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जानिए हनुमानजी ने क्यों अपना हृदय चीरकर प्रभु श्रीराम और माता सीता के करवाएं दर्शन

Tue, 09 May 2023 04:45 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Tue, 09 May 2023 04:45 PM IST
सार

प्रभु श्री राम के प्रति बाल ब्रह्मचारी हनुमान की निस्वार्थ भक्ति और अनन्य प्रेम इस पौराणिक कथा से स्पष्ट होता है। हनुमानजी ने भगवान राम के दिल में ऐसी जगह बनाई कि दुनिया उन्हें प्रभु राम का सबसे बड़ा भक्त मानती है।

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Why Did Hanuman Tore His Chest Know Significance and Interesting Facts in Hindi
मंगल ,शनि एवं पितृ दोषों से मुक्ति कि लिए भी हनुमान जी की आराधना अत्यंत लाभकारी होती है। - फोटो : iStock

विस्तार

शास्त्रों के अनुसार श्रीराम भक्त हनुमान अजर-अमर हैं, वो हर युग में रहते हैं। हनुमानजी की भक्ति करने से सभी संकट चमत्कारिक रूप से समाप्त होकर भक्त को शांति और सुख प्राप्त होता है। मंगलवार और शनिवार का दिन विशेषरूप से हनुमानजी की उपासना करने के लिए श्रेष्ठ माना गया है। ये थोड़ी सी पूजा से जल्दी प्रसन्न होकर अपने भक्तों के कष्टों का निवारण करते हैं। मंगल ,शनि एवं पितृ दोषों से मुक्ति कि लिए भी हनुमान जी की आराधना अत्यंत लाभकारी होती है। घर में फैली नकारात्मक ऊर्जा एवं बुरी शक्तियां भी हनुमानजी की आराधना करने से भाग जाती हैं। प्रभु श्री राम के प्रति बाल ब्रह्मचारी हनुमान की निस्वार्थ भक्ति और अनन्य प्रेम इस पौराणिक कथा से स्पष्ट होता है। हनुमानजी ने भगवान राम के दिल में ऐसी जगह बनाई कि दुनिया उन्हें प्रभु राम का सबसे बड़ा भक्त मानती है।

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जब हनुमानजी ने अपना सीना चीर दिया
पौराणिक कथा के अनुसार भगवान राम के राज्याभिषेक के बाद दरबार में उपस्थित सभी लोगों को उपहार दिए जा रहे थे। इसी दौरान माता सीता ने रत्न जड़ित एक बेश कीमती माला अपने प्रिय हनुमान को दी। प्रसन्न चित्त से उस माला को लेकर हनुमान जी थोड़ी दूरी पर गए और उसे अपने दांतों से तोड़ते हुए बड़ी गौर से माला के मोती को देखने लगे। उसके बाद उदास होकर एक-एक कर उन्होंने सारे मोती तोड़-तोड़ कर फेंक दिए। यह सब दरबार में उपस्थित लोगों ने देखा तो सब के सब आश्चर्य में पड़ गए। जब हनुमान जी मोती तो तोड़ कर फेंक रहे थे तब लक्ष्मणजी को उनके इस कार्य पर बहुत क्रोध आया,इस बात को उन्होंने श्री राम का अपमान समझा। उन्होंने प्रभु राम से कहा कि ‘हे भगवन, हनुमान को माता सीता ने बेशकीमती रत्नों और मनकों की माला दी और इन्होंने उस माला को तोड़कर फेंक दिया।
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जिसके बाद भगवान राम बोले, ‘हे अनुज तुम मुझे मेरे जीवन से भी अधिक प्रिय हो, जिस कारण से हनुमान ने उन रत्नों को तोड़ा है यह उन्हें ही मालूम है। इसलिए इस जिज्ञासा का उत्तर हनुमान से ही मिलेगा। तब राम भक्त हनुमान ने कहा ‘मेरे लिए हर वो वस्तु व्यर्थ है जिसमें मेरे प्रभु राम का नाम ना हो। मैंने यह हार अमूल्य समझ कर लिया था, लेकिन जब मैनें इसे देखा तो पाया कि इसमें कहीं भी राम-नाम नहीं है। उन्होंने कहा मेरी समझ से कोई भी वस्तु श्री राम के नाम के बिना अमूल्य हो ही नहीं सकती।अतः मेरे हिसाब से उसे त्याग देना चाहिए। यह बात सुनकर भ्राता लक्ष्मण बोले कि आपके शरीर पर भी तो राम का नाम नहीं है तो इस शरीर को क्यों रखा है? हनुमान तुम इस शरीर को भी त्याग दो। लक्ष्मण की बात सुनकर हनुमान ने अपना वक्षस्थल नाखूनों से चीर दिया और उसे लक्ष्मणजी सहित सभी को दिखाया, जिसमें श्रीराम और माता सीता की सुंदर छवि दिखाई दे रही थी। यह घटना देख कर लक्ष्मण जी से आश्चर्यचकित रह गए, और अपनी गलती के लिए उन्होंने हनुमानजी से क्षमा मांगी।
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