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PHD करने गए दीपक खींचने लगे टीम इंडिया की फोटो
'द हेग' से सत्येन्द्र पाल सिंह
Updated Wed, 04 Jun 2014 12:32 PM IST
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भारतीय हॉकी टीम हेग के क्लिन जिवटजरलैंड स्टेडियम में प्रैक्टिस कर रही थी। घने पेड़ों से घिरे इस मैदान के एक छोर पर एक भारतीय सा दिखने वाला नौजवान भी भारतीय टीम की प्रैक्टिस की तस्वीरें उतारते दिखा।
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उस नौजवान का नाम डॉ. दीपक प्रताप सिंह था जो मैं पीलीभीत (उत्तर प्रदेश) का रहना वाला है।
दीपक यहां नैनो टेक्नोलॉजी में डॉक्टरेट करने आए थे जो पूरी हो गई है। उन्होंने फंडामेंटल आसपैक्ट ऑफ मैटिरियल एंड रिसर्च में डॉक्टरेट किया है। वह यहां पिछले 7 साल से रह रहे हैं।
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दीपक ने बताया की पिछले साल भर में भारतीय हॉकी टीम करीब चार-पांच बार यहां आ चुकी है। फोटोग्राफी का शौक है इसलिए जब पिछले दिनों जब भारतीय टीम यहां आई थी, तब उन्होंने हॉकी इंडिया से बात की।
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उन्होंने कहा, "हॉकी इंडिया वालों ने मुझसे कहा कि आप भारत की प्रैक्टिस और उसके मैचों की तस्वीर हमें भेज दे। मैं तब से हॉकी इंडिया को तस्वीरें भेज रहा है। फिलहाल मैं खाली हूं और मैं यहां भारत के हॉकी मैचों की तस्वीरें हॉकी इंडिया को भेज रहा हूं।"
नीदरलैंड से सबक ले भारत
नीदरलैंड में फुटबॉल सबसे ज्यादा लोकप्रिय है लेकिन हॉकी को भी यहां लोग दिल से चाहते हैं। भारत और बेल्जियम या फिर भारत और इंग्लैंड के बीच वर्ल्ड कप मैचों में खासी तादाद में स्टेडियम में खासतौर पर स्थानीय दर्शकों की मौजूदगी यहां हॉकी की दीवानगी को साफ दर्शाती है।
भारत भले ही यहां वर्ल्ड कप में अपने दोनों शुरुआती मैच आखिरी क्षणों की गलती के कारण हार गया लेकिन हॉकी के जानकार दर्शकों ने उसके खेल को सराहा ही नतीजे से भी हमदर्दी जताई। क्या बच्चे, क्या बूढ़े हर किसी की हॉकी के महापर्व के पहले मैच के जोश से यह साफ था यहां हॉकी के जोश है और कायम रहेगा।
इसकी तुलना भारत में हॉकी के सूरते-हाल से करें तो सहज ही अंदाज हो सकता है हमारी हॉकी की जमीन दरक रही है। हॉकी केवल कहने भर के लिए भारत का राष्ट्रीय खेल रह गया है।
भारत को हॉकी में पुराना गौरव वापस पाना है तो उसे नीदरलैंड सरीखा हॉकी का जुनून चाहिए। भारत को जमीनी स्तर पर नीदरलैंड सरीखा हॉकी का मजबूत ढांचा बनाना होगा। भारत के चीफ कोच टैरी वॉल्श ठीक कहते हैं कि भारत में हॉकी को उसका खोया मुकाम वापस लौटाने के लिए जमीनी स्तर पर इसके लिए मजबूत ढांचे की दरकार है।
नीदरलैंडस में मां-बाप अपने बच्चों को हॉकी का मैच दिखाने के लिए स्टेडियम ले जाते हैं। यहां के हॉकी प्रेमियों की निष्ठा अपने-अपने क्लबों के साथ जुड़ी है। करीब दो महीने के भीतर कुसेरा और ग्रीनफील्ड स्टेडियम में हॉकी वर्ल्ड कप के एस्ट्रो टर्फ बिछाई गई।
इस वर्ल्ड कप के बाद यहां से इसे हटा दिया जाएगा और सर्दियों में यहां फुटबॉल के मैच होंगे। हेग और इसके दस किलोमीटर की परिधि में 10 से ज्यादा हॉकी क्लब हैं। इसके अलावा छोटे-मोटे स्टेडियम अलग होंगे। अकेले रॉटरडम में ही 300 से ज्यादा हॉकी क्लब हैं।
दुनिया में हॉकी के सबसे ज्यादा एस्ट्रो टर्फ यानी कृत्रिम सतह के मैदान नीदरलैंड में ही हैं। नीदरलैंड में करीब आठ सौ है। दुनिया भर में इतने एस्ट्रो टर्फ कहीं भी नहीं है।
अर्जेंटीना ने जर्मनी को हरा किया उलटफेर
स्ट्राइकर मैनुअल ब्रंट द्वारा हाफ टाइम से 4 मिनट पहले दागे मैदानी गोल से अर्जेंटीना ने खिताब की प्रबल दावेदार जर्मनी को पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप में पूल-बी के मैच में 1-0 से हराकर बड़ा उलटफेर किया।
अर्जेंटीना की इस जीत से यह पूल खासा रोचक हो गया है। दूसरी वरीयता प्राप्त जर्मनी ने काफी पसीना बहाकर पहले मैच में दक्षिण अफ्रीका को 4-0 से हराया था।
अब दो-दो मैचों से दोनों टीमों के तीन-तीन अंक हो गए हैं। अर्जेंटीना ने जर्मनी पर इस जीत के साथ अपनी चुनौती बनाए रखी। अर्जेंटीना ने इस जीत के साथ पहले मैच में नीदरलैंड के हाथों मिली हार का गम भी भुला दिया।