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नई तकनीक से दिव्यांग भी उठा रहे फुटबॉल का लुत्फ, बिना देखे-सुने खेल का है जबर्दस्त जुनून 

Wed, 04 Jul 2018 06:25 AM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 04 Jul 2018 06:25 AM IST
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know a handicapped person Carlos Junior have so much interest in football without speak and listen
कार्लोस जूनियर
ब्राजील के कार्लोस जूनियर न देख पाते हैं और न सुन पाते हैं लेकिन दूसरे प्रशंसकों की तरह ही रूस में खेले जा रहे फीफा विश्व कप में अपने देश के प्रदर्शन का पूरा लुत्फ उठा रहे हैं। मसाज थेरेपी करने वाले 31 वर्षीय कार्लोस ने सोमवार को ब्राजील का मैक्सिको के साथ हुए मैच का दुभाषिये की मदद से पूरा लुत्फ उठाया।
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साइन लेंग्वेज से जुड़े दुभाषिए ने स्पर्श संचार के माध्यम से मैदान के मॉडल के जरिए उन्हें मैच की हर गतिविधि से रूबरू कराया। मसलन पास किस पोजीशन के खिलाड़ी ने किसे आगे बढ़ाया। गोल किस तरह हुआ और कहां और कैसे फाउल हुआ। ब्राजील ने इस मैच को 2-0 से जीता था। इस तकनीक की सफलता इस बात से पता लगता है कि जब भी मैक्सिको गोल करने के नजदीक पहुंची तो कार्लोस की भौहें तन गई और जब ब्राजील के खिलाड़ी गोल करने के पहुंचते तो वह खुशी से उछलने लगते और ड्रम बजाने लगते। उस समय तो उन्होंने साथियों को गले से लगा लिया जब नेमार ने 51वें मिनट में ब्राजील की ओर से पहला गोल किया।
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विश्व कप के दौरान मैच को समझने की कार्लोस जूनियर की इस तकनीक का वीडियो दुनिया भर में सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है। इस वीडियो को कार्लोस के एक दोस्त ने सोशल मीडिया पर साझा किया है। इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी प्रचार मिल रहा है। अब तक लाखों लोग इसे ऑनलाइन देख चुके हैं। 
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बचपन से दृष्टिहीन नहीं थे कार्लोस 
बचपन में कार्लोस सिर्फ सुन नहीं पाते थे लेकिन देख सकते थे और बधिरों की एक टीम में गोलकीपर भी लेकिन 14 वर्ष की उम्र के बाद उनकी दृष्टि पर असर पड़ना शुरू हुआ और 23 वर्ष की उम्र में रोशनी जाती रही लेकिन पिता की मदद से वह साओ पाउलो क्लब के मैचों का लुत्फ लेते रहे। उनके पिता हाथ पकड़कर समझा देते थे गोल हो गया लेकिन मुझे यह नहीं पता चलता था कि गेंद जब गोलपोस्ट से टकराई तो लगी किस तरफ दायीं ओर या बायीं ओर। साइन लेंग्वेज दुभाषिये हेलियो फोनसेका डि अरुजो ने मैदान के मॉडल का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव रखा और जूनियर ने इसे आजमाने का फैसला किया। अब कार्लोस को यह भी पता लग गया है कि पिछले मैच में नेमार कब गिरे थे और कोस्टा रिका के खिलाफ गोल होने के बाद खुशी से भागते समय कोच टिटे गिर भी गए थे। 

कैसे काम करती है तकनीक 
कार्लोस ने अपने हाथ दुभाषिये के हाथ पर रखे जिसमें एक हाथ को गेंद माना गया और दूसरे को वो खिलाड़ी जिसके कब्जे में गेंद है। कार्लोस पहले ही मैदान की हर पोजीशन से वाकिफ हैं। दुभाषिए ने मॉडल पर हाथों को बढ़ाकर गोल के लिए बन रहे मूव को समझाया। इस बीच दूसरे दुभाषिए ने कार्लोस की पीठ पर स्पर्श संवाद के जरिए यह समझाया कि कौन सी टीम है और जर्सी के नंबर से यह बताया कि कौन से खिलाड़ी के पास गेंद है। इसी तरह फाउल, कार्ड, बचाव के बारे में बताया गया।   


कार्लोस जूनियर का कहना है, 'जब आप इस तकनीक का सफल इस्तेमाल करने में सक्षम हो जाएंगे तो आप यह दर्शा पाओगे कि एक न देख पाने वाला और न सुन पाने वाला किसी आम शख्स की तरह खेल का लुत्फ उठा सकता है।'
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