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एक फोन कॉल बदल सकती है आपकी राह
टिम कुक
Updated Mon, 06 Aug 2018 03:12 PM IST
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मैं अलबामा के मोबिले में पैदा हुआ और पड़ोस के कस्बे रॉबर्ट्सडेल में पला-बढ़ा। मेरे पिता शिपयार्ड में नौकरी करते थे, जबकि मां एक फार्मेसी में काम करती थीं। इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन करने के बाद आईबीएम के पर्सनल कम्यूटर बिजनेस में मैंने बारह साल गुजारे। उसी दौरान एमबीए करने के बाद मैं इंटेलीजेंट इलेक्ट्रॉनिक्स में सीओओ (चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर) बन गया। 1998 में एक दिन मेरे पास एक कॉल आई, जिसने मेरा जीवन बदल दिया।
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फोन पर स्टीव जॉब्स थे, जो चाहते थे कि मैं एपल जॉइन कर लूं। मेरे पुराने साथियों ने हालांकि मुझे कॉम्पैक में ही बने रहने की सलाह दी, लेकिन मेरे भीतर से आवाज आई कि स्टीव जॉब्स जैसे जीनियस के साथ काम करना मेरी पूरी जिंदगी के लिए यादगार अनुभव होगा। उनके साथ मेरी पहली मुलाकात पांच मिनट से ज्यादा नहीं चली। एपल में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के पद पर मेरी नियुक्ति होते ही मैंने कंपनी की सारी फैक्टरियां और गोदाम बंद करवा दिए। उनकी जगह कांट्रेक्ट मैन्यूफैक्चरर्स ने ले ली। इससे कंपनी के खर्च में बहुत कमी आई। कंपनी के खर्च कम करने के अलावा डिजाइनिंग और मार्केटिंग के क्षेत्र में मेरे शानदार काम को सराहा गया।
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इन सबसे कंपनी का मुनाफा भी बढ़ा। 2007 में मुझे कंपनी के ऑपरेशंस को नेतृत्व देने की जिम्मेदारी मिली और 2009 में मैं चीफ एक्जीक्यूटिव बन गया। उस दौरान स्टीव जॉब्स मेडिकल लीव पर थे। 2011 में जॉब्स को चेयरमैन बनाए जाने पर मैं एपल का सीईओ नियुक्त हुआ।कुछ समय बाद पैनक्रियाज कैंसर से जॉब्स की मौत हो गई। मैंने कंपनी में बेहतर माहौल बनाने की कोशिश की। एक समय शेयरधारकों को मुझे यहां तक कहना पड़ा कि अगर वे सतत विकास और जलवायु परिवर्तन से संबंधित कंपनी की नीतियों से सहमत नहीं हैं, तो बाहर जा सकते हैं। मैंने जहां एपल को नवीकरणनीय ऊर्जा गतिविधियों से जोड़ा है, वहीं मेरे नेतृत्व में कंपनी ने परोपकार के क्षेत्र में डोनेशन बढ़ाया है। अब एपल दुनिया की पहली ट्रिलियन डॉलर कंपनी भी बन गई है।
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कुछ लोग नवाचार को बदलाव के तौर पर देखते हैं, जबकि मेरे लिए यह लोगों का जीवन बेहतर बनाने का जरिया है।