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Lakshya Sen: बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन को हाईकोर्ट से झटका, सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत; जानें मामला

Tue, 25 Feb 2025 12:23 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, बंगलुरू
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, बंगलुरू Published by: शोभित चतुर्वेदी Updated Tue, 25 Feb 2025 12:23 PM IST
सार

हाई कोर्ट ने कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया साक्ष्य मौजूद हैं जो जांच की आवश्यकता को दर्शाते हैं। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर लक्ष्य और चिराग सेन के जन्म प्रमाण पत्र में करीब दो साल छह महीने की उम्र घटा दी जिससे वे आयु-सीमित बैडमिंटन टूर्नामेंट में भाग ले सकें।

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Karnataka High Court rejected petitions of Lakshya Sen with allegations of fabricating birth certificates
लक्ष्य सेन - फोटो : PTI

विस्तार

उम्र विवाद में फंसे बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ किसी भी कार्रवाई पर रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत अब इस मामले की 16 अप्रैल को सुनवाई करेगी। इससे पहले कर्नाटक हाईकोर्ट ने लक्ष्य, उनके परिवार और कोच यू विमल कुमार की ओर से दाखिल याचिकाओं को खारिज करते हुए फर्जी जन्म प्रमाणपत्र मामले की जांच आदेश दिए थे। एम. जी. नागराज ने खिलाड़ी पर हेराफेरी कर फर्जी दस्तावेज पेश करने के आरोप लगाते हुए एक निजी शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि लक्ष्य सेन के माता-पिता धीरेंद्र और निर्मला सेन, उनके भाई चिराग सेन, कोच यू विमल कुमार और कर्नाटक बैडमिंटन संघ के एक कर्मचारी ने जन्म रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा किया है।
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सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
हाईकोर्ट से याचिकाएं खारिज होने के बाद लक्ष्य और उनके परिवार ने तत्काल सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जस्टिस सुधांशु धूलिया और जेटिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने याचिकाकर्ता चिराग सेन और अन्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सीए सुंदरम की रोक की मांग वाली याचिका को स्वीकार कर लिया। अधिवक्ता सुंदरम ने कहा कि जब उनके सहयोगी ने मामले में राहत मांगी तो हाईकोर्ट ने मामले को गुण-दोष (मेरिट) के आधार पर खारिज कर दिया। दलीलों को सुनने के बाद पीठ ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी और याचिका पर नोटिस जारी किया है। अब इस मामले की सुनवाई 16 अप्रैल को होगी।
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हाई कोर्ट ने दिए थे जांच के आदेश दिए 
हाई कोर्ट ने कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया साक्ष्य मौजूद हैं जो जांच की आवश्यकता को दर्शाते हैं। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर लक्ष्य और चिराग सेन के जन्म प्रमाण पत्र में करीब दो साल छह महीने की उम्र घटा दी जिससे वे आयु-सीमित बैडमिंटन टूर्नामेंट में भाग ले सकें और सरकारी लाभ प्राप्त कर सकें। नागराज ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों के साथ अपना दावा पेश किया और न्यायालय से भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) तथा  खेल मंत्रालय से मूल रिकॉर्ड तलब करने का अनुरोध किया। हाई कोर्ट ने हाई ग्राउंड्स पुलिस थाने को मामले की जांच के आदेश दिए।
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अधिक समय देने से किया था इन्कार 
अदालत के निर्देश के बाद, पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 468 (जालसाजी) और 471 (नकली दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की। हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने 2022 में कर्नाटक हाई कोर्ट का रुख किया, जिससे एक अंतरिम आदेश प्राप्त हुआ जिसने जांच को रोक दिया। न्यायमूर्ति एम. जी. उमा ने याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं के वकील को पर्याप्त अवसर दिए गए, लेकिन उन्होंने अपनी दलीलें पेश नहीं कीं। न्यायाधीश ने अधिक समय देने से भी इन्कार कर दिया।
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