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Hockey India: हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ मुश्किल में घिरे, दिल्ली हाई कोर्ट ने अवमानना का दोषी ठहराया
Tue, 21 Apr 2026 05:26 PM IST
Sovit Chaturvedi
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sovit Chaturvedi
Updated Tue, 21 Apr 2026 05:26 PM IST
सार
हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह मुश्किल में घिरते नजर आ रहे हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने भोलानाथ सिंह को जानबूझकर उसके आदेश की अवहेलना करने के लिए अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया है।
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भोलानाथ सिंह
- फोटो : Hockey India
विस्तार
दिल्ली उच्च न्यायालय ने हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह को जानबूझकर उसके आदेश की अवहेलना करने के लिए अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया है। न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने कहा कि वह चार मई को सजा के मुद्दे पर सुनवाई करेंगे, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने भोलानाथ सिंह को उचित समझे जाने वाले उपाय करके अवमानना को सुधारने की स्वतंत्रता दी।
क्या है मामला?
अदालत ने हॉकी इंडिया की निर्वाचित उपाध्यक्ष सईद असीमा अली द्वारा दायर अवमानना से संबंधित याचिका पर 20 अप्रैल को फैसला सुनाया। उन्होंने अपनी इस याचिका पर हॉकी इंडिया के अधिकारियों द्वारा 17 जनवरी, 2025 को पारित आदेश का पालन नहीं करने का आरोप लगाया था। अदालत ने कहा कि उसके निर्देशों के अनुसार हॉकी इंडिया के अधिकारियों को याचिकाकर्ता को वे जरूरी लिंक उपलब्ध कराने थे जिससे कि वह कार्यकारी बोर्ड की सभी बैठकों में भाग ले सकें, लेकिन चार जुलाई 2025 और 27 जुलाई 2025 को आयोजित बैठकों के लिए ऐसा नहीं किया गया। इसमें पाया गया कि कथित तौर पर बाद की किसी भी घटना से अधिकारियों को याचिकाकर्ता को लिंक प्रदान करने के अपने दायित्व से छूट नहीं मिलती, जबकि उन्होंने निर्देश में संशोधन की मांग भी नहीं की थी।
अदालत ने माना कि हॉकी इंडिया और सिंह ने वर्तमान कार्यवाही के दौरान जिस तरह से व्यवहार किया, वह अदालत की अवमानना का स्पष्ट मामला है। अदालत ने अपने फैसले में कहा, अवमानना को दूर करने का कोई प्रयास नहीं किया गया।
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क्या है मामला?
अदालत ने हॉकी इंडिया की निर्वाचित उपाध्यक्ष सईद असीमा अली द्वारा दायर अवमानना से संबंधित याचिका पर 20 अप्रैल को फैसला सुनाया। उन्होंने अपनी इस याचिका पर हॉकी इंडिया के अधिकारियों द्वारा 17 जनवरी, 2025 को पारित आदेश का पालन नहीं करने का आरोप लगाया था। अदालत ने कहा कि उसके निर्देशों के अनुसार हॉकी इंडिया के अधिकारियों को याचिकाकर्ता को वे जरूरी लिंक उपलब्ध कराने थे जिससे कि वह कार्यकारी बोर्ड की सभी बैठकों में भाग ले सकें, लेकिन चार जुलाई 2025 और 27 जुलाई 2025 को आयोजित बैठकों के लिए ऐसा नहीं किया गया। इसमें पाया गया कि कथित तौर पर बाद की किसी भी घटना से अधिकारियों को याचिकाकर्ता को लिंक प्रदान करने के अपने दायित्व से छूट नहीं मिलती, जबकि उन्होंने निर्देश में संशोधन की मांग भी नहीं की थी।
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अदालत ने माना कि हॉकी इंडिया और सिंह ने वर्तमान कार्यवाही के दौरान जिस तरह से व्यवहार किया, वह अदालत की अवमानना का स्पष्ट मामला है। अदालत ने अपने फैसले में कहा, अवमानना को दूर करने का कोई प्रयास नहीं किया गया।
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