फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Wellness ›   Chanakya Niti for Success know five Steps To Be Successful in your Life

Chanakya Niti: जीवन में अपनाएं आचार्य चाणक्य की ये बातें, हर कार्य में मिलेगी सफलता

Wed, 13 Nov 2024 11:35 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Wed, 13 Nov 2024 11:35 AM IST
सार

Chanakya Niti: जीवन में सफल होने के लिए हर व्यक्ति प्रयास करता है, परंतु मनचाहे परिणाम कम लोग ही हासिल कर पाते हैं। इसका कारण परिश्रम में कमी या सही मार्गदर्शन की प्राप्ति व कई अन्य वजह भी हो सकती हैं। 

विज्ञापन
Chanakya Niti for Success know five Steps To Be Successful in your Life
Chanakya Niti for Success - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Chanakya Niti: जीवन में सफल होने के लिए हर व्यक्ति प्रयास करता है, परंतु मनचाहे परिणाम कम लोग ही हासिल कर पाते हैं। इसका कारण परिश्रम में कमी या सही मार्गदर्शन की प्राप्ति व कई अन्य वजह भी हो सकती हैं। इस दौरान दोबारा प्रयास करना व्यक्ति के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। हालांकि कुछ असफलताओं के घेरे में ही उलझे रहते हैं। ऐसी परिस्थिति में मन को शांत और सकारात्मक रखने के लिए आचार्य चाणक्य की नीतियों का पालन करना चाहिए।

विज्ञापन

आचार्य चाणक्य की गणना महान विद्वानों के रूप में की जाती है। उन्होंने अपने नीति शास्त्र में मनुष्य के जीवन से जुड़ी कई बातों का जिक्र किया है। उनका मानना है कि सफल होने के लिए इंसान को मेहनत के साथ-साथ योजनाओं पर भी काम करना चाहिए। चाणक्य के अनुसार मन से सोचे हुए कार्य को कभी भी वाणी द्वारा प्रकट नहीं करना चाहिए। व्यक्ति को हमेशा अपने लक्ष्यों को मन में रखकर उसके लिए प्रयास करना चाहिए। इससे उस कार्य के सफल होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है। ऐसे ही कई सफलता सूत्र का उल्लेख आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में किया है, आइए इसके बारे में जानते हैं।

विज्ञापन

इन्द्रियाणि च संयम्य बकवत् पण्डितो नरः ।
देशकालबलं ज्ञात्वा सर्वकार्याणि साधयेत् ।।

इस श्लोक का अर्थ है कि बुद्धिमान व्यक्ति को अपनी इन्द्रियों को वश में करके समय के अनुरूप अपनी क्षमता को तौलना चाहिए। साथ ही बगुले के समान अपने कार्यों को सिद्ध करना चाहिए।
आचार्य चाणक्य के अनुसार जीवन में समय के अनुरूप कार्य करने से परिणाम व्यक्ति के हित में आते हैं।

।। नानृतात्पातकं परम् ।
चाणक्य के इस श्लोक का अर्थ है कि झूठ से बढ़कर इस संसार में कोई पाप नहीं है। उनका मानना है कि झूठ बोलने से व्यक्ति को कई संकटों का सामना करना पड़ता है। झूठ के चलते मनुष्य स्वयं को भी धोखा देता है, जो लक्ष्य प्राप्त करने में बाधा उत्पन्न करते हैं। चाणक्य के अनुसार परिस्थिति कैसी भी हो इंसान को सदैव सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए।

।। न मीमांस्या गुरवः ।।
 चाणक्य के अनुसार मनुष्य को कभी भी अपने गुरु की आलोचना नहीं करनी चाहिए। गुरु सदैव शिष्य का हित चाहते हैं। वे कभी उसका अहित नहीं करते। 

सन्तोषाऽमृततृप्तानां यत्सुखं शान्तचेतसाम् । 
न च तद् धनलुब्धानामितश्चेतश्च धावताम् ।।

आचार्य चाणक्य के अनुसार जो व्यक्ति संतोषरूपी अमृत से तृप्त है और मन से शांत है, उस व्यक्ति को हमेशा सुख मिलता है। इंसान को कभी भी किसी भी कार्य या धन के प्रति लालच नहीं रखना चाहिए, क्योंकि करने वाला इंसान हमेशा भागदौड़ में उलझा रहता है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स, परामनोविज्ञान समाचार, स्वास्थ्य संबंधी योग समाचार, सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed