हॉकी में दिलचस्प बदलाव, एक गोल पर टीम को मिलेंगे दो गोल
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वनडे क्रिकेट के नियमों में बदलाव के कुछ महीने बाद हॉकी के नियमों में भी बदलाव कर दिया गया है। यह बदलाव बेहद दिलचस्प है हालांकि नया गोल स्कोरिंग सिस्टम अगले साल हॉकी इंडिया लीग (एचआईएल) से लागू होगा।
इस नए नियम के तहत हॉकी में पहली बार पेनाल्टी कॉर्नर से गोल करने की तुलना में मैदानी गोल करने को तरजीह दी गई है। इस बार एचआईएल में एफआईएच की सहमति से नियमों में परिवर्तन किया गया है।
एचआईएल के चौथे सत्र से नया नियम लागू होगा। अब से एक फील्ड गोल को दो गोलों के बराबर माना जाएगा। यही नहीं मैदानी हमले में मिले पेनाल्टी स्ट्रोक पर हुए गोल पर भी दो गोल माने जाएंगे, जबकि पेनाल्टी कार्नर, पेनाल्टी कार्नर पर मिले पेनाल्टी स्ट्रोक या फिर शूट आउट के दौरान हुए गोलों को एक गोल ही माना जाएगा।
अगले साल के सत्र के लिए 17 सितंबर से छह टीमें 135 भारतीय और 141 विदेशी खिलाड़ियों पर बोली लगाएंगी।
नरिंदर बत्रा के मुताबिक प्रतिबंधित गुरबाज सिंह के मामले की सुनवाई 18 सितंबर को होने जा रही है। अगर उन्हें कमेटी माफी देती है तो उन्हें रिजर्व पूल में शामिल किया जाएगा, जिससे उन्हें कोई भी टीम अपने बेड़े में शामिल कर सकती है।
कुछ और भी हैं हॉकी में बदले गए नियम
हालांकि ये नए नियमों का प्रयोग दो साल तक के लिए किया जाएगा। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष नरिंदर बत्रा के अनुसार आज के युग में खिलाड़ियों और टीमों का जोर पेनाल्टी कॉर्नर हासिल करने पर होता है, इससे कलात्मक हॉकी का आकर्षण दिन पर दिन घट रहा है। लेकिन अब इस नए नियम के आने से अगर कोई टीम एक गोल से पिछड़ रही है तो वह अंतिम समय में भी मैदानी गोल के जरिए मैच जीत सकती है।
इसके अलावा अगर किसी खिलाड़ी को गोल करते समय जान-बूझकर गिराया जाता है तो उसके बाद मिले पेनाल्टी स्ट्रोक पर भी दो गोल दिए जाएंगे। हालांकि इस बारे में अंतिम निर्णय मैदानी अंपायर ही करेंगे।
पेनाल्टी कॉर्नर और पेनाल्टी शूटऑउट पर गोल के नियम पहले जैसे ही रहेंगे। लीग की हर टीम में 20 खिलाड़ी होंगे। इनमें 12 भारतीय और 8 विदेशी खिलाड़ी होंगे। हर टीम में 2-2 गोलकीपर होंगे और सभी 20 खिलाड़ियों के नाम मैच शीट पर होंगे और उन्हें बेंच पर बैठने का अधिकार होगा।
टू्र्नामेंट में मैच जीतने वाली विजेता टीम को 5 अंक दिए जाएंगे जबकि मैच के ड्रॉ होने की सूरत में दोनों टीमों को 2-2 अंक मिलेंगे। इसके अलावा दो या इससे कम गोल से हारने वाली टीम को एक अंक मिलेगा लेकिन तीन या इससे अधिक गोल से हारने वाली टीम को कोई अंक नही मिलेगा।
क्रिकेट की तरह विवाद न हो इसलिए हट गए राष्ट्रीय टीम के कोच
