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कहीं, इच्छा शक्ति का ग़लत इस्तेमाल तो नहीं कर रहे
ज्योतिर्मय
Updated Mon, 15 Apr 2013 12:56 PM IST
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तरक्की या कामयाबी के लिए इच्छाशक्ति का मजबूत होना जरूरी है पर कभी कभी उसका कमजोर होना भी फायदेमंद होता है। कैथरीन रॉन और कैथलीन वोस नामक दो मनोविज्ञानियों ने हाल ही में एक शोधपत्र पढ़ा और कहा कि वाकई कभी कभी इच्छा शक्ति के कारण मुश्किल हो सकती है।
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जरा उस वक्त के बारे में सोचें जब आपने पहली बार बियर का सिप लिया था। कितना बुरा स्वाद था, है न? और धूम्रपान? कोई भी पहली सिगरेट का लुत्फ नहीं ले पाता- बड़ा अजीब सा स्वाद आता है, गला जलता सा लगने लगता है, खांसी आ जाती है और कभी कभी मतली भी आने लगती है।
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तो हालांकि सिगरेट या शराब आपको ललचा सकते हैं। इन के स्वाद को झेलने और पहली बार के बाद जारी रखने के लिए कुछ समय तो मन मारने या इच्छा शक्ति के इस्तेमाल की जरूरत पड़ती है।
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हम इच्छा शक्ति को एक संसाधन के तौर पर इस्तेमाल करते हैं ताकि हम वे चीजें कर सकें जो हम जानते हैं कि करनी चाहिए- वे चीजें तो हमारे लिए अच्छी हैं। तो ऐसा क्यों होता है कि कोई इच्छा शक्ति का इस्तेमाल ऐसे काम में करे जो उसके लिए अच्छी नहीं है?
जब हम अपनी स्वस्थ इच्छा से उबरने के लिए इच्छा शक्ति का प्रयोग करते हैं तो हम पारस्परिक फायदे हासिल करने के लिए ऐसा करते हैं जैसे कि दोस्ती गांठना और नकार दिए जाने से बचना; ऐसा करते हुए हम अपने भले को दरकिनार कर देते हैं।
याद रहे आत्मनियंत्रण या संयम या इच्छाशक्ति मात्र एक औजार है जो हमारे लिए मददगार भी हो सकता है और हमें हानि भी पहुंचा सकता है। प्रसन्नता के साथ उत्पादक जीवन जीने के लिए हमें सिर्फ आत्मनियंत्रण का विकास या इच्छाशक्ति की ताकत की जरूरत नहीं है बल्कि ज्ञान भी विकसित करना चाहिए ताकि हम सही निर्णय कर सकें कब और कहां इस शक्ति को अमल में लाना है।