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श्राद्ध में दान के समय इन बातों का ध्यान पितरों को प्रसन्न देता है
सुलोचना पयाल
Updated Sat, 10 Oct 2015 01:06 PM IST
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श्राद्ध में ध्यान देने योग्य बात यह है कि जिस व्यक्ति विशेष को आप जो वस्तुएं दान के रूप में दे रहे हैं, वह शीघ्र ही उनके काम आने वाली हों, उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाली हों, तभी श्राद्ध सार्थक होता है। ऐसा नहीं कि व्यर्थ की चीजें दान में देकर दान दक्षिणा की पूर्ति कर दी और वह चीजें न अपना काम की थीं और न ही जिसे दान में दी गई हों उनके काम आने वाली हों।
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यह श्राद्ध-दान नहीं, अश्रद्धा दान होगा और समग्र श्राद्ध फल को व्यर्थ कर देगा। यह बात युक्ति संगत नहीं है कि यदि किसी वृद्ध या वृद्धा की मृत्यु हुई हो, तो वृद्धा या वृद्धाओं का ही भोजन कराया जाय या दान दिया जाए या विधवा के स्वर्गवास होने पर विधवाओं को ही दान दिया जाए। आवश्यकता को देखकर ही दान की महत्ता और लाभ सिद्ध होता है। भोजन कराते समय निर्धन विद्यार्थियों की फीस आदि के लिए भी ध्यान रखना चाहिए।
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पितरों के लिए दिए गए दान द्वारा उनके जीवन का उत्थान होगा, तो उनकी अन्तरात्मा से आपके पितरों के प्रति शांतिदायक सत्प्रेरणाएं मिलेंगी। इसी प्रकार से सत्कार्यों में योग देने के लिए दान के अन्य उपाय भी सोचे जा सकते हैं। सभी श्रेष्ठ सदाचारी और सदा उपकार करने वाले पुरुष को पितृगण कहते हैं। श्राद्ध से पितृगण सन्तुष्ट होते हुए अपना आशीर्वाद देते हैं, जिससे श्रद्धालु का कल्याण होता है। शरीर को जन्म देने वाले और मनुष्य को ज्ञान प्रदान करने वाले पितृगण हमेशा वंदना करने योग्य हैं।