{"_id":"9b85bd97fe5474a4359256baad9fb3ea","slug":"real-knowledge-life-gita-krishna","type":"story","status":"publish","title_hn":"महाज्ञानी बनना है तो इस रहस्य को समझ लें","category":{"title":"Wellness","title_hn":"पॉज़िटिव लाइफ़","slug":"wellness"}}
महाज्ञानी बनना है तो इस रहस्य को समझ लें
टीम डिजिटल
Updated Thu, 05 Dec 2013 04:02 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संसार में किसी से भी कह दें कि तुम अज्ञानी हो तो वह आपको मारने-पीटने के लिए दौड़ेगा। कारण यह है कि कोई भी अपने आपको अज्ञानी मानने को तैयार नहीं होता।
विज्ञापन
जबकि सच तो यह है कि बड़ी-बड़ी उपाधियां और डिग्रियां लेकर ऊंचे पदों पर काम करने वाले व्यक्ति भी महाअज्ञानी होते हैं।
पढ़ें, श्री कृष्ण के परम धाम का नजारा कैसा है
विज्ञापन
यह बात आपको थोड़ी बुरी लग सकती है लेकिन, श्री कृष्ण ने जो बातें गीता में बताई है उसके अनुसार दैनिक जीवन की घटनाओं पर विचार करेंगे तो आप स्वयं मानेंगे कि वास्तव में हम सभी महाअज्ञानी हैं।
विज्ञापन
श्री कृष्ण कहते हैं 'य एनं बेत्ति हन्तारं यश्चैनं मन्यते हतम्। उभौ तौ न विजानीतो नायं हन्ति न हन्यते।।'
यानी जो इस आत्मा को मारने वाला समझता है तथा जो इसे मरा हुआ समझता है वे दोनों ही अज्ञानी हैं, क्योंकि आत्मा न तो मरता है और न मारा जाता है।
आत्मा के लिए किसी भी काल में न तो जन्म है न मृत्यु। वह न तो कभी जन्मा है, न जन्म लेता है और न जन्म लेगा। वह अजन्मा, नित्य, शाश्वत तथा पुरातन है। शरीर के मारे जाने पर भी वह मारा नहीं जाता है।
पढ़ें,केतु रत्न लहसुनियां धारण करने से पहले जानें जरूरी बातें
फिर भी आप देखते होंगे कि किसी के परिवार में कोई परलोक सिधार जाता है तब परिजन दहारें मार-मारकर रोने लगते हैं। मृत्यु के शोक में दुःखी होकर जाने वाले को याद करते रहते हैं।
जबकि यह तय है कि जो शरीर में मौजूद आत्मा है वह पुनः अपने कर्म के अनुसार शरीर ग्रहण करके पृथ्वी पर वापस आएगा अथवा पुण्य कर्मों से परमधाम में सभी सुख प्राप्त करेगा। जो इस सत्य को जानकर शोक और दुःख पर विजय प्राप्त कर लेता है वह महाज्ञानी बन जाता है, यह श्री कृष्ण का कथन है।