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हंसने का का सही समय और फायदा भी जानिए
सुधांशु जी महाराज/अध्यात्मिक गुरु
Updated Mon, 24 Mar 2014 09:41 AM IST
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मानव जीवन में प्रसन्नता का बहुत बड़ा महत्व है। रंजोगम के वातावरण में जीवन व्यतीत करना पाप करने के समान है। क्योंकि हर स्थिति और हर हाल में रखने वाला तो परमपिता परमात्मा ही है।
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जब इंसान संकट की घडि़यों में भी प्रसन्न रहता है, हंसता-मुस्कराता है तो समझना कि वह ईश्वरीय आज्ञा का पालन कर रहा है, दुःख-दर्द में भी मिठास का अनुभव कर रहा है।
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चीन में च्यांग नाम के एक बहुत बड़े दार्शनिक हुए। एक बार अकस्मात किसी दुर्घटना का शिकार होकर उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। चीन के सम्राट को जब यह सूचना मिली तब उन्होंने विचार किया कि मुझे दार्शनिक संत का हाल जानने के लिए अस्पताल जाना चाहिए और वे स्वयं वहां पहुंचे।
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सम्राट ने देखा कि महान दार्शनिक च्यांग के पूरे चेहरे पर पट्टियां बंधी हुई हैं। सम्राट ने च्यांग से सहज भाव से पूछा आपको दर्द तो बहुत ज्यादा होता होगा? च्यांग ने सरलता से उत्तर देते हुए कहा हां सम्राट महोदय! बहुत दर्द होता है, जब मैं हंसता हूं, मुस्कराता हूं।
सम्राट आश्चर्यचकित हो गए और सोचने लगे कि इतनी भयंकर दुर्घटना के बाद भी हंसने-मुस्कराने का क्या कारण है? आखिर उन्होंने उससे पूछ ही लिया। च्यांग ने कहा महाराज! मुस्कराने का यह सबसे उत्तम अवसर है। यदि दुःख और पीड़ा के इन क्षणों में मैं नहीं मुस्कराया तो शेष साधरण समय में हंसने-मुस्कराने का क्या अर्थ रह जाएगा?
वस्तुतः हास-परिहास का मानव जीवन में बहुत महत्व होता है। मुस्कराहट से मनुष्य की आन्तरिक प्रसन्नता प्रकट होती है। वैसे तो हम सभी मुस्कराते हैं लेकिन दुःख-दर्द में आई मुस्कराहट शिशु-सी निश्छल होती है।
बच्चा बिना कारण भी मुस्कराता है, हंसता है। ऐसी स्थिति दुर्लभ है, अमूल्य है, परंतु जिसने उसे पा लिया, मानो उसने जीवन के सत्य को ही पा लिया हो। प्रसन्नता जीवन का परमसत्य है।