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खड़े होकर नहीं, बैठकर ही भोजन क्यों करना चाहिए?
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sun, 29 Sep 2013 09:35 AM IST
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भारतीय परंपरा में नियम है कि भोजन करते समय बैठकर इत्मिनान से खाने का आनंद लें। लेकिन पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव के कारण आज कल टेबल कुर्सी पर बैठकर खाने का प्रचलन बढ गया है। कई ऑफिस और होटलों में लोग खड़े होकर भी खाना खाते हैं। अगर आप भी इस तरह से भोजन कर रहे हैं तो समझ लीजिए यह आपके लिए कई मायने में नुकसानदेय हो सकता है।
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शास्त्रों में बताया गया है कि भोजन सिर्फ पेट भरने का साधन मात्र नहीं है। हिन्दू धर्म में अन्न को देवी अन्नपूर्णा का प्रसाद माना गया है। इसलिए भोजन के समय उसी प्रकार बैठना चाहिए जिस प्रकार पूजा करते समय ध्यान लगाकर बैठते हैं। पैर फैलाकर या खड़े होकर भोजन करने पर एवं भोजन के समय बात करने पर देवी अन्नपूर्ण नाराज होती हैं।
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इससे भोजन शरीर में लगता नहीं है। इसका परिणाम अपच, मोटापा, पेट संबंधी अन्य रोग तथा वीर्य की हानि होती है। विज्ञान भी इस बात को स्वीकार करता है कि बैठकर विशेष तौर पर पलथी लगाकर भोजन करना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।
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क्योंकि इससे भोजन के समय शरीर में सुचारू रूप से रक्त संचार होता है और मानसिक शांति की अनुभूति होती है। भोजन पचने में आसानी होती है। स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं से बचाव होता है।