अगर आप तनाव में रहते हैं तो, हर द‌िन 5 म‌िनट यह काम जरूर करें

ज्योत‌िर्मय Updated Thu, 23 Feb 2017 12:07 PM IST
yog dhyan and meditation benefits in life
ध्‍यान
भागम-भाग वाली आज की  जिaदगी और चारों तरफ से हावी होते तनावों के बीच ध्यान रोगों से लडने वाली प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है। यह बात कहीं और नहीं चीन में हुए एक अध्ययन साबित हुई है। अध्ययन का उद्देश्य यह जानना था कि जूनियर कालेज के विद्यार्थियों की शारीरिक व मानसिक सेहत पर ध्यान का क्या प्रभाव पड़ता है।

अनुसंधान में ताईवान के एक जूनियर कालेज के 242 विद्यार्थियों को शामिल किया गया था। इन्हें  दो समूहों में बांटा गया। एक समूह में 119 व दूसरे में 123 विद्यार्थी थे। अध्ययन की अवधि 18 हफ्तों की थी। हर समूह को प्रति सप्ताह 2 घंटों का ध्यान कराया गया। इस तरह उन्होंने कुल 36 घंटे ध्यान किया। इन विद्यार्थियों को एक  फार्म दिया गया जो उन्होंने परीक्षण से पहले व बाद में भरे। इसमें ऐसे सवाल थे जिनमें शारीरिक व मानसिक परेशानी तथा उनसे निपटने की सकारात्मक व नकारात्मक रणनीतियों के बारे में जानकारी मांगी गई थी।

जब विद्यार्थियों के शारीरिक व मानसिक व्यथा के परीक्षण पूर्व स्कोर देखे गए तो तो प्रयोगात्मक उपचार का प्रभाव अर्थपूर्ण रहा। जिस समूह को ध्यान की पारंपरिक पद्धति का अभ्यास कराया गया था। उसमें शामिल छात्रों के शरीर और मस्तिष्क में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ी  हुई पाई गई । दूसरे समूह के छात्रों की  शारीरिक व मानसिक क्षमता घटी हुई थी। ध्यान की जिस  विधि का उपयोग प्रयोग के दौरान किया गया था उसे चीन की बौद्ध परम्परा में अनापनासति कहते है। पाली भाषा के इस शब्द से सम्बोधित इस पद्धति में सांसों पर ध्यान केंदित किया जाता है।

अनापान प्रयोग के संयोजक और निर्देशक डा.कुंग शी का कहना है कि छात्रों के लिए  सिर्फ पाँच मिनट का ध्यान भी काफी है। ज्यादा किया जा सके तो और भी अच्छा। वैसे एक महीने बाद समय बढ़ा देना चाहिए। इस से अपने आपको  तनाव के अनुकूल बनने में मदद मिलती है। पूरे अभ्यास में कम से कम 40 मिनट यानी करीब दो घड़ी काफी है। यह अध्ययन पारंपरिक चीनी ज्ञान का भी समर्थन करती है जो सेहत को बेहतर बनाने के लिए ध्यान को प्रोत्साहित करता है।

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