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भाग्यवादी होना भी लाभप्रद है
ज्योतिर्मय
Updated Fri, 22 Mar 2013 01:21 PM IST
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एक हद तक भाग्यवादी होना व्यक्ति को आत्मविश्वासी भी बनाता है। भाग्य में यकीन रखने वाले लोग कई बार उन लोगों की तुलना में तो ज्यादा ही हिम्मती होते है जो सिर्फ और सिर्फ कर्म पर विश्वास करते है।
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सैद्धांतिक तौर पर यह विश्वास भले ही गलत और अकर्मण्य बनाने वाला दिखे लेकिन डिस्कवरी न्यूज़ की खबर के अनुसार जो लोग "अच्छे नसीब" और भाग्यशाली चीजों" पर यकीन रखते हैं वे अन्य लोगों की तुलना में जिंदगी की कठिनाइयों का ज्यादा आसानी से मुकाबला कर लेते है।
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यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोन के शोधकर्ताओं ने भाग्य में यकीन रखने और उसे नहीं मानने वालों का एक सर्वे के बाद इस बात की पुष्टि की। शोधकर्ताओं का उद्देश्य यह जानना था कि क्या "अच्छे भाग्य" पर विश्वास करने वाले लोग अकस्मात दिककत में आने या संकटॉ से घिर जाने पर कैसा महसूस करते है?
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इस के लिए कुछ ऐसे लोगों को भी चुना गया जो भाग्य पर यकीन रखते थे। ये लोग या तो अपना "लकी चार्म" या भाग्यशाली वस्तु साथ लेकर आए थे या फिर शोधकर्ताओं ने उनको खाने-पीने या उपयोग की ऐसी चीजें दी थी जो उनके हिसाब से शुभ थी। इसके अलावा इन लोगों को यह भी कहा गया था कि आज उनका भाग्यशाली दिन है और वे जो भी करेंगे उसमें सफलता प्राप्त होगी।
शोध से पता चला कि जिन्हें अच्छे भाग्य से संबंधित प्रोत्साहन दिया गया था उन्होंने औरों की अपेक्षा अधिक तेजी से और बेहतर काम किया । उन्होंने गाड़ी को जल्दी ठीक कर लिया, पहेलियाँ भी तेजी से सुलझा दी, उनकी याददाश्त भी बेहतर थी और उन्होंने गोल्फ के खेल में भी एकाग्रता का अच्छा प्रदर्शन किया।
दरअसल "अच्छे भाग्य" का प्रोत्साहन उनके अंदर के आत्मविश्वास को इतना बढ़ा देता है कि इससे उन्हें सुखद एहसास होने लगता है, उनकी एकाग्रता बढ जाती है, काम में फूर्ती आ जाती है और इससे उनका प्रदर्शन भी सुधर जाता है।
शोधकर्ता मनोविज्ञानियों का कहना था कि अकेले कर्म में विश्वास करने वाले इन भाग्यवादियों या अंधविश्वासी व्यक्तियों की तुलना में जल्दी हौसला खोते देखे गए। हो सकता है कि लंबे अभियानों या योजनाओं में कर्मवाद भाग्य की तुलना में ज्यादा मददगार साबित होता हो पर रोजमर्रा की जिंदगी में छोटे मोटे अंधविश्वास ज्यादा कारगर दीखते है। कम से कम शोध तो यही कहती है।