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ऐसे लोग नर्क में जाकर भोगते हैं अपने कर्मों की सजा

Tue, 29 Jul 2014 03:17 PM IST
राकेश झा/टीम डिजिटल
राकेश झा/टीम डिजिटल Updated Tue, 29 Jul 2014 03:17 PM IST
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kabir vani on kalyug nark swarg

शास्त्रों में बताया गया है कि देह त्याग करने के बाद जीव अपने कर्मों के अनुसार स्वर्ग में स्थान पाता है या फिर नर्क में जाता है। स्वर्ग वह स्थान है जहां हर प्रकार की सुख सुविधाएं मौजूद हैं। इसके विपरीत नर्क ऐसा स्थान है जहां कष्ट ही कष्ट है। यहां जीवात्मा को कई तरह की यातनाएं दी जाती हैं।

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अगर आपके मन में यह सवाल आ रहा है कि आखिर नर्क किसे जाना पड़ता है तो इसका उत्तर कबीर दास जी ने अपने दोहो में दिया है। कबीर नारी प्रीति से केते गए गड़न्त। केते और हाहिंगे, नरक हसन्त हसन्त।। यानी कबीर दास जी कहते हैं स्त्रीभोग में आसक्त होकर कितने ही लोग नर्क चले गए। और न जाने कितने लोग अभी और नर्क जाएंगे।
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आगे कबीर दास जी कहते हैं संसार में कामासक्त स्त्री काली नागिन के समान है जो भोगों की इच्छा रखने वाले कामी पुरुषों के पुण्य कर्मों को खा जाती है और नरक का राह दिखाती है। इनसे बचने का एक मात्र उपाय है राम की शरण में चले जाएं।

संसार से मुक्ति और नर्क में जाने से बचने के लिए कबीरदास जी ने कलियुग में जीने वाले मनुष्य को यह समझाया है कि 'कलि मॅंह कनक कामिनी, ये दो बड़ फंद। इन ते जो न बॅंधावही, तिनका हूं मैं बंद।।' यानी कलियुग में कनक यानी सोना और कामिनी यानी कामासक्त स्त्री ये दो बड़े बंधन हैं। जो इन बंधनों से बच जाते हैं वह नर्क जाने से बच जाते हैं। इसलिए कबीर दास जी कते हैं ऐसे जो मनुष्य हैं मैं उनका भक्त हूं।

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