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रुद्राक्ष के इस गुण को जानकर आप हमेशा धारण करना चाहेंगे

Mon, 25 Aug 2014 07:45 AM IST
Updated Mon, 25 Aug 2014 07:45 AM IST
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original rudraksha benefits

साफ सुधरे पानी, दूध या द्रव्य में मलीनता तुरंत झलकती है। उनके गुणदोष पर प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ सकता है। लेकिन यही चीजें पहले से दूषित हो तो उन पर मलीनता का खास असर नहीं पड़ता। अपना आंतरिक स्तर ऊंचा उठाने की कोशिश में लगे साधकों का चित्त भी सामान्य लोगों की तुलना मे छोटी छोटी चीजों से प्रभावित होता है।

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जैसे उन्हें हर कहीं नींद नहीं आती, भोजन भी जिस तिस तरह का नहीं ले सकते, शुद्ध सात्विक आहार ही चाहिए, जिन लोगों के बीच उन्हें रहना हो उनमें भी कुछ खास तरह का आधारभूत विशेषताएं हों। ये विशेषताएं उनके गुण, स्वभाव और कर्म के आधार पर तय होती है। अगर साधक ने थोड़ी भी आध्यात्मिक साधना की हो।
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इसके व्यावहारिक पक्ष का अध्ययन करने में जुटे उपाध्याय अमर मुनि के अनुसार कदाचित इस तरह की अनुकूलताएं न मिलें तो ऐसे उपाय तलाशे और किए गए हैं कि उन्हें अपनाने पर प्रतिकूल स्थितियों से सुरक्षा होती है। इस तरह के उपायों में रुद्राक्ष का भी नाम है।

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रुद्राक्ष का सुरक्षा कवच

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साधकों की जीवनचर्या का आकलन और विश्लेषण बताता है कि रुद्राक्ष इन्हें प्रतिकूल या नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है। इस बीज में एक अनोखा स्पदंन पकड़ा गया है जो साधक के लिए एक सुरक्षा कवच बना देता है।

रुद्राक्ष के पेड़ पहाड़ी इलाकों में एक खास ऊंचाई पर, खासकर हिमालय और पश्चिमी घाट समेत कुछ और जगहों पर भी पाए जाते हैं। भारत में रुद्राक्ष के पेड़ की लकड़ियों का इस्तेमाल रेल की पटरी बनाने में होता रहा।

लिहाजा अपने यहां रुद्राक्ष के पेड़ बहुत कम बचे हैं। इन दिनों ज्यादातर रुद्राक्ष नेपाल, बर्मा, थाईलैंड या इंडोनेशिया से लाए जाते हैं। अमर मुनि के अनुसार इनकी गुणवत्ता भारत में मिलने वाले रुद्राक्ष की तुलना में कमतर है।साधु-संन्यासी के लिए और उनमे भी परिव्राजक जीवन जी रहे साधकों के लिए रुद्राक्ष बहुत सहायक होता है।

जहरीले पानी को पहचाने रुद्राक्ष

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रुद्राक्ष की शुद्धता परखने की एक विधि साधु सन्यासी जानते हैं। वे मानते हैं कि रूद्राक्ष को पानी के ऊपर रखा जाए तो वह खुद-ब-खुद घड़ी की दिशा में घूमने लगता है। अगर वह यों ही रखा रहे या डूब जाए को समझा जाता है कि असली नहीं है।

रुद्राक्ष की इस विशेषता से पानी की गुणवत्ता परखी जाती है। पानी पर रखने से वह अगर उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर नहीं घूमता तो मतलब है कि पानी साफ यानी पीने लायक है। अगर पानी जहरीला या हानि पहुंचाने वाला हुआ को तो रुद्राक्ष दक्षिण से उत्तर की ओर (घड़ी की दिशा से उलटा) घूमेगा।

रुद्राक्ष के लौकिक जीवन में और भी उपयोग हैं। साधु संन्यासियों के लिए वह बेहद काम का है। सामान्य लोगों के लिए भी उसकी उपयोगिता है। अमरमुनि के अनुसार नकारात्मक ऊर्जा से बचाव के और भी उपाय खोज लिए गए हैं, पर आध्यात्मिक उन्नति के मामले में रुद्राक्ष की टक्कर का एक भी नहीं है।


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