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कलियुग में जिसे मां काली ने अपनी गोद में बैठाया
राकेश झा/ अमर उजाला, दिल्ली।
Updated Mon, 03 Mar 2014 08:32 AM IST
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कलियुग में देवी-देवताओं के मंदिर और मूर्तियां तो बहुत दिख जाती हैं लेकिन कोई यह नहीं कह सकता कि उन्हें साक्षात् देवी देवताओं ने दर्शन दिए हैं।
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लेकिन कलियुग में एक व्यक्ति ऐसे हुए हैं जिसे मां काली ने दर्शन दिए और अंतिम समय में मां की गोद में ही इन्होंने शरीर त्याग कर दिया। ऐसे ही महान भक्त थे स्वामी रामकृष्ण परमहंस।
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इस वर्ष इनका जन्मदिन 3 मार्च को मनाया जा रहा है। इनके विषय में कथा है कि इन्हें साक्षात् मां काली के दर्शन होते थे। एक बार विवेकानंद ने इनसे पूछा कि क्या आपने ईश्वर के दर्शन किए हैं। इसके जवाब में रामकृष्ण ने कहा कि हां मैंने ईश्वर को देखा है, इतना ही साफ-साफ जैसे मैं तुम्हें देख रहा हूं।
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एक बार की बात है रामकृष्ण मां काली के लिए प्रसाद लेकर मंदिर आ रहे थे। इन्होंने देखा कि एक बिल्ली भूख से व्याकुल हो रही थी। इन्होंने मां का प्रसाद बल्ली को खिला दिया। इससे मंदिर के दूसरे लोग नाराज होने लगे।
रामकृष्ण ने कहा कि मुझे बिल्ली में भी मां काली के दर्शन हो रहे थे। इसलिए मैंने मां को वहीं प्रसाद अर्पित कर दिया। रामकृष्ण परमहंस की इन बातों को सुनकर सभी हैरान रह गए।
कहते हैं अंतिम समय में जब यह समाधि में लीन हुए तब मां काली ने इन्हें अपनी गोद में बैठा लिया था। मां काली की गोद में ही इन्होंने अपने शरीर का त्याग किया।