सीख: कठिन से कठिन काम सच्चे लगन से ही पूरा होता है
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टीचर हर रोज बच्चों को कुछ बेहतरीन पाठ पढ़ातीं थीं। एक दिन वह जब क्लास में घुसीं, तो उनके हाथ में दो गुब्बारे थे। एक था लाल गुब्बारा, जिसमें हीलियम भरी थी, और एक था पीला गुब्बारा, जिसको किसी ने फूंक मार कर फुलाया था। क्लास में आते ही उन्होंने बच्चों से पूछा, यह क्या है। बच्चों ने जवाब दिया, यह गुब्बारा है। टीचर ने फिर पूछा, इससे क्या सीख मिलती है। सभी बच्चे सोच में पड़ गए। वह बोलीं, इन गुब्बारों में खुद को देखो, तुम्हें पता चल जाएगा कि तुम सफल कैसे हो सकते हो। एक बच्चे ने पूछा, लेकिन वह कैसे। टीचर बोलीं, देखो इसमें से जो लाल गुब्बारा है, उसे कुछ और नहीं पता, बस इतना पता है कि मुझे ऊपर जाना है। कैसे भी कोशिश कर लो, चाहो तो जबर्दस्ती नीचे भी खींच लो, लेकिन फिर भी वह जाएगा ऊपर ही। और दूसरा गुब्बारा ऐसा है कि उसे ऊपर भेजने के लिए जितना भी प्रयास कर लो, वह आएगा नीचे ही।
हम सब की प्रकृति भी इन गुब्बारों की तरह होती है। कुछ होते हैं, जो कैसी भी परिस्थिति में रहें, उनके अंदर लगन होती है कुछ कर दिखाने की, और वह ऊपर ही ऊपर बढ़ते जाते हैं। वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे भी होते हैं, जो हर अवसर को भी चुनौती बना देते हैं। उनका काम ही होता है नकारात्मक सोचना और गलतियों या फिर कमियों को देखना। एक बच्चे ने पूछा, हम भी सफलता प्राप्त करना चाहते हैं, लेकिन ऐसा करने के लिए हम क्या करें, कौन सा रास्ता चुने, क्या सही है और क्या गलत इसका फैसला कैसे करें। टीचर बोलीं, एक काम करना, आज घर जाना, गैस जलाना और उस पर अपना हाथ रख देना। बच्चे ने कहा, उससे तो हम जल जाएंगे। टीचर बोलीं, हां, क्या तब भी तुम्हंे पूछने की जरूरत पड़ेगी कि क्या करना है। बच्चे हैरान होकर टीचर को देखने लगे। वह बोलीं, लगन आपके अंदर होती है। सफलता का कोई नियम नहीं होता। अगर आग अंदर है, तो आपको करना क्या है यह खुद-ब-खुद आपको पता चल जाएगा।