Shardiya Navratri 2024: अष्टमी-नवमी को करने जा रहे हैं कन्या पूजन, पहले जान लें सही विधि और महत्व
कन्या पूजन करने से घर पर सुख-समृद्धि का सदा वास होता है। ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि नवरात्रि के अष्टमी तिथि को मां महागौरी और नवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है।
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Shardiya Navratri 2024 Kanya Pujan Vidhi: शारदीय नवरात्रि में पूरे 9 दिनों तक मां भगवती की अराधना की जाती है। नवरात्रि के अष्टमी और नवमी तिथि को साधक और भक्त कन्या पूजन करते हैं। इसे कंजक पूजन भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि में छोटी-छोटी कन्याओं का कन्या पूजन करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। कन्या पूजन करने से घर पर सुख-समृद्धि का सदा वास होता है। ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि नवरात्रि के अष्टमी तिथि को मां महागौरी और नवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है। इसलिए इन दो दिनों में कन्या पूजन करना शुभ होता है।
भक्त नवरात्रि की अष्टमी को तो कुछ नवमी तिथि को भी कन्या पूजन करते हैं। लेकिन पंचांग के मुताबिक, इस साल अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन पड़ रही है। इसलिए कन्या पूजन को लेकर भक्तों में असमंजस की स्थिति है कि कन्या पूजन कब करना चाहिए। जो भक्त सप्तमी का व्रत रखकर अष्टमी को कन्या पूजन करते हैं उनके लिए सप्तमी व्रत गुरुवार 10 अक्टूबर का रहेगा एवं कन्या पूजन का समय शुक्रवार 11 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 6 मिनट तक रहेगा।
जो भक्त अष्टमी व्रत रखकर नवमी को कन्या पूजन करते हैं, उनके लिए अष्टमी व्रत 11 अक्टूबर शुक्रवार को रहेगा एवं कन्या पूजन समय 12 अक्टूबर शनिवार को 10 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। इसके पश्चात विजया दशमी का पर्व मनाया जायेगा।
कन्या पूजन का महत्व -
देवी भागवत में नवकन्याओं को नवदुर्गा का प्रत्यक्ष विग्रह बताया गया है। उसके अनुसार नवकुमारियां भगवती के नवस्वरूपों की जीवंत मूर्तियां है। इसके लिए दो से दस वर्ष तक की कन्याओं का चयन किया जाता है।
- दो वर्ष की कन्या ‘कुमारिका’ कहलाती है, जिसके पूजन से धन-आयु-बल की वृद्धि होती है।
- तीन वर्ष की कन्या ‘त्रिमूर्ति’ कही जाती है। इसके पूजन से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
- चार वर्ष की कन्या ‘कल्याणी’ के पूजन से विवाह आदि मंगल कार्य संपन्न होते हैं।
- पांच वर्ष की कन्या ‘रोहिणी’ की पूजा से स्वास्थ्य लाभ होता है।
- छह वर्ष की कन्या ‘कालिका’ के पूजन से शत्रु का दमन होता है।
- आठ वर्ष की कन्या ‘शांभवी’ के पूजन से दुःख-दरिद्रता का नाश होता है।
- नौ वर्ष की कन्या ‘दुर्गा’ पूजन से असाध्य रोगों का शमन और कठिन कार्य सिद्ध होते हैं।
- दस वर्ष की कन्या ‘सुभद्रा’ पूजन से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
देवी भागवत में इन नौ कन्या को कुमारी नवदुर्गा की साक्षात प्रतिमूर्ति माना गया है। दस वर्ष से अधिक आयु की कन्या को कुमारी पूजा में सम्मिलित नहीं करना चाहिए। कन्या पूजन के बिना भगवती महाशक्ति कभी प्रसन्न नहीं होतीं। कन्या पूजन के दौरान कन्याओं को पूरी, चना, हलवा और नारियल का भोग खिलाएं। फिर सामर्थ्यनुसार भेंट दें। कन्याओं को विदा करने से पहले उनके पैर जरूर छूएं और उनके हाथों से अक्षत के कुछ दाने अपने घर पर छिड़काएं।
पं . मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य
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