सनातन परंपरा में शिव की पूजा का बहुत महत्व है। भगवान शिव औढर दानी हैं। कहने का तात्पर्य यह कि भोलेनाथ जिस पर मेहरबान हो जाते हैं, उसकी मनोकामना पूरी कर देते हैं। भगवान शिव के कई नाम है। शिव के भक्त उन्हें, शंकर, महादेव, भोले, बाबा आदि नामों से बुलाते हैं। भोले भगवान शंकर का लोकप्रिय नाम है। जिसका उद्घोष अक्सर उनके भक्त पूजन-अर्चन के दौरान करते हैं। शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव की आराधना करने से अकाल मृत्यु समेत कुंडली के तमाम तरह के दोषों का निवारण हो जाता है।
आज शिव की इस पूजा से पूरी होंगी मनोकामनाएं और बन जाएंगे बिगड़े काम
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शिवलिंग की पूजा का फल
जीवन से जुड़ी सभी मनोकामनाओं को पूरा करने की शक्ति शिवलिंग के अभिषेक में समाहित है। शिवलिंग का पूजन-अभिषेक करने से सभी देवी-देवताओं के अभिषेक का फल उसी क्षण प्राप्त हो जाता है। श्री लिंग पुराण के अनुसार शिवलिंग के मूल में ब्रह्मा, मध्य में तीनों लोकों के ईश्वर श्री विष्णु तथा ऊपरी भाग में प्रणव संज्ञक महादेव रूद्र सदाशिव विराजमान रहते हैं। जबकि लिंग की वेदी महादेवी अम्बिका हैं। यही कारण है कि शिवलिंग की पूजा करने वाले साधक को बड़ी सहजता से ही शिव और शक्ति दोनों का ही आशीर्वाद मिल जाता है।
मनोकामनाओं के अनुसार चुनें शिवलिंग
जीवन से जुड़ी अलग-अलग मनोकामनाओं के लिए अलग-अलग शिवलिंग और अलग-अलग तरीके से शिवलिंग के अभिषेक का विधान है। जैसे रत्नों द्वारा निर्मित लिंग की पूजा लक्ष्मी की कृपा दिलाने वाला होता है, वहीं पत्थरों से बना लिंग सभी प्रकार की सिद्धियों को प्रदान करने वाला होता है। इसी प्रकार धातु से बना शिवलिंग धन-संपत्ति देने वाला, लकड़ी से बना शिवलिंग भोग-सिद्धि प्रदान करने वाला, शुद्ध मिट्टी से बना हुआ (पार्थिव) शिवलिंग सभी सिद्धियों की प्राप्ति कराने वाला, पारद से बना शिवलिंग सभी प्रकार के दैहिक, दैविक एवं भौतिक दु:खों को दूर करने वाला होता है।
मनोकामनाओं के अनुसार शिवलिंग का अभिषेक
भगवान शिव की पूजा बहुत ही सरल है। शिव पूजन में प्रयोग आने वाली चीजें आसानी से मिल जाती है। जैसे भगवान शिव ऐसे देवता हैं, जो महज एक लोटा गंगा जल या शुद्ध जल अर्पित करने मात्र से ही प्रसन्न हो जाते हैं। हालांकि शिवलिंग पर कई ऐसी चीजें भी जो मनोकामनाओं के हिसाब अभिषेक में अर्पित की जाती हैं। जैसे यदि किसी के विवाह में अड़चनें आ रही हैं तो उसे बाधाओं को दूर करने के लिए गन्ने के रस से शिव का अभिषेक करना चाहिए।
इसी तरह जीवन से जुड़े तमाम तरह के कर्ज को दूर करने के लिए पूरे शहद से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। इस अभिषेक से साधक के सिर से न सिर्फ सभी प्रकार के कर्ज उतर जाते हैं, बल्कि उसे सभी पापों से मुक्ति मिलती है। शिवलिंग का कच्चे दूध से अभिषेक करने से आरोग्य की प्राप्ति होती हैं और संतान का सुख मिलता है। गाय के घी से अभिषेक करने पर शिव के आशीर्वाद से धन में वृद्धि और आयु बढ़ती है, तो वहीं सरसों के तेल से अभिषेक करने से शत्रुओं का नाश होता है।
शिव पूजन में न करें इन चीजों का प्रयोग
पूजा में कुछ चीजों का प्रयोग करने से जहां भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होकर मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं, वहीं कुछ चीजों के प्रयोग से नाराज हो जाते हैं। आइए जानते हैं कि किन चीजों को भूलकर भी भगवान शिव को नहीं चढ़ाना चाहिए —
1. नारियल - भगवान की शिव की पूजा के दौरान कभी भी नारियल के पानी से अभिषेक नहीं करना चाहिए। नारियल देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे शिव जी को नहीं चढ़ाया जाता है।
2. सिंदूर - कभी भी भूलकर शिवलिंग पर सिंदूर या कुमकुम नहीं चढ़ना चढ़ना चाहिए। दरअसल, कुमकुम सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, जबकि भगवान शिव वैरागी हैं, इसलिए शिव जी को कुमकुम नहीं चढ़ना चाहिए।
3. हल्दी - हल्दी का संबंध भी सौभाग्य से होता है, इसलिए शिवलिंग पर हल्दी को न चढ़ाएं।
4.शंख - भले ही हम तमाम तरह की पूजा में शंख का प्रयोग करते हों लेकिन शिव पूजन में इसका प्रयोग नहीं किया जाता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव ने शंखचूड़ नाम के असुर का वध किया था, जो भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था। शंख को उसी असुर का प्रतीक माना जाता है। इसलिए भगवान की पूजा में शंख का प्रयोग नहीं किया जाता।
5. तुलसी - सनातन परंपरा में तुलसी के पौधे और उसकी पत्तियों को पूजा के लिए शुभ माना गया है। पूजा के अलावा भी यह काफी गुणकारी है, लेकिन तुलसी के पत्तों को शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित है। ऐसा इसलिए क्योंकि भगवान शिव ने तुलसी के असुर पति का वध किया कर दिया था। ऐसे में कई बार लोग अनजाने में शिव की पूजा में तुलसी का प्रयोग करने की गलती कर जाते हैं। जिसके कारण उनकी पूजा पूर्ण नहीं होती।
6.अक्षत - भगवान शिव को अक्षत यानी चावल कभी न चढ़ाएं। धार्मिक मान्यता के अनुसार टूटा हुआ चावल अपूर्ण और अशुद्ध होता है, इसलिए यह शिवलिंग पर नहीं चढ़ता।
7.तिल - हिन्दू धर्म में तुलसी के पौधे को बहुत शुभ माना गया है। सभी तरह के शुभ कार्यों में तुलसी के पत्तों का प्रयोग किया जाता है। लेकिन तुलसी के पत्तों को शिवलिंग पर चढ़ाना मना है। दरअसल भगवान शिव ने तुलसी के असुर पति का वध किया कर दिया था। ऐसे में कई बार लोग भूलवश भोलेनाथ की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल करते हैं जिस वजह से उनकी पूजा पूरी नहीं मानी जाती।