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अपने आप से भागने के कारण है ये आदतें
अमर उजाला/ दिल्ली
Updated Thu, 14 Nov 2013 07:42 PM IST
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जन्म के बाद होश संभालते ही हर कोई मृत्यु के बारे में निश्चित रहता है पर ज्यादातर लोग उससे बचाव का रास्ता तलाशते हैं। पेंसिलवेनिया के दो मनोवैज्ञानिक कैथरीन रान और कैथलीन वोस का कहना इससे उलट है कि ज्यादातर लोग अपनी मौत का सरंजाम जुटाते हैं।
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वह नहीं आती है तो उसे आयोजित करते हैं। मरने या आत्महत्या का साहस नहीं करते इसलिए नशे और दूसरी आत्मघाती आदतों की गिरफ्त में आते हैं। इन आदतों की वजह जिंदगी या संसार से नफरत नहीं बल्कि वह जीने का कोई उद्देश्य या समझ की अनुपस्थिति है।
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कैथरीन रान और कैथलीन वोस नामक दो मनोविज्ञानियों ने हाल ही में एक पर्चा पेश किया जिसमें कहा है कि अगर आप वाकई में इसके बारे में सोचते हैं तो पाएंगे कि अगर उद्देश्य की कमी हो तो इच्छा शक्ति मुश्किल में भी डाल सकती है। इसका सार क्रिश्चियन साइंस मानीटर पत्रिका के दिसंबर 13 अंक में प्रकाशित हुआ है।
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अध्ययन में उक्त मनोवैज्ञानिकों ने कहा है कि पहली बार जब कोई बियर या शराब का घूंट या सिप लेता है तो उसका स्वाद असहनीय होता है। उस स्वाद के चलते कोई भी भला आदमी सोच सकता है कि इसे क्यों पिया जाए। पर जीवन को अर्थ देने वाली दैवीय आस्था का अभाव उस निरुद्देश्य जीवन को इस कदर आत्मघाती बना देता है कि सिगरेट, शराब या कोई भी घातक नशा उसे ललचाते हैं।
तलब काबू में नहीं रहती और जाने अनजाने व्यक्ति उस ओर सरकता खिसकता जाता है। मन:शास्त्रियों के अनुसार हम इच्छाशक्ति को एक संसाधन के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। फिर ऐसा क्यों होता है कि कोई इच्छा शक्ति का इस्तेमाल ऐसे काम में करें जो उसके लिए अच्छी नहीं है?
इस्कॉन से जुड़े मनोविज्ञानी ने करीब चालीस उदाहरणों से साबित किया है कि प्रतिभाशाली लोग अपनी योजनाओं और लक्ष्यों को तेजी से हासिल करते चलते हैं और जल्दी ही चुक जाते हैं। नए नए उद्देश्य चुनते जाने के बाद एक स्थिति ऐसी आती है कि सब कुछ व्यर्थ लगने लगता है। सार्थकता इसी में दिखाई देती है कि बड़े उद्देश्य चुने जाएं।
इस तरह के उद्देश्य अध्यात्म के मार्ग पर चलते हुए ही चुने जा सकते हैं। रान और वोस ने अपने अध्ययन में शामिल किए लोगों का जिक्र करते हुए कहा है कि अध्यात्म या परमात्मा के मार्ग पर चलने वाले लोगों में शराब सिगरेट और दूसरे नशों से विरति तो थी ही, जीवन के प्रति भी गहरा लगाव था। अध्ययन में किसी से भी इस सर्वे का उद्देश्य नहीं बताया गया था। आश्चर्य की बात तो यह कि किसी के मन में अपने आपको खत्म करने का कभी विचार नहीं आया।