसके बाद रिटायर होने का फैसला कर लिया था। 1928 का एम्सटर्डम ओलंपिक, 1932 का लॉस एंजेल्स ओलंपिक के बाद निस्संदेह उनकी क्षमता को देखते हुए 1936 के बर्लिन ओलंपिक में उन्हें भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी सौंपी गई और इस ओलंपिक में भी भारत ने विजय प्राप्त की।

विज्ञापन


नए नए कप्तान बनने के बाद ध्यानचंद पर लगातार तीन बार स्वर्ण पदक जीतने का दबाव भी था। एम्सटर्डम और लॉस एंजिल्स में टीम इंडिया हॉकी में स्वर्ण पदक जीत चुकी थी। बर्लिन ओलंपिक में ध्यानचंद को कप्तानी सौंपने को लेकर कोई असहमति नहीं थी। उन्होंने कप्तान बनने के बाद शानदार खेल का प्रदर्शन किया और ओलंपिक में गोल्ड मेडल की हैट्रिक पूरी कर दी। 
विज्ञापन


पढ़ेंः- देश के सभी खिलाड़ियों ने 'दद्दा' के लिए मांगा है भारत रत्न

गौरतलब है कि 1936 के ओलंपिक खेल शुरू होने से पहले ही एक अभ्यास मैच में भारतीय टीम जर्मनी से 4-1 से हार गई थी। लेकिन इस हार के बाद भी ध्यानचंद जरा भी नहीं डगमगाए। भारत ने बर्लिन ओलंपिक में शुरुआती अभ्यास मैच गंवाने के बाद अगले चरण में अपने सभी तीन लीग मैच जीते। भारत ने पहले मैच में हंगरी को 4-0 से हराया। इसमें ध्यानचंद ने एक भी गोल नहीं किया। दूसरे मैच में अमेरिका को 7-0 से हराया। इसमें ध्यानचंद ने 2 गोल किए।
विज्ञापन
विज्ञापन


तीसरे मैच में जापान को 9-0 से हराया। इसमें ध्यानचंद ने 4 गोल किए। फ्रांस को सेमीफाइनल में टीम इंडिया ने 10-0 से करारी मात दी। इसमें ध्यानचंद ने 4 गोल किए। जर्मनी को फाइनल में टीम इंडिया ने 8-1 के अंतर से हराया। इसमें ध्यानचंद ने 3 गोल किए। इस ओलंपिक में जर्मनी के खिलाफ मैच में गोलकीपर टीटो वर्नहोल्टज से टकरा कर ध्यानचंद के दांत भी टूट गए थे।  1936 के बर्लिन ओलंपिक में ध्यानचंद की उम्र 31 साल थी। इसके बाद भी उनकी हॉकी गोल बरसाती रही। इस ओलंपिक में ध्‍यानचंद ने 13 गोल किए। 

पढ़ेंः- कई ऐतिहासिक जीत दिलाने वाले ध्यानचंद के लिए यह मैच था सबसे बेस्ट  

मेजर ध्यानचंद 'दद्दा' को भारत और विश्व हॉकी के क्षेत्र में सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों में शुमार किया जाता है। ध्यानचंद की महानता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक बार वह बर्लिन में तीसरे दर्जे के डिब्बे में बैठकर यात्रा की। काफी ठंड के बीच यह यात्रा बहुत कठिन थी। लेकिन देश की सेना के सच्चे सिपाही ध्यानचंद ने इस यात्रा को भी देश विजय की दिशा में एक मिशन माना।


ध्यानचंद ने अपनी हर यात्रा को इसी तरह का मिशन माना। उन्‍होंने अपने साथियों से भी कहा कि देश की मान और प्रतिष्ठा को सदैव ऊंचा रखने के लिए हमेशा हर मैच को जीतने की कोशिश करनी चाहिए। उनके पूरे व्यक्तित्व का आकलन करने के बाद कहा जा सकता है कि ध्यानचंद सिर्फ देेश के लिए ही बने थे। 

ध्यानचंद को भारत रत्न दिलाने के लिए हस्ताक्षर करें यहां- goo.gl/hYuwMF

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Sports news in Hindi related to live update of Sports News, live scores and more cricket news etc. Stay updated with us for all breaking news from Sports and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed