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दिल्ली आईं अरुणिमा पर न संसद गईं न मंत्री मिले
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 05 Oct 2012 11:49 PM IST
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पैर कटने के बावजूद अरुणिमा सिन्हा ने पहाड़ों पर चढ़ाई तो चढ़ ली। लेकिन खेल मंत्रालय से लोहा लेना उनके लिए इस जज्बे से भी भारी पड़ गया है। बतौर खिलाड़ी खेल मंत्रालय के पास उनका रिकार्ड नहीं होने की खबर उन्होंने जब अमर उजाला में पढ़ी तो वह सीधे दिल्ली चली आईं। उनकी कोशिश यही थी कि मंत्रालय को वह अपने खिलाड़ी और पर्वतारोही होने का सुबूत दे सकें।
साथ ही लिंगभेद संवेदनशील संसद के जिस कार्यक्रम में उन्हें आमंत्रित किया जाना था, उसमें शामिल हो सकें। लेकिन उनकी दोनों कोशिशें नाकाम रहीं। अंतिम क्षणों में आयोजकों ने भी उन्हें कार्यक्रम में शामिल किए जाने से पल्ला झाड़ लिया। वहीं खेल मंत्री अजय माकन के घर के बाहर घंटो बैठे रहने के बावजूद उन्हें मिलने का समय नहीं दिया गया।
अरुणिमा के मुताबिक वह दिल्ली से लखनऊ जा रही थीं। कानपुर पहुंचने पर उनके किसी रिश्तेदार ने बांदा से बताया कि अमर उजाला में उनके संबंध में खबर छपी है। घटनाक्रम पढ़ने के बाद उन्होंने तुरंत वापस दिल्ली जाने की ठानी। यहां उन्होंने लोकसभा सचिवालय के कुछ अधिकारियों से बात की। इन अधिकारियों ने उनसे कहा कि वह उन्हें आमंत्रित करने की काफी कोशिशें करते रहे।
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लेकिन खेल मंत्रालय से पता नहीं मिलने के चलते ऐसा नहीं हो सका। लेकिन वह उन्हें अब कार्यक्रम में शामिल करने की कोशिश करेंगे। लेकिन बुधवार शाम तक यह कोशिशें बेकार गईं। उनसे कह दिया गया कि सुरक्षा कारणों के चलते अब उन्हें कार्यक्रम में शामिल करना संभव नहीं है। इसके बाद उन्होंने बृहस्पतिवार को खेल मंत्री से मिलने का निर्णय लिया। हालांकि उन्होंने बुधवार को ही उनके पीए से मिलने का समय ले लिया था।
लेकिन उनके आवास पर पहुंचने के बाद उन्हें घंटों वहां बैठना पड़ा। दोपहर बाद उन्होंने वहां से जाने का निर्णय लिया। वह खेल मंत्री से मिलकर यही कहना चाहती थीं कि जिस तरह उन्होंने उनका पहले साथ दिया है। उसी तरह मंत्रालय के जरिए उन्हें एक खिलाड़ी और पर्वतारोही का दर्जा दिया जाए। लेकिन उन्हें निराश होकर लखनऊ लौटना पड़ा।
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साथ ही लिंगभेद संवेदनशील संसद के जिस कार्यक्रम में उन्हें आमंत्रित किया जाना था, उसमें शामिल हो सकें। लेकिन उनकी दोनों कोशिशें नाकाम रहीं। अंतिम क्षणों में आयोजकों ने भी उन्हें कार्यक्रम में शामिल किए जाने से पल्ला झाड़ लिया। वहीं खेल मंत्री अजय माकन के घर के बाहर घंटो बैठे रहने के बावजूद उन्हें मिलने का समय नहीं दिया गया।
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अरुणिमा के मुताबिक वह दिल्ली से लखनऊ जा रही थीं। कानपुर पहुंचने पर उनके किसी रिश्तेदार ने बांदा से बताया कि अमर उजाला में उनके संबंध में खबर छपी है। घटनाक्रम पढ़ने के बाद उन्होंने तुरंत वापस दिल्ली जाने की ठानी। यहां उन्होंने लोकसभा सचिवालय के कुछ अधिकारियों से बात की। इन अधिकारियों ने उनसे कहा कि वह उन्हें आमंत्रित करने की काफी कोशिशें करते रहे।
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लेकिन खेल मंत्रालय से पता नहीं मिलने के चलते ऐसा नहीं हो सका। लेकिन वह उन्हें अब कार्यक्रम में शामिल करने की कोशिश करेंगे। लेकिन बुधवार शाम तक यह कोशिशें बेकार गईं। उनसे कह दिया गया कि सुरक्षा कारणों के चलते अब उन्हें कार्यक्रम में शामिल करना संभव नहीं है। इसके बाद उन्होंने बृहस्पतिवार को खेल मंत्री से मिलने का निर्णय लिया। हालांकि उन्होंने बुधवार को ही उनके पीए से मिलने का समय ले लिया था।
लेकिन उनके आवास पर पहुंचने के बाद उन्हें घंटों वहां बैठना पड़ा। दोपहर बाद उन्होंने वहां से जाने का निर्णय लिया। वह खेल मंत्री से मिलकर यही कहना चाहती थीं कि जिस तरह उन्होंने उनका पहले साथ दिया है। उसी तरह मंत्रालय के जरिए उन्हें एक खिलाड़ी और पर्वतारोही का दर्जा दिया जाए। लेकिन उन्हें निराश होकर लखनऊ लौटना पड़ा।