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Paris Olympics: अभिनव बिंद्रा ने मौजूदा समय के खिलाड़ियों के लिए कही अहम बात, भारतीय दल को दी ये सलाह

Tue, 09 Jul 2024 08:28 AM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शोभित चतुर्वेदी Updated Tue, 09 Jul 2024 08:28 AM IST
सार

बिंद्रा ने कहा कि भारत को 30-40 ओलंपिक पदक जीतने का सपना देखना शुरू करने के लिए जमीनी स्तर पर बहुत काम करने की जरूरत है।

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Beijing Olympics Gold Medalist Shooter Abhinav bindra said that Current era players are not weak at heart
अभिनव बिंद्रा - फोटो : twitter

विस्तार

पेरिस ओलंपिक का आयोजन कुछ ही दिनों में होना है और इसके लिए भारत सहित इसमे हिस्सा लेने वाले सभी देश के एथलीट पूरी तरह तैयार हैं। इस बीच, 2008 बीजिंग ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले निशानेबाद अभिनव बिंद्रा ने अपने समय के खिलाड़ियों की तुलना मौजूदा दौर के खिलाड़ियों से करते हुए बड़ी बात कही है। भारत के पहले व्यक्तिगत स्पर्धा के ओलंपिक चैंपियन बिंद्रा का मानना है कि खिलाड़ियों की मौजूदा पीढ़ी उनके समय के कमजोर दिल वाले खिलाड़ियों की तुलना में अधिक मजबूत है।
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'जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत'
बिंद्रा ने कहा कि भारत को 30-40 ओलंपिक पदक जीतने का सपना देखना शुरू करने के लिए जमीनी स्तर पर बहुत काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'हमें खेल को अलग तरह से देखना शुरू करना होगा। वर्तमान में हम यह देख रहे हैं कि विश्व स्तर पर एथलीट कैसा प्रदर्शन कर रहे हैं। यह हमें मजबूती देता है। हमें राष्ट्र निर्माण में खेल की बड़ी भूमिका को देखने की जरूरत है।' बीजिंग ओलंपिक में निशानेबाजी में स्वर्ण पदक जीतने वाले बिंद्रा ने 26 जुलाई से शुरू होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए देश की तैयारियों पर आयोजित एक पैनल चर्चा के दौरान भारतीय दल को सलाह दी कि वे अतीत या भविष्य के बारे में सोचने की गलती न करें। भारत के लगभग 125 खिलाड़ियों ने इन खेलों के लिए क्वालिफाई कर लिया है, जो देश के इतिहास में सबसे ज्यादा है। उन्होंने कहा, एथलीटों की सबसे बड़ी गलती यह है कि वे या तो अतीत में जीते हैं या भविष्य के बारे में सोच रहे हैं। वे इस वास्तविकता के बारे में भूल जाते हैं मौजूदा समय की अहमियत सबसे ज्यादा है।
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'मौजूदा दौर के खिलाड़ियों का आत्मविश्वास अधिक है'
बिंद्रा ने कहा, मैं एक ऐसी पीढ़ी से आया हूं जो स्वभाव से कमजोर दिल वाली थी। आज के दौर के खिलाड़ियों का आत्मविश्वास कहीं अधिक है। वे इन खेलों में सिर्फ हिस्सा लेना नहीं बल्कि पदक जीतना चाहते हैं। ये खिलाड़ी कोई और पदक नहीं बल्कि स्वर्ण पदक जीतना चाहते है। यह हमारे समाज का प्रतिबिंब है कि पिछले कुछ वर्षों में यह कैसे विकसित हुआ है।
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इस 41 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा कि खेलों को देखने और उसके बारे में बात करने का तरीका बदल गया है लेकिन जिस चीज में बदलाव नहीं आया है वह है एथलीटों को मिलने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा। बिंद्रा ने कहा, अब अलग तरह से बातचीत होती है। उसमें हालांकि कई समानताएं है, उन्हें पेरिस में अपना दमखम दिखाना होगा और उस विशेष दिन पर प्रदर्शन करना होगा। यह किसी भी तरह से आसान नहीं होने वाला है। उन्हें दबाव झेलना सीखना होगा। वर्षों से सीखी गई  प्रक्रिया, अपने कौशल को खेल में उतारने पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
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