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सिर में चोट के बाद भी गोल्ड जीते अमित

Sat, 20 Apr 2013 10:40 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Sat, 20 Apr 2013 10:40 PM IST
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amit wins gold, three other indians bag a bronze each

पहलवान अमित कुमार जिस वक्त उत्तर कोरियाई क्योंग यांग के खिलाफ फाइनल में उतरने जा रहे थे, उस दौरान उन्हें सेमीफाइनल में सिर पर लगी चोट की चिंता नहीं थी।

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दिमाग में था तो सिर्फ लंदन ओलंपिक में अपनी असफलता को धोना और बड़े पहलवान सुशील कुमार, योगेश्वर दत्त की गैरमौजूदगी में कुछ कर गुजरने का दबाव।

पहले दौर में जब रेफरी ने बाउट रोककर अमित के सिर से बह रहा खून रोकने को कहा तो लगा कि गड़बड़ होने जा रही है, लेकिन इस पहलवान ने जबरदस्त रक्षण और अटैक का प्रदर्शन करते हुए एशियाई चैंपियनशिप का पहला स्वर्ण देश को दिलाया। इससे पहले चचेरी बहनें विनेश और बबिता ने कांस्य पदक जीते। 60 किलो में बजरंग ने भी कांस्य जीता।
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अमित ने अमर उजाला से कि कहा उनके गांव से काफी लोग यहां आए हैं। गांव वाले कहते थे कि लंदन में वह कुछ नहीं कर पाया। हालांकि यह पदक ओलंपिक की बराबरी नहीं कर सकता, लेकिन रियो ओलंपिक के लिए उनका हौसला बढ़ा है।
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इस सफलता का श्रेय वह कैंप में जार्जियाई पहलवानों के साथ ट्रेनिंग को देते हैं। हालांकि फाइनल से पहले अमित का हौसला डिगा हुआ था। उनका कहना है कि क्योंग यांग लंदन ओलंपिक का मेडलिस्ट है और वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी पदक जीत चुका है।

उन्हें लगा वह उन्हें हरा देगा लेकिन मैट पर कुछ सेकेंड बिताते ही उन्हें लग गया कि वह उसे हरा देंगे। उन्होंने पहला दौर 1-0 व दूसरे दौर 5-2 से जीता। इससे पहले कजाखस्तानी व जापानी पहलवान को हराने में उन्होंने एक अंक भी नहीं गंवाया। कोच विनोद कुमार का कहना है कि अमित और बजरंग दोनों ही ओलंपिक स्तर के पहलवान हैं। निकट भविष्य में ये दोनों बड़े परिणाम देंगे।

गीता की छोटी बहन व वर्ल्ड चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली बबिता को एशियाई चैंपियन जापानी पहलवान ने सेमीफाइनल में तीन दौर के कड़े संघर्ष में हराया। वह जीतने की स्थिति में थीं। लेकिन चूक गईं। यही कुछ उनकी चचेरी बहन विनेश के साथ हुआ।


दोनों ने कहा कि वह फाइनल में हो सकती थीं। लेकिन कांस्य से संतोष करना पड़ रहा है। बबिता ने रेपीचेज में मंगोलियाई व विनेश ने थाई पहलवान को आसानी से हराया। कोच ओपी यादव ने कहा कि नए नियमों के चलते कुछ नुकसान हुआ। वरना परिणाम कुछ और हो सकता था।

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