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फर्टिलिटी बढ़ाने में मदद करेंगे ये तीन आसन
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 31 Jul 2013 12:22 PM IST
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घर में नन्हीं किलकारी गूंजे इसकी चाहत में आज नॉर्मल या सिजीरियन डिलिवरी से लेकर आईवीएफ जैसी तकनीक की मदद से उम्मीदों के रास्ते खुले हैं। लेकिन फिर भी फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं हमारी जीवनशैली में इस तरह घर कर गई हैं कि प्रजनन क्षमता को बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं।
ऐसे में योगासनों की मदद से न सिर्फ प्रजनन क्षमता बढ़ाई जा सकती है बल्कि फर्टिलिटी से जुड़े उपचार को और भी प्रभावी बनाया जा सकता है।
जानिए, ऐसे तीन योगासनों के बारे में जो फर्टिलिटी बढ़ाने में आपके लिए मददगार हो सकते हैं।
उत्तानासन
यह कमर के निचले हिस्से में रक्त संचार सही रखता है। इसे रोज चार से पांच बार जरूर करें।
इसे करने के लिए सीधे खड़े हो जाएं। अब सांस खींचते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर ले जाएं, बाजू कान से लगे होने चाहिए। सांस छोड़ते हुए दोनों हाथों को सामने फर्श की ओर झुकाएं और बिना घुटना मोड़े पैर के पंजे छूने का प्रयास करें।
वीरभद्रासन
यह शरीर को लचीला व मजबूत बनाता है, यूट्रस को मजबूत बनाता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है।
इसे करने के लिए पहले सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैरों के बीच में गैप बढ़ाएं। सांस खींचते हए दोनों हाथों को दोनों दिशाओं में अपने कंधों के समानांतर फैलाएं। अब गर्दन दाईं दिशा में ले जाएं और दाएं घुटने को मोड़ें (कम से कम 45 डिग्री का कोण घुटने से बनना चाहिए)। अब सांस छोड़ते हुए दोनों हाथों को नीचे लाएं।
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अपानासन
पेट और निचले हिस्से की मांसपेशियों के तनाव को कम करता है और शरीर का रक्त संचार बढ़ाता है।
इसे करने के लिए पहले पीठ के बल सीधे लेट जाएं। अब पैरों को घुटने से मोड़े और पंजों को जमीन पर रखें। अब दोनों हाथों से दोनों घुटनों को छूने की कोशिश करें, पैरों के पंजे जमीन से उठाएं। सांस लेते हुएं घुटनों को सीने से थोड़ा दूर करें और फिर सांस खींचते हुए घुटनों को सीने के नजदीक लाने की कोशिश करें। इसे रोज छह बार करें।
बेहतर होगा कि किसी कुशल योग प्रशिक्षक के परामर्श से इन योगासनों को करें।
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ऐसे में योगासनों की मदद से न सिर्फ प्रजनन क्षमता बढ़ाई जा सकती है बल्कि फर्टिलिटी से जुड़े उपचार को और भी प्रभावी बनाया जा सकता है।
जानिए, ऐसे तीन योगासनों के बारे में जो फर्टिलिटी बढ़ाने में आपके लिए मददगार हो सकते हैं।
उत्तानासन
यह कमर के निचले हिस्से में रक्त संचार सही रखता है। इसे रोज चार से पांच बार जरूर करें।
इसे करने के लिए सीधे खड़े हो जाएं। अब सांस खींचते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर ले जाएं, बाजू कान से लगे होने चाहिए। सांस छोड़ते हुए दोनों हाथों को सामने फर्श की ओर झुकाएं और बिना घुटना मोड़े पैर के पंजे छूने का प्रयास करें।
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वीरभद्रासन
यह शरीर को लचीला व मजबूत बनाता है, यूट्रस को मजबूत बनाता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है।
इसे करने के लिए पहले सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैरों के बीच में गैप बढ़ाएं। सांस खींचते हए दोनों हाथों को दोनों दिशाओं में अपने कंधों के समानांतर फैलाएं। अब गर्दन दाईं दिशा में ले जाएं और दाएं घुटने को मोड़ें (कम से कम 45 डिग्री का कोण घुटने से बनना चाहिए)। अब सांस छोड़ते हुए दोनों हाथों को नीचे लाएं।
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अपानासन
पेट और निचले हिस्से की मांसपेशियों के तनाव को कम करता है और शरीर का रक्त संचार बढ़ाता है।
इसे करने के लिए पहले पीठ के बल सीधे लेट जाएं। अब पैरों को घुटने से मोड़े और पंजों को जमीन पर रखें। अब दोनों हाथों से दोनों घुटनों को छूने की कोशिश करें, पैरों के पंजे जमीन से उठाएं। सांस लेते हुएं घुटनों को सीने से थोड़ा दूर करें और फिर सांस खींचते हुए घुटनों को सीने के नजदीक लाने की कोशिश करें। इसे रोज छह बार करें।
बेहतर होगा कि किसी कुशल योग प्रशिक्षक के परामर्श से इन योगासनों को करें।