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Commonwealth Games 2022: अखबार के एक लेख से बदली सागर अहलावत की दुनिया, बर्मिंघम में दिखेगा पंच का दम
Sat, 23 Jul 2022 11:31 PM IST
रोहित राज
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: रोहित राज
Updated Sat, 23 Jul 2022 11:31 PM IST
सार
किसान परिवार में जन्मे सागर के घर में इससे पहले कोई खेलों से नहीं जुड़ा था। एक दिन उन्होंने अखबार में 2015 में हुई दिग्गज मुक्केबाजों मेवेदर और पैकियाओ के मुकाबले के बारे में छपे लेख ‘फाइट ऑफ द सेंचुरी’ को पढ़ा।
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सागर अहलावत
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कभी-कभी कागज पर लिखे चंद अल्फाज और दिग्गजों के किस्से आपके लिए सफलता और प्रेरणा का बड़ा मंत्र बन जाते हैं। भारतीय मुक्केबाज सागर अहलावत के लिए 2015 में दिग्गज बॉक्सर फ्लायड मेवेदर जूनियर और मैनी पैकियाओ के मुकाबले के बारे में अखबार में छपा पूरे पेज का एक लेख उनकी जिदंगी की ‘दशा और दिशा’ बदल गया। दरअसल इस लेख ने मुक्केबाज के रूप में उनके सपने को पूरा करने के लिए नई प्रेरणा दी। मेवेदर अमेरिका के वो मुक्केबाज हैं, जो अजेय रहे और जिन्होंने रिंग में दम भी दिखाया और दाम भी खूब बटोरा।
राष्ट्रमंडल खेल पहला बड़ा टूर्नामेंट
सात साल हो गए उस वाक्ये को और आज 20 साल के सागर बर्मिंघम में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में 92+ भारवर्ग में भारत के लिए पदक जीतने की रेस में हैं। सीनियर वर्ग में वह पहली बार भारतीय जर्सी में उतरेंगे। सागर कहते हैं, वो पढ़ने में ज्यादा अच्छे नहीं थे। मेरे से पढ़ाई होती ही नहीं, बारहवीं कक्षा की परीक्षा के बाद मैं सोच रहा था कि ऐसा कुछ करूं जिंदगी में कुछ सफलता हासिल कर सकूं।
किसान परिवार में जन्मे सागर के घर में इससे पहले कोई खेलों से नहीं जुड़ा था। एक दिन उन्होंने अखबार में 2015 में हुई दिग्गज मुक्केबाजों मेवेदर और पैकियाओ के मुकाबले के बारे में छपे लेख ‘फाइट ऑफ द सेंचुरी’ को पढ़ा। उन मुक्केबाजों की सफलता और शोहरत के किस्से पढ़कर उन्हें यह विचार सूझ गया कि भविष्य में उन्हें मुक्केबाज ही बनना है।
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दो साल में ही पहला स्वर्ण
उन्होंने कहा, मेरे घर में कोई भी खेलों में नहीं था। मैं भी मुक्केबाजी के बारे में ज्यादा नहीं जानता था। हरियाणा के झज्जर में रहने वाले इस युवा ने 2017 में अपने गांव धनदलान से 20 किमी दूर जवाहर बाग स्टेडियम में विधिवत ट्रेनिंग शुरू कर दी। सबसे पहले 2019 में यूनिवर्सिटी गेम्स में स्वर्ण पदक जीता और फिर 2020 खेलो इंडिया में अपनी सफलता का परचम फहराया।
ओलंपियन को दी मात
2021 में सीनियर नेशनल में रजत पदक हासिल कर सबको चौंका दिया। राष्ट्रमंडल खेलों के लिए हुए ट्रायल्स में उन्होंने टोक्यो ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में पहुंचे सतीश कुमार को हराया और फिर गत राष्ट्रीय चैंपियन नरेंदर को हराकर बर्मिंघम का टिकट पक्का कर लिया।
कोई दबाव नहीं
सागर का कहना है कि राष्ट्रमंडल खेल उनका पहला बड़ा टूर्नामेंट है लेकिन वह बिल्कुल नर्वस या दबाव में नहीं हैं। भारत को इंग्लैंड और आयरलैंड के मुक्केबाजों से कड़ी चुनौती मिलेगी। अहलावत के पास अनुभव ज्यादा नहीं है लेकिन उन्हें आप पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि मेरे पास तकनीक की कमी हो सकती है लेकिन ताकत बहुत है और यही मुझे जीत दिलाएगी।
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राष्ट्रमंडल खेल पहला बड़ा टूर्नामेंट
सात साल हो गए उस वाक्ये को और आज 20 साल के सागर बर्मिंघम में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में 92+ भारवर्ग में भारत के लिए पदक जीतने की रेस में हैं। सीनियर वर्ग में वह पहली बार भारतीय जर्सी में उतरेंगे। सागर कहते हैं, वो पढ़ने में ज्यादा अच्छे नहीं थे। मेरे से पढ़ाई होती ही नहीं, बारहवीं कक्षा की परीक्षा के बाद मैं सोच रहा था कि ऐसा कुछ करूं जिंदगी में कुछ सफलता हासिल कर सकूं।
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किसान परिवार में जन्मे सागर के घर में इससे पहले कोई खेलों से नहीं जुड़ा था। एक दिन उन्होंने अखबार में 2015 में हुई दिग्गज मुक्केबाजों मेवेदर और पैकियाओ के मुकाबले के बारे में छपे लेख ‘फाइट ऑफ द सेंचुरी’ को पढ़ा। उन मुक्केबाजों की सफलता और शोहरत के किस्से पढ़कर उन्हें यह विचार सूझ गया कि भविष्य में उन्हें मुक्केबाज ही बनना है।
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दो साल में ही पहला स्वर्ण
उन्होंने कहा, मेरे घर में कोई भी खेलों में नहीं था। मैं भी मुक्केबाजी के बारे में ज्यादा नहीं जानता था। हरियाणा के झज्जर में रहने वाले इस युवा ने 2017 में अपने गांव धनदलान से 20 किमी दूर जवाहर बाग स्टेडियम में विधिवत ट्रेनिंग शुरू कर दी। सबसे पहले 2019 में यूनिवर्सिटी गेम्स में स्वर्ण पदक जीता और फिर 2020 खेलो इंडिया में अपनी सफलता का परचम फहराया।
ओलंपियन को दी मात
2021 में सीनियर नेशनल में रजत पदक हासिल कर सबको चौंका दिया। राष्ट्रमंडल खेलों के लिए हुए ट्रायल्स में उन्होंने टोक्यो ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में पहुंचे सतीश कुमार को हराया और फिर गत राष्ट्रीय चैंपियन नरेंदर को हराकर बर्मिंघम का टिकट पक्का कर लिया।
कोई दबाव नहीं
सागर का कहना है कि राष्ट्रमंडल खेल उनका पहला बड़ा टूर्नामेंट है लेकिन वह बिल्कुल नर्वस या दबाव में नहीं हैं। भारत को इंग्लैंड और आयरलैंड के मुक्केबाजों से कड़ी चुनौती मिलेगी। अहलावत के पास अनुभव ज्यादा नहीं है लेकिन उन्हें आप पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि मेरे पास तकनीक की कमी हो सकती है लेकिन ताकत बहुत है और यही मुझे जीत दिलाएगी।