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FIFA WC: कतर में 'राइजिंग सन' फ्लैग को लेकर विवाद, हिटलर की सेना में इस्तेमाल होने वाले झंडे से जुड़ा है मामला

Wed, 30 Nov 2022 04:42 PM IST
रोहित राज स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, दोहा
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, दोहा Published by: रोहित राज Updated Wed, 30 Nov 2022 04:42 PM IST
सार

जापान और कोस्टारिका के बीच 27 नवंबर को हुए ग्रुप-ई के मैच के दौरान कुछ जापानी समर्थकों द्वारा 'राइजिंग सन' फ्लैग को लहराया गया। इस मैच में कोस्टारिका ने 1-0 से जीत हासिल की थी।

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FIFA World Cup 2022 Controversy over the Rising Sun flag in Qatar fifa take action
राइजिंग सन फ्लैग के साथ जापानी प्रशंसक - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कतर में चल रहे फीफा विश्व कप में विवाद कम होने के नाम नहीं ले रहे। टूर्नामेंट की मेजबानी से लेकर समलैंगिक लोगों पर कई प्रतिबंध सहित कई विवाद सामने आए। इसके अलावा फुटबॉल समर्थकों को कई झंडों के इस्तेमाल से भी रोका गया। हाल ही में यह बताया गया था कि फुटबॉल के अंतरराष्ट्रीय शासी निकाय ने इंग्लैंड के प्रशंसकों से कहा है कि वे विश्व कप के दौरान मध्यकालीन क्रूसेडर पोशाक न पहनें।
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क्रूसेडर पोशाक पर रोक लगाने को लेकर फीफा ने यह तर्क दिया कि अरब देशों में धर्मयुद्ध की वेशभूषा वहां के स्थानीय लोगों को भड़का सकती है। इसी कारण प्रशंसकों को स्टेडियम के अंदर इस तरह के पोशाक में नहीं पहनने के लिए कहा गया। अब 'राइजिंग सन' फ्लैग को लेकर विवाद हो रहा है।
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जापान के मैच में दिखा था राइजिंग सन' फ्लैग
जापान और कोस्टारिका के बीच 27 नवंबर को हुए ग्रुप-ई के मैच के दौरान कुछ जापानी समर्थकों द्वारा 'राइजिंग सन' फ्लैग को लहराया गया। इस मैच में कोस्टारिका ने 1-0 से जीत हासिल की थी। यह बताया गया कि फीफा के अधिकारियों ने प्रशंसकों को विवादित झंडे को लटकाने और प्रदर्शित करने से रोक दिया।
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FIFA World Cup 2022 Controversy over the Rising Sun flag in Qatar fifa take action
हिटलर के हेकेनक्रेज के साथ राइजिंग सन फ्लैग - फोटो : सोशल मीडिया
झंडे के पीछे का क्या है इतिहास?
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना द्वारा राइजिंग सन ध्वज का उपयोग किया गया था। तब यह हिटलर की सेना में भी दिखा था। इसे कोरिया सहित कई देशों में जापानी साम्राज्य के प्रतीक के रूप में माना जाता है।

इस झंडे को रोकने के बाद कई देशों में फीफा की तारीफ हो रही है। फीफा के बारे में कहा जा रहा है कि उसने न केवल एशियाई फुटबॉल प्रशंसकों बल्कि दुनिया भर के लोगों के प्रति सम्मान दिखाते हुए एक बहुत ही उचित कार्रवाई थी, क्योंकि राजनीतिक रूप से आक्रामक 'राइजिंग सन' फ्लैग एक युद्ध आपराधिक झंडा है, जिसका अर्थ जर्मनी के हेकेनक्रेज के समान है।

कोरियाई संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए जानी जाने वाली सुंगशिन महिला विश्वविद्यालय में सामान्य शिक्षा की प्रोफेसर सेओ क्यूंग-डुक ने फीफा की कार्रवाई को सही बताया। उन्होंने कहा, ''इसका बहुत बड़ा कदम है क्योंकि यह पहली बार है जब फीफा ने आधिकारिक तौर पर प्रशंसकों द्वारा ध्वज के उपयोग पर रोक लगा दी है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा निर्णय था जिसने न केवल एशिया में, बल्कि पूरी दुनिया में फुटबॉल प्रशंसकों को सम्मानित किया।'' हालांकि, राइजिंग सन फ्लैग के संबंध में फीफा ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
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