Shani: शनि के मीन में आने से मेष राशि के लोगों पर शुरू हुई साढ़ेसाती, प्रभाव से बचने के लिए करें ये काम
Shani: 29 मार्च 2025 को शनि मीन राशि में प्रवेश कर चुके हैं, जो साल का सबसे बड़ा गोचर है। माना जा रहा है कि शनि लगभग 30 वर्षों के बाद मीन राशि में आएं हैं। उनका यह गोचर मकर राशि वालों के लिए बेहद लाभकारी साबित हुआ है।
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Shani: 29 मार्च 2025 को शनि मीन राशि में प्रवेश कर चुके हैं, जो साल का सबसे बड़ा गोचर है। माना जा रहा है कि शनि लगभग 30 वर्षों के बाद मीन राशि में आएं हैं। उनका यह गोचर मकर राशि वालों के लिए बेहद लाभकारी साबित हुआ है। बता दें, शनि के मीन में आने से मकर राशि वालों पर चल रही शनि की साढ़ेसाती समाप्त हो चुकी है। इतना ही नहीं इस गोचर से कर्क और वृश्चिक राशि वालों पर से ढैय्या का प्रभाव भी खत्म हो गया है। लेकिन शनि राशि परिवर्तन से मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती शुरू हो गई है।
ज्योतिषियों के अनुसार मेष राशि के लोगों पर 2032 तक शनि की साढ़ेसाती रहेगी। कहते हैं कि साढ़ेसाती होने पर जातक को आर्थिक तंगी, धन से जुड़ी समस्याएं व नौकरी में कई तरह की बाधाएं झेलनी पड़ती हैं। परंतु दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करने से साढ़ेसाती के प्रभाव को कम किया जा सकता है। मान्यता है कि इस पाठ से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। ऐसे में आइए इस पाठ के बारे में जानते हैं...
नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठ निभाय च।
नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम:।।
नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च।
नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते।।
नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नम:।
नमो दीर्घाय शुष्काय कालदंष्ट्र नमोऽस्तु ते।।
नमस्ते कोटराक्षाय दुर्नरीक्ष्याय वै नम:।
नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने।।
नमस्ते सर्वभक्षाय बलीमुख नमोऽस्तु ते।
सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करेऽभयदाय च।।
अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तु ते।
नमो मन्दगते तुभ्यं निस्त्रिंशाय नमोऽस्तुते।।
तपसा दग्ध-देहाय नित्यं योगरताय च।
नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नम:।।
ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज-सूनवे।
तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात्।।
देवासुरमनुष्याश्च सिद्ध-विद्याधरोरगा:।
त्वया विलोकिता: सर्वे नाशं यान्ति समूलत:।।
प्रसाद कुरु मे सौरे वारदो भव भास्करे।
एवं स्तुतस्तदा सौरिर्ग्रहराजो महाबल:।।
शनिदेव के प्रमुख मंत्र
जानिए शनिदेव की पूजा करते वक्त किन मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है.
शनि गायत्री मंत्र
ॐ शनैश्चराय विदमहे छायापुत्राय धीमहि ।
शनि बीज मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रों स: शनैश्चराय नमः ।।
शनि स्तोत्र
ॐ नीलांजन समाभासं रवि पुत्रं यमाग्रजम ।
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम ।।
शनि पीड़ाहर स्तोत्र
सुर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्ष: शिवप्रिय: ।
दीर्घचार: प्रसन्नात्मा पीडां हरतु मे शनि: ।।
तन्नो मंद: प्रचोदयात ।।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।