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आप भी मानेंगे, इसलिए काम के बीच चाय और आराम जरुरी है
संकलित/अमर उजाला, दिल्ली।
Updated Thu, 23 Jun 2016 11:33 AM IST
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चाय
एक नवयुवक और कुछ बुजुर्ग लकड़हारे जंगल में पेड़ काट रहे थे। युवक बहुत मेहनती था। वह बिना रुके लगातार काम कर रहा था। बाकी लकड़हारे कुछ देर काम करने के बाद थोड़ी देर सुस्ताते और बात करते थे। यह देखकर युवक को लगता था कि वे समय की बर्बादी कर रहे हैं। जैसे-जैसे दिन बीतता गया, युवक ने देखा कि बाकी लकड़हारे उसकी तुलना में अधिक पेड़ काट पा रहे थे, जबकि वे बीच-बीच में काम रोक भी देते थे। यह देखकर युवक ने और अधिक तेजी से काम करना शुरू कर दिया, लेकिन वह अब भी दूसरों की तुलना में कम ही लकड़ी काट पा रहा था।
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अगले दिन उम्रदराज लकड़हारों ने युवक को काम के बीच में अपने पास चाय पीने के लिए बुलाया। युवक ने उन्हें यह कहकर मना कर दिया कि इससे समय व्यर्थ होगा। एक बूढ़े लकड़हारे ने मुस्कराते हुए लड़के से कहा, “तुम लंबे समय से अपनी कुल्हाड़ी में धार किए बिना लकड़ी काटने की कोशिश कर रहे हो और तुम्हारी सारी मेहनत बेकार जा रही है। कुछ समय के बाद तुम्हारी सारी शक्ति चुक जाएगी और तुम्हें काम बंद करना पड़ेगा।”
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युवक को यह एहसास हुआ कि आराम करने के दौरान बाकी लकड़हारे चाय पीने और गपशप करने के साथ अपनी कुल्हाड़ियों को धार भी देते थे। वे वाकई अक्लमंद थे। उनकी कुल्हाड़ियां लकड़ी तो बेहतर काट पा रही थीं।
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बूढ़े लकड़हारे ने युवक को हिदायत देते हुए कहा, “हमें अपनी बुद्धि का इस्तेमाल कर अपना कौशल और क्षमता बढ़ाते रहना चाहिए। तभी हमें अपनी पसंद के दूसरे काम करने के लिए समय मिल पाएगा। पर्याप्त विश्राम के बिना कोई भी अपना काम कुशलतापूर्वक नहीं कर सकता। कुछ समय के लिए काम रोककर आराम करने से शक्ति का संचार होता है और अन्य किसी दृष्टिकोण से अपने कार्य का आकलन करके रणनीति बनाने का अवसर मिलता है।