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बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही क्यों पीएम मोदी कर रहे गुफा में साधना, ये हैं मौन से जुड़ी 8 खास बातें

धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 18 May 2019 06:21 PM IST
गुफा के अंदर ध्यान में बैठे पीएम मोदी
गुफा के अंदर ध्यान में बैठे पीएम मोदी - फोटो : एएनआई
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लोकसभा चुनाव 2019 का प्रचार खत्म हो चुका है। अब सभी को 23 मई के दिन चुनाव नतीजों का इंतजार है। पीएम मोदी ने चुनाव प्रचार खत्म करते ही उत्तराखंड स्थित बाबा केदारनाथ के दर्शन किए और दोपहर दो बजकर 45 मिनट पर ध्यान लगाने के लिए गुफा पहुंचे। जहां वह भगवा वस्त्र धारण कर साधना में लीन हो गए।
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भारत सदियों से ऋषि-मुनियों का देश रहा है। ये ऋषि-मुनि तप और साधना के लिए हमेशा से प्रकृति की गोद में बने गुफाओं में ही ध्यान लगाया करते रहे हैं। इस मौके पर आइए जानते हैं गुफा में मौन साधना करने के फायदे...

मौन साधना के फायदे
1- जिस प्रकार से थके हुए शरीर के लिए नींद लेना जरूरी होता है उसी तरह दिमाग की शक्ति को बल प्रदान करने के लिए मौन साधना जरूरी होता है। मौन साधना शक्ति के संचय का एक अनूठा तरीका होता है। मौन साधना से व्यक्ति को आध्यात्मिक दृष्टि से काफी फायदा और संपन्न बनाता है।

2- हम रोजमर्रा के जीवन में कई तरह की समस्याओं से जुझते रहते हैं जिसके कारण हम अपनी बोली से निरर्थक प्रयास करते रहते हैं। अनियंत्रित बोली से व्यक्ति को कई संकटों में फंसाती है। ऐसे में मौन ऐसा उपाय है जिससे आंतरिक जगत के साथ बाहरी दुनिया में भी मदद मिलती है। मौन साधना से मन की शक्ति बढ़ जाती है।

3- ध्यान, योग और मौन साधना से शरीर की तमाम तरह की बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है। इसके अलावा व्यक्ति लंबे समय तक ज्यादा सहज, सजग और तनाव रहित बना रहता है। इसके कारण कामकाज में होने वाली गलतियों को संभावना बहुत कम हो जाती है। अगर आपको लंबे समय तक तनाव से दूर रहना है, जीवन जीने में सहजता चाहिए तो मौन साधना बहुत उपयोगी साबित होता है।

4- सांसारिक दृष्टि से भी और आत्मिक दृष्टि से भी मौन एक महत्वपूर्ण साधना है। यह वह साधना है, जो चित्तवृत्तियों को बिखरने से बचाती है। चुप रहने से वाणी के साथ व्यय होने वाली मस्तिष्कीय शक्तियों की क्षति होने से बचत होती है।

5- जिस प्रकार शोरगुल वाले वातावरण में हम पास के शब्द भी नहीं सुन पाते, किन्तु शांत वातावरण में दूर-दूर की ध्वनियां भी आसानी से सुनी जा सकती है, उसी प्रकार अशान्त, उद्विग्न मन आत्मा की आवाज नहीं सुन पाता। दिव्यलोकों से हमारे लिए जो दिव्य आध्यात्मिक संदेश आते हैं, उन्हें सुनने के लिए मौन होने की आवश्यकता पड़ती है। 

6- लगातार बोलते रहने से वाणी की प्रभाव क्षमता क्षीण होती है। मौन साधना का महत्व महात्मा गांधी भी अच्छी तरह से जानते थे। वे अपना अधिक समय मौन में बिताते थे। उनके पास समय का बड़ा अभाव रहता था, तो भी वे सप्ताह में एक दिन मौनव्रत के लिए अवश्य निकाल लेते थे। उनका कहना था, कि मौन से मुझे बड़ा विश्राम मिलता है और कार्य करने के लिए नयी ताजगी का अनुभव होता है। उनके अनुसार, मौन एक ईश्वरीय अनुकंपा है, मौन के समय मुझे आन्तरिक आनन्द मिलता है।

7- अरुणाचल के महान संत महर्षि रमण के बारे में विख्यात है कि वे सदैव मौन रहते थे और मौन रहते हुए भी निकट आने वालों की शंकाओं का समाधान करते थे। मौन एक तरह का अनन्त भाषण हैं प्राचीनकाल के ऋषि अपने शिष्यों को मौन द्वारा ही उपदेश किया करते थे। इस अकेली मौन साधना से वे सब सिद्धियां मिल सकती है, जो अन्य कठिन योग-साधनाओं से मिल सकती है।

8- मौन एक तरह का अनन्त भाषण हैं प्राचीनकाल के ऋषि अपने शिष्यों को मौन द्वारा ही उपदेश किया करते थे। इस अकेली मौन साधना से वे सब सिद्धियां मिल सकती है, जो अन्य कठिन योग-साधनाओं से मिल सकती है।
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बुद्ध पूर्णिमा और पीएम मोदी की मौन साधना का संबंध

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