हाई परफॉरमेंस डायरेक्टर और भारतीय हॉकी टीम के डच कोच रोलैंट ओल्टमेंस इस बार हॉकी इंडिया लीग (एचआईएल) में कोच नहीं बनेंगे। क्रिकेट में जहां हितों के टकराव को लेकर जमकर छीछालेदर चल रही है वहीं ओल्टमेंस ने इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार यूपी विजार्ड्स का कोच बनने से इनकार कर दिया है।
ओल्टमेंस ने खुलासा किया है कि वह अपने ऊपर किसी तरह की उंगली नहीं उठने देना चाहते हैं। अगर वह एचआईएल में यूपी विजार्ड्स के कोच बनते हैं तो यह कहीं न कहीं हितों के टकराव का मामला बन सकता है। कोई भी उनके इस अनुबंध पर सवालिया निशान लगा सकता है। यही कारण है कि उन्होंने इस टीम के फ्रेंचाइजी को यह कह दिया है कि वह टीम को इस बार एचआईएल में सेवाएं नहीं दे पाएंगे।
चाहे एन श्रीनिवासन हों या फिर हाल ही में विराट कोहली के मालिकाना हक वाली आईपीटीएल टीम यूएई रॉयल्स के एडवाइजर बने भारतीय टीम के डायरेक्टर रवि शास्त्री, सभी पर हितों के टकराव को लेकर उंगलियां उठी हैं। शायद ओल्टमेंस ने क्रिकेट के इन्हीं उदाहरणों से सबक लेते हुए एचआईएल में कोचिंग देने से किनारा कर लिया है। हालांकि एक मुद्दा यह भी है कि साई ने पिछली बार ओल्टमेंस के यूपी विजार्ड का कोच बनने पर वेतन का मुद्दा उठा दिया था। साई ने कहा था कि अगर ओल्टमेंस एचआईएल में कोच बनते हैं तो फिर उस दौरान साई से वेतन नहीं ले सकते हैं।
ओल्टमेंस कहते हैं वह साई की इस बात से इत्तेफाक रखते हैं, लेकिन कोचिंग नहीं देने की वजह हितों का टकराव ही है। वह कहते हैं कि ओलंपिक अगले साल हैं। अगर यूपी टीम के खिलाड़ियों को भारतीय टीम में वरीयता मिलती है तो कोई भी सवाल खड़ा कर सकता है। फिर उनका प्रमुख काम इस बार एचआईएल में खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर नजर रखना है। एचआईएल में प्रदर्शन की बदौलत ही वह भविष्य की टीम की रूपरेखा तैयार करेंगे।
माफी मांगने तक पाक खिलाड़ियों को नहीं मिलेगा खेलने का मौका
हॉकी इंडिया लीग के चौथे संस्करण में पाकिस्तानी खिलाड़ियों को जगह नहीं मिलेगी। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष नरिंदर बत्रा ने साफ कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान हॉकी फेडरेशन भुवनेश्वर में हुई चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान दर्शकों के साथ भद्दे व्यवहार के लिए माफी नहीं मांगेगी तब पाकिस्तान के साथ दोस्ताना संबंध नहीं बनाए जाएंगे।
बत्रा कहते हैं कि हालांकि उन्हें खुशी होगी कि पाकिस्तानी खिलाड़ी एचआईएल का हिस्सा बनें, लेकिन इसके लिए उन्हें अच्छा व्यवहार करना सीखना होगा। बत्रा यह भी साफ करते हैं कि इस वक्त दोनों देशों के बीच राजनीतिक माहौल भी ऐसा नहीं चल रहा है जिससे पाकिस्तानी खिलाड़ियों को एचआईएल में शामिल किया जाए।
बत्रा का कहना है कि चैंपियंस ट्रॉफी में अपने व्यवहार के लिए पाकिस्तान ने आज तक माफी नहीं मांगी है। पाकिस्तान के साथ सिर्फ एफआईएच के आयोजनों में ही भारत खेलेगा। उसके साथ तब तक दोस्ताना सीरीज नहीं होंगी जब तक माफी नहीं मांगी जाती।