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अगर आप भी बुरी आदतों के गिरफ्त में हैं तो ध्यान दें...
अध्यात्मिक गुरू/ परमहंस योगानंद
Updated Sat, 04 Jan 2014 09:32 PM IST
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जब कोई बुरी आदतें आपके मन में पक्की बैठ जाती है, और आप उसे बदलना चाहते हैं तो आपकी अपनी प्रबल इच्छाशक्ति से उसे चूर-चूर करना होगा। तब उसे नए अच्छे कार्यों में लगाना होगा। जिसने नई अच्छी आदतों का निर्माण हो सके। प्रबल इच्छाशक्ति का अर्थ है दृढ़ आत्मविश्वास। जिस क्षण आप अपने अंतःकरण में कहते हैं कि मैं इस आदत से बंधा हुआ नहीं हूं, उसी क्षण वह आदत नष्ट हो जाएगी।
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आप अपने अंतर में झांको और अपनी प्रमुख विशेषताओं को पहचानो। कुछ लोगों को लिखना अच्छा लगता है तो कुछ लोगों को संगीत की धुनें बनाना। कुछ अन्य लोगों को आर्थिक और वित्तीय कार्यों में आनंद आता है। दुर्भाग्यवश, कुछ लोगों को गपशप और दूसरों की निंदा में मजा आता है।
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आपमें जो कुछ भी अच्छा हो उसे बदलने का प्रयास मत कीजिए। लेकिन जो काम आप अपनी आंतरिक इच्छा के विरुद्ध करके हैं या करने के बाद दुखी होते हैं, उनसे आपको अपना पीछा छुड़ाना होगा। लेकिन कैसे? आंतरिक आत्मविश्वास के साथ मन ही मन कहें, मैं बदल सकता हूं। बदलने के लिए आवश्यक इच्छाशक्ति मुझ में है। मैं बदल कर रहूंगा। इस विचार को दिन भर मन में रखें।
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उसे अपने साथ निद्रा के अवचेतन प्रदेश में ले जाएं। ध्यान के अधिचेतन प्रदेश में भी। उदाहरण के लिए आपकी समस्या यह है कि आपको बार बार गुस्सा आया है और शांत होने के पश्चात आपको इस बारे में बुरा भी बहुत लगता है। तो प्रत्येक दिन सुबह और शाम को गुस्सा न आने देने का दृढ़ निश्चय करें। पहला दिन कुछ मुश्किल प्रतीत होगा पर दूसरा दिन उससे थोड़ा आसान लगेगा।
तीसरा दिन उससे भी आसान होगा। कुछ दिन इस तरह बीतने के बाद आपको विजय संभव प्रतीत होगी। यदि आप यह प्रयास जारी रखे तो एक साल के भीतर हो तो आप बदले हुए इंसान होंगे।
बचपन में किसी भी अन्याय पर मुझे बहुत गुस्सा आता था। एक दिन मैंने देखा कि यह तो मूर्खता है। मैं अपने गुस्से को प्रदर्शित कर एक मिनट में संसार को तो नहीं बदल सकता। मैंने दोनों हाथ उठा कर प्रतिज्ञा की अब मैं कभी गुस्सा नहीं करूंगा। तब से मुझे अंदर से कभी गुस्सा नहीं आया। जबकि आवश्यकता पड़ने पर मैं बाहरी रूप से गुस्सा प्रदर्शित कर सकता हूं।