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'इस खिलाड़ी में है ओलंपिक पदक जीतने का दम'

Tue, 27 Jun 2017 06:46 AM IST
सत्येन्द्र पाल सिंह/ अमर उजाला, नई दिल्ली
सत्येन्द्र पाल सिंह/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 27 Jun 2017 06:46 AM IST
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Srikanth has a tendency to go for the Olympic Medal

बतौर बैडमिंटन उस्ताद भारत को साइना नेहवाल और पी वी सिंधू जैसी ओलंपिक पदक विजेता देने वाले पुलेला गोपीचंद अब अपने शागिर्द किदाम्बी श्रीकांत के तीन हफ्तों में उलटफेर कर तीन सुपर सीरीज के फाइनल में पहुंच कर ऑस्ट्रेलियन ओपन सहित दो सुपर खिताब जीतने पर बेहद फख्र महसूस कर रहे हैं। श्रीकांत और साई प्रणीत सरीखे गोपीचंद के शागिर्दों ने पिछले करीब चार हफ्ते में तीन सुपर सीरीज खिताब जीत बतौर बैडमिंटन कोच उनका मान बढ़ाया है। 

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अपने शागिर्द श्रीकांत के रविवार को ओलंपिक और विश्व चैंपियन चेन लॉन्ग को फाइनल में हरा कर ऑस्ट्रेलियाई ओपन सुपर सीरीज खिताब जीतने पर धमाल मचाने की बाबत गोपीचंद ने सोमवार को फोन पर ‘अमर उजाला’ से कहा, ‘श्रीकांत की यह कामयाबी  उनकी करीब-करीब एक दशक लंबी साधना का इनाम है। 
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श्रीकांत निरंतर ऐसा ही शानदार खेल जारी रखा तो वह अगस्त में ग्लास्गो में विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप के साथ 2020 में टोक्यो ओलंपिक में पुरुष सिंगल्स में पदक जीतने का दम रखते हैं। श्रीकांत 2016 में रियो ओलंपिक में लिन डॉन के खिलाफ बढ़त लेने के बाद हार कर सेमीफाइनल में पहुंचने से चूक गए थे। इससे श्रीकांत की ओलंपिक पदक जीतने की हसरत बस हसरत ही रग गई थी। श्रीकांत को मैंने जब अकैडमी में नौजवान खिलाड़ी के रूप में ट्रेनिंग देनी शुरू की तो तभी मुझे उनकी प्रतिभा का कायल हो गया था। मैं बैडमिंटन कोर्ट और उनके जीवट और चतुराई का कायल हूं।  

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निरंतर बेहतर प्रदर्शन कर अपनी विश्व रैंकिंग निरंतर बेहतर की जुगत में जुटे

Srikanth has a tendency to go for the Olympic Medal
किदाम्बी श्रीकांत - फोटो : Twitter

श्रीकांत के खेल में हाल ही में बड़ा बदलाव यह आया है कि मैच के रुख के मुताबिक चतुराई से अपनी रणनीति बदल कर तेज खेलने के साथ खेल को धीमा कर कर बड़े से बड़े दिग्गज को मात देना सीख गए हैं।  एक अच्छी बात यह है कि वह लिन डॉन और चेन लॉन्ग जैसे दुनिया के धुरंधरों के खिलाफ खेलते हुए किसी तरह के मनोवैज्ञानिक दबाव में नहीं आते हैं। सामने कितना बड़ा ही खिलाड़ी हो उससे वह दबाव में नहीं आते बल्कि अपना नैसर्गिक खेल खेलते हैं। दिन श्रीकांत का दिन रहा तो वह दुनिया के बड़े से बड़े खिलाड़ी को हरा सकते हैं। यह हाल ही के अपने खेल से कई धुरंधरों  को हरा करा उलटफेर कर इस बात को श्रीकांत ने साबित भी किया है। 

बैडमिंटन कोर्ट पर उतरने के बाद प्रतिद्वंद्वी की उंची वरीयता से प्रभावित होने पर दबाव में आने की बजाय वह अपना नैसर्गिक खेल खेलते हैं। इंडोनेशिया के मूलयो हानदोयो के बतौर कोच भारतीय बैडमिंटन संघ से जुड़ने से भी किदाम्बी को अपना खेल सुधारने में बहुत मदद मिली है। साथ ही अकैडमी में अंबरीश शिंदे और सिद्धार्थ जैन जैसे प्रशिक्षकों ने भी श्रीकांत को वक्त के साथ कदम ताल कर निरंतर अपना खेल सुधारने में मदद की है।’ 
वह बताते हैं, ‘जिस मुकाम पर अभी श्रीकांत पहुंचे हैं, इसके लिए उन्होंने अपना ओवरआल खेल सुधारा है। श्रीकांत का तीन हफ्ते में दो सुपर सीरीज बैडमिंटन खिताब जीतना वाकई शानदार उपलब्धि है। 

उन्होंने बतौर खिलाड़ी कभी भी मेहनत में कोताही नहीं की। वह निरंतर बेहतर प्रदर्शन कर अपनी विश्व रैंकिंग निरंतर बेहतर की जुगत में जुटे हैं। अब उनका अगला बड़ा इम्तिहान अगस्त में ग्लास्गो में विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में होगा। वह इसी तरह से खेलते रहे तो वह विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में भी जरूर पदक जीतेंगे। श्रीकांत के खेल में अब धैर्य आ गया है। अब वह अपने प्रतिद्वंद्वी के खेल के लिहाज से नेट पर आक्रमण करने के साथ प्रतिद्वंद्वी के शॉट पर रिटर्न करने का दम रखते हैं।  अपनी बेहतरीन फिटनेस से श्रीकांत ऐसा कर पा रहे हैं। विश्व बैडमिंटन रैंकिंग में फिलहाल 11 वे पायदान पर मौजूद श्रीकांत के ऑस्ट्रेलियन ओपन सुपर सीरीज खिताब जीतने के बाद रैंकिंग और बेहतर होगी।’

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