चौड़े सीने की चाहत है तो रोज करें ये 5 आसन
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जानिए ऐसे पांच योगासनों के बारे में, जिनके मदद से सीने की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और सीना अधिक चौड़ा लगता है।
त्रिकोणासन
इस आसन से सीने की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और शरीर लचीला बनता है। प्रतिदिन इसका तीन बार अभ्यास चौड़े सीने के लिए मददगार है।
दोनों पैरों के बीच तीन फुट का अंतर रखते हुए सीधे खड़े हो जाएं। दोनों हाथ पैरों के समानांतर सीधे फैलाएं।
अब दाएं पैर के पंजे को दाएं हाथ से आसे छूने का प्रयास करें कि बांया हाथ आसमान की ओर हो और उससे 90 डिग्री का कोण बनें। 15 से 20 सेकंड बाद सीधे हो जाएं।
अब यही प्रक्रिया बाएं हाथ और बाएं पैर से दोहराएं।
ताड़ासन
इसके नियमित अभ्यास से सीना चौड़ा होता है, बाजू मजबूत होते हैं और शरीर सुडौल होते हैं। प्रतिदिन इस आसन का चार से पांच बार अभ्यास फायदेमंद है।
इसे करने के लिए सीधे खड़े हो जाएं। दोनों हाथों को ऊपर की और ले जाएं, बाजू कान से सटें और हाथों की उंगलियां छत की ओर हों और नमस्कार की मुद्रा में जोड़ लें।
अब सांस खींचते हुए शरीर को ऊपर उठाएं व कुछ क्षण बाद सामान्य हो जाएं।
इसी तरह शरीर को पहले दाईं ओर झुकाएं व फिर सामान्य हों जाएं और बाईं ओर झुकाएं।
भुजंगासन
इस आसन का नियमित अभ्यास रीढ़ की हड्डी मजबूत बनाता है, सीने चौड़े करते है व बाजुओं को बल देता है। इसकी सही विधि है-
पेट के बल जमीन पर लेटें।
दोनों हाथों की कोहनी मोड़ें औप हथेलियों को कधें के बगल में जमीन पर रखें।
सांस अंदर की ओर खींचते हुए पेट से ऊपर का हिस्सा उठाएं और भार हथेलियों व कोहनी पर रहने दें।
इस दौरान बैक, जांघ और घुटनों को जमीन पर सीधा रहने दें।
कुछ सेकेंड बाद सांस छोड़ते हुए वापस पिछली मुद्रा में आएं।
ऊष्ट्रासन
इसे करने के लिए पहले घुटने के बल मैट पर बैठें और दोनों हाथों को सीधे नीचे की ओर रखें।
अब इसी मुद्रा में थोड़ा उठते हुए दोनों हाथों को पीछे एड़ी की ओर ले जाएं। इससे जांघों पर तनाव पड़े और पैरों का भार घुटनों पर हो।
सिर पीछे झुकाएं जिससे ठुड्डी आसमान की ओर हो।
इस दौरान कुछ क्षण गहरी सांस लें और फिर सामान्य मुद्रा में आ जाएं।
सूर्य नमस्कार
नियमित तौर पर सूर्य नमस्कार का अभ्यास चौड़े साने के लिए बेहद मददगार है। सूर्य नमस्कार के दौरान 12 आसन किए जाते हैं। इन्हें करने की प्रक्रिया इसप्रकार है।
(1) दोनों हाथों को जोड़कर सीधे खड़े हों।
(2) श्वास भरते हुए दोनों हाथों को कानों से सटाएं और हुए ऊपर की ओर तानकर भुजाओं और गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं।
(3) अब श्वास धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए आगे की ओर झुकें। हाथ गर्दन के साथ, कानों से सटे हुए नीचे जाकर पैरों के दाएं-बाएं पृथ्वी का स्पर्श करें। घुटने सीधे रहें।
(4) श्वास को भरते हुए बाएं पैर को पीछे की ओर ले जाएं। गर्दन को अब पीछे की ओर झुकाएं। इस स्थिति में कुछ समय रुकें।
(5) अब श्वास को धीरे-धीरे छोड़ते हुए दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं जिससे दोनों पैरों की एड़ियां मिली हुई हों। पीछे की ओर शरीर को खिंचाव दें।
(6) अब श्वास भरते हुए दंडवत लेट जाएं।
(7) अब सीने से ऊपर के भाग को ऊपर की ओर उठाएं जिससे शरीर में खिंचाव हो।
(8) फिर पीठ के हिस्से को ऊपर उठाएं। सिर धुका हुआ हो और शरीर का आकार पर्वत के समान हो।
(9) अब पुनः चौथी प्रक्रिया को दोहराएं यानी बाएं पैर को पीछे ले जाएं।
(10) अब तीसरी स्थिति को दोहराएं यानी श्वास धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए आगे की ओर झुकें। हाथ गर्दन के साथ, कानों से सटे हुए नीचे जाकर पैरों के दाएं-बाएं पृथ्वी का स्पर्श करें।
(11) श्वास भरते हुए दोनों हाथों को कानों से सटाएं और हुए ऊपर की ओर तानकर भुजाओं और गर्दन को पीछे की ओर झुकाएं।
(12) अब फिर से पहली स्थिति में आ जाएं।