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चाणक्य नीति: पति-पत्नि को रखना चाहिए इन बातों का ध्यान, सुखमय रहेगा वैवाहिक जीवन
Sat, 27 Jun 2020 12:06 AM IST
योगेश जोशी
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: योगेश जोशी
Updated Sat, 27 Jun 2020 12:06 AM IST
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आचार्य चाणक्य के अनुसार किसी भी परिवार की सुख-शांति और समृद्धि पति-पत्नि के मधुर संबंधो पर निर्भर करती है। अगर पति-पत्नि का रिश्ता कमजोर होगा तो परिवार के बिखरने की पूरी संभावना रहती है। आचार्य चाणक्य की नीतियों में ये बताया गया है कि पति-पत्नि को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। आचार्य चाणक्य की नीतियों के अनुसार अगर इन बातों का ध्यान रखा जाए तो पति-पत्नि का रिश्ता मजबूत होता है और वैवाहिक जीवन में समस्याएं नहीं आती हैं.....
प्रेम और सौहार्द में न आए कमी
- आचार्य चाणक्य के अनुसार पति-पत्नि के रिश्ते में प्रेम और सौहार्द का होना बहुत जरूरी है। अगर वैवाहिक जीवन में प्रेम और सोहार्द में कमी आ जाए तो घर का माहौल खराब होने लगता है। पति-पत्नि में प्रेम और सौहार्द हो तो घर में किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं आती है और घर का वातावरण सुखमय बना रहता है।
रिश्ते में न आए दूरी
- पति-पत्नि के रिश्ते में दूरियां नहीं आनी चाहिए। आचार्य चाणक्य की नीतियों के अनुसार अगर पति-पत्नि के बीच दूरियां बढ़ने लग जाएं तो इसका असर घर-परिवार पर भी पड़ने लगता है और घर-परिवार में भी कई तरह की समस्याएं आने लगती हैं। वैवाहिक जीवन को मजबूत बनाने के लिए पति-पत्नि को साथ में समय व्यतीत करना चाहिए। ऐसा करने से आपका रिश्ता मजबूत होगा।
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एक दूसरे की जरूरतों को समझें
- पति-पत्नि का रिश्ता पवित्र होता है, इस रिश्ते को कायम रखने के लिए एक दूसरे की जरूरतों को समझना बहुत जरूरी है। आचार्य चाणक्य की नीतियों के अनुसार अगर पति- पत्नि एक दूसरे की जरूरतों को नजरअंदाज करेंगे तो रिश्ते में दूरियां बढ़ने लगेंगी।
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प्रतिस्पर्धा की भावना न हो
- पति-पत्नि के रिश्ते में प्रतिस्पर्धा की भावना नहीं होनी चाहिए। आचार्य चाणक्य के अनुसार पति-पत्नि एक रथ के दो पहिए हैं। जिस प्रकार रथ तब ही चल सकता है जब उसके दोनों पहिए ठीक से चलेंगे, वैसे ही वैवाहिक जीवन भी तब ही चल पाएगा जब पति-पत्नि मिलकर कार्य करेंगे। अगर पति-पत्नि में एक दूसरे को लेकर प्रतिस्पर्धा की भावना आ जाए तो रिश्ते में दूरियां बढ़ने लगती हैं।