सीख: रोज बदलती परिस्थितियां हमें पहले से और बेहतर बनाती है

अमर उजाला संपादकीय डेस्क Updated Tue, 10 Apr 2018 05:58 PM IST
different circumstances make us better
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मिहिरा एक बड़ी आईटी कंपनी में काम करती थी। एक दिन वह घर लौटी, तो बहुत गुस्से में थी। मां ने उसे समझाने की कोशिश की, पर मिहिरा ने जैसे तय कर लिया था कि वह अब वहां काम नहीं करेगी। वह मां से बोली, मैं ऐसी कंपनी में नौकरी नहीं करूंगी, जहां रोज इतनी कठिनाइयों का सामना करना पड़े। मेरे बॉस सारा काम मेरे सिर पर ही लाद देते हैं। मां मुस्करा कर बोलीं, बेटा, तुम्हें जो ठीक लगे, वही करना।
अगले दिन शाम को मां मानसिक रूप से तैयार थी कि मिहिरा नौकरी छोड़कर आ रही होगी। पर मिहिरा उस दिन हंसते हुए वापस लौटी। मां ने पूछा, क्या तुमने नौकरी छोड़ दी? मिहिरा बोली, नहीं मां। मां ने पूछा, क्यों? तुम तो कह रही थी कि नौकरी छोड़ दूंगी? मिहिरा मुस्कराकर कहने लगी, मां, आज मुझे ज्यादा काम करने की एक वजह मिल गई। आज मैं जब ऑफिस पहुंची, तो मैंने एक शख्स को बस से उतरते देखा। वह बैसाखियों की मदद से चल रहा था, लेकिन उसने किसी व्यक्ति की मदद नहीं ली।

वह अपने दम पर ऑफिस में घुसा। मैंने देखा कि उसकी कोहनी थी ही नहीं। उसकी रीढ़ की हड्डी भी कुछ अजब ही आकार की थी, कहीं बहुत चौड़ी और कहीं एकदम पतली। जब वह शख्स सीढ़ियां चढ़कर जाने लगा, तो मैं हैरान रह गई। मैंने झट से आगे बढ़कर उसे पकड़ना चाहा कि कहीं वह गिर न जाए। लेकिन उसने कहा, माफ कीजिएगा, मैं खुद चढ़ लूंगा, मुझे मदद की जरूरत नहीं। मैंने कहा, आप रोज ऐसे ही सीढ़ियां चढ़ते हैं? वह बोला, मुझे खुद पर गर्व है, क्योंकि ऊपर वाले ने मुझे औरों से थोड़ा ज्यादा ताकतवर बनाया है, ताकि मैं औरों से थोड़ा ज्यादा काम कर सकूं।

मिहिरा बोली, मां मुझे उस वक्त यह एहसास हुआ कि मैं वह सारा काम करने में सक्षम हूं, तभी तो मुझे वह काम दिया गया है। मैं दूसरों से बराबरी करके या सहूलियतों की वजह से वह काम छोड़ दूं, तो मैं उनका निरादर करूंगी, जिन्होंने मेरे ऊपर विश्वास किया।

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