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सियासत के 'खिलाड़ी': अजहरुद्दीन से लेकर सिद्धू तक, खेल से जुड़े 7 चेहरे जिन्होंने राजनीति में बनाया बड़ा मुकाम
Fri, 31 Oct 2025 06:39 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Fri, 31 Oct 2025 06:39 PM IST
सार
इन सभी खिलाड़ियों ने यह दिखाया है कि खेल से मिली लोकप्रियता और अनुशासन का इस्तेमाल जनता की सेवा और प्रशासन में भी किया जा सकता है। अजहरुद्दीन का मंत्री बनना इस परंपरा की नई कड़ी है।
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सियासत के खिलाड़ी
- फोटो : ANI
विस्तार
तेलंगाना मंत्रिमंडल में शुक्रवार को शामिल किए गए मोहम्मद अजहरुद्दीन कांग्रेस शासित किसी राज्य में मंत्री बनने वाले दूसरे क्रिकेटर बने। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान रहे कांग्रेस नेता अजहरुद्दीन ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी नीत सरकार में मंत्री पद की शपथ ली। उनसे पहले नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब में मंत्री बने थे।
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अजहरुद्दीन का राजनीतिक सफर
अजहरुद्दीन ने अपना राजनीतिक सफर कांग्रेस के साथ शुरू किया और 2009 में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से लोकसभा सदस्य चुने गए। हालांकि, वह राजस्थान के टोंक-सवाई माधोपुर निर्वाचन क्षेत्र से 2014 का लोकसभा चुनाव हार गए। नवंबर 2023 में, तेलंगाना विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले, अजहरुद्दीन को प्रदेश कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उन्होंने नवंबर 2023 में राज्य विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा। अगस्त के अंतिम सप्ताह में तेलंगाना सरकार ने उन्हें राज्यपाल कोटे के तहत विधानपरिषद सदस्य (एमएलसी) मनोनीत किया। हालांकि, राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने उनके मनोनयन को अब तक मंजूरी नहीं दी है।
अजहरुद्दीन ने अपना राजनीतिक सफर कांग्रेस के साथ शुरू किया और 2009 में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से लोकसभा सदस्य चुने गए। हालांकि, वह राजस्थान के टोंक-सवाई माधोपुर निर्वाचन क्षेत्र से 2014 का लोकसभा चुनाव हार गए। नवंबर 2023 में, तेलंगाना विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले, अजहरुद्दीन को प्रदेश कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। उन्होंने नवंबर 2023 में राज्य विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा। अगस्त के अंतिम सप्ताह में तेलंगाना सरकार ने उन्हें राज्यपाल कोटे के तहत विधानपरिषद सदस्य (एमएलसी) मनोनीत किया। हालांकि, राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने उनके मनोनयन को अब तक मंजूरी नहीं दी है।
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खेल से सियासत तक का सफर
भारत में कई खिलाड़ी ऐसे रहे हैं जिन्होंने खेल मैदान से निकलकर राजनीति के मैदान में बड़ा मुकाम हासिल किया। इनमें से कई केंद्र और राज्य सरकारों में मंत्रिमंडल का हिस्सा रहे। इनमें क्रिकेटरों की भूमिका खास रही है। इन सभी खिलाड़ियों ने यह दिखाया है कि खेल से मिली लोकप्रियता और अनुशासन का इस्तेमाल जनता की सेवा और प्रशासन में भी किया जा सकता है। अजहरुद्दीन का मंत्री बनना इस परंपरा की नई कड़ी है। आइए खेल से जुड़े ऐसे शख्सियतों के बारे में जानते हैं...
भारत में कई खिलाड़ी ऐसे रहे हैं जिन्होंने खेल मैदान से निकलकर राजनीति के मैदान में बड़ा मुकाम हासिल किया। इनमें से कई केंद्र और राज्य सरकारों में मंत्रिमंडल का हिस्सा रहे। इनमें क्रिकेटरों की भूमिका खास रही है। इन सभी खिलाड़ियों ने यह दिखाया है कि खेल से मिली लोकप्रियता और अनुशासन का इस्तेमाल जनता की सेवा और प्रशासन में भी किया जा सकता है। अजहरुद्दीन का मंत्री बनना इस परंपरा की नई कड़ी है। आइए खेल से जुड़े ऐसे शख्सियतों के बारे में जानते हैं...
| नाम | संक्षिप्त व्याख्या |
|---|---|
| मोहम्मद अजहरुद्दीन (कांग्रेस, तेलंगाना) | भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान। |
| संदीप सिंह (भाजपा, हरियाणा) | भारत के पूर्व हॉकी कप्तान। |
| नवजोत सिंह सिद्धू (कांग्रेस, पंजाब) | भारतीय टीम के पूर्व ओपनर। |
| राज्यवर्धन सिंह राठौर (भाजपा, राजस्थान) | ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज। |
| चेतन चौहान (भाजपा, उत्तर प्रदेश) | पूर्व भारतीय ओपनर। |
| मनोज तिवारी (टीएमसी, पश्चिम बंगाल) | टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर। |
| परगट सिंह (कांग्रेस, पंजाब) | हॉकी के दिग्गज खिलाड़ी। |
| कीर्ति आजाद (टीएमसी, पश्चिम बंगाल) | 1983 विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहे। |
| गौतम गंभीर (पूर्व भाजपा सांसद, दिल्ली) | 2011 विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे। |
सिद्धू पंजाब मंत्रिमंडल का हिस्सा रहे
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज सिद्धू, जिन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत भाजपा से की थी, बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए। वह 2017 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में मंत्री बने। हालांकि, कांग्रेस की पंजाब इकाई के पूर्व अध्यक्ष (सिद्धू) पिछले कई महीनों से पार्टी के कार्यक्रमों और गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग नहीं ले रहे हैं। उन्हें 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों में शिकस्त का सामना करना पड़ा था। सिद्धू 2004 में लोकसभा के लिए भी चुने गए और 2016 में भाजपा से राज्यसभा सदस्य रहे थे।
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज सिद्धू, जिन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत भाजपा से की थी, बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए। वह 2017 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में मंत्री बने। हालांकि, कांग्रेस की पंजाब इकाई के पूर्व अध्यक्ष (सिद्धू) पिछले कई महीनों से पार्टी के कार्यक्रमों और गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग नहीं ले रहे हैं। उन्हें 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों में शिकस्त का सामना करना पड़ा था। सिद्धू 2004 में लोकसभा के लिए भी चुने गए और 2016 में भाजपा से राज्यसभा सदस्य रहे थे।
कांग्रेस ही नहीं, अन्य दलों में भी चमके क्रिकेटर
खिलाड़ियों का मंत्री बनना सिर्फ एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि यह एक मिसाल है कि खेल के मैदान पर सीखा गया अनुशासन, नेतृत्व और समर्पण राजनीति में भी कितना कारगर साबित हो सकता है। कांग्रेस के अलावा भाजपा और तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियों ने भी खिलाड़ियों को राजनीति में बड़ा मंच दिया है। राज्यवर्धन सिंह राठौर भाजपा की ओर से केंद्र में मंत्री रह चुके हैं। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दामन थामने वाले एक अन्य भारतीय क्रिकेटर मनोज तिवारी मौजूदा समय में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल में युवा सेवा एवं खेल राज्य मंत्री हैं। चेतन चौहान भी दो बार भाजपा सांसद रहे और उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में मंत्री रहे थे। कोविड-19 महामारी के दौरान उनका निधन हो गया।
खिलाड़ियों का मंत्री बनना सिर्फ एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि यह एक मिसाल है कि खेल के मैदान पर सीखा गया अनुशासन, नेतृत्व और समर्पण राजनीति में भी कितना कारगर साबित हो सकता है। कांग्रेस के अलावा भाजपा और तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियों ने भी खिलाड़ियों को राजनीति में बड़ा मंच दिया है। राज्यवर्धन सिंह राठौर भाजपा की ओर से केंद्र में मंत्री रह चुके हैं। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दामन थामने वाले एक अन्य भारतीय क्रिकेटर मनोज तिवारी मौजूदा समय में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल में युवा सेवा एवं खेल राज्य मंत्री हैं। चेतन चौहान भी दो बार भाजपा सांसद रहे और उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में मंत्री रहे थे। कोविड-19 महामारी के दौरान उनका निधन हो गया।
| नाम | राजनीतिक दल | राज्य | विभाग (पोर्टफोलियो) | पहली बार मंत्री बने |
|---|---|---|---|---|
| मोहम्मद अजहरुद्दीन | कांग्रेस | तेलंगाना | खेल और अल्पसंख्यक कल्याण (संभावित) | 2025 |
| संदीप सिंह | भाजपा | हरियाणा | हरियाणा के खेल एवं युवा मामले राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) | 2019 |
| नवजोत सिंह सिद्धू | कांग्रेस | पंजाब | स्थानीय सरकार, पर्यटन और सांस्कृतिक मामले | 2017 |
| राज्यवर्धन सिंह राठौर | भाजपा | राजस्थान | युवा मामले, सूचना एवं प्रसारण, सैनिक कल्याण | 2014 |
| चेतन चौहान | भाजपा | उत्तर प्रदेश | युवा मामले और खेल | 2018 |
| मनोज तिवारी | तृणमूल कांग्रेस | पश्चिम बंगाल | युवा मामले और खेल | 2021 |
| परगट सिंह | कांग्रेस | पंजाब | युवा मामले और खेल के साथ एनआरआई मामले | 2021 |
खिलाड़ी जो मंत्री नहीं बन पाए
वहीं, कई ऐसे खिलाड़ी भी रहे, जिनकी राजनीति में पारी तो चमकी, लेकिन मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं रहे। कीर्ति आजाद और गौतम गंभीर सहित कई अन्य पूर्व क्रिकेटरों ने भी अलग-अलग राजनीतिक दलों का दामन थामा। कीर्ति आजाद ने अपनी राजनीतिक पारी का आगाज भाजपा से किया था और वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस की ओर से बर्धमान-दुर्गापुर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। गंभीर भाजपा में शामिल हुए और पार्टी के टिकट पर 2019 का लोकसभा चुनाव जीता था। हालांकि, उन्होंने 2024 का चुनाव नहीं लड़ा। वह वर्तमान में भारतीय (पुरुष) क्रिकेट टीम के मुख्य कोच हैं।
वहीं, कई ऐसे खिलाड़ी भी रहे, जिनकी राजनीति में पारी तो चमकी, लेकिन मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं रहे। कीर्ति आजाद और गौतम गंभीर सहित कई अन्य पूर्व क्रिकेटरों ने भी अलग-अलग राजनीतिक दलों का दामन थामा। कीर्ति आजाद ने अपनी राजनीतिक पारी का आगाज भाजपा से किया था और वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस की ओर से बर्धमान-दुर्गापुर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। गंभीर भाजपा में शामिल हुए और पार्टी के टिकट पर 2019 का लोकसभा चुनाव जीता था। हालांकि, उन्होंने 2024 का चुनाव नहीं लड़ा। वह वर्तमान में भारतीय (पुरुष) क्रिकेट टीम के मुख्य कोच हैं।