इसलिए ऋषियों ने नवरात्र में व्रत करने का नियम बनाया
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आपने देखा होगा कि नवरात्र के दिनों में बहुत से लोग व्रत और उपवास रखते हैं। इसके पीछे आमतौर पर धार्मिक कारण माना जाता है। लेकिन धर्मिक कारण ही नहीं इसका एक बड़ा वैज्ञानिक कारण भी है।
इसलिए ऋषियों ने बनाए हैं व्रत के नियम
आश्विन और चैत्र के उजले पखवाड़े की पहली तिथि को नवरात्र शुरू होता हैं। नवरात्र के नौ दिनों में पूजा पाठ जप तप, उपवास आदि का सिलसिला धर्म कर्म से जोड़ा गया है।
प्रो. गेराल्ड के अनुसार भारत ही नहीं दुनिया भर में इन तारीखों में कुदरत अपने रंग बदलती है। प्राचीन ऋषि मुनि इस बात का समझते थे।
इसलिए भारत में इन बदलाव से तालमेल बिठाने के लिए शरीर और मन को साधने का एक व्यवस्थित अभ्यास तय किया गया। आहार व्यवहार का संयम और जप ध्यान इसी निर्धारण का हिस्सा है।
इन दिनों शरीर ही नहीं मन भी प्रभावित होता है
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो साइंस के डॉ जी एस बर्नी का कहना है कि अभ्यास के साथ समय का भी बहुत महत्व है। इनके तालमेल से स्वास्थ्य पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है।
इस लिहाज से पूरे साल जो अभ्यास किए जाते हैं, उनकी तुलना में आश्विन और चैत्र के महीनों में इन अभ्यासों का ज्यादा प्रभाव देखा गया है। डॉ बर्नी यह भी कहते हैं कि अभ्यास अगर नए चंद्रमा के हिसाब से शुरू किया जाए तो शरीर ही नहीं मन भी प्रभावित होता है